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लोक गीतों में छुपी गंगा को सहेजने का प्रयास
Updated Wed, 20 Sep 2017 10:35 PM IST
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उत्तरकाशी। गंगा घाटी के लोक गीतों और यहां की संस्कृति में छुपे गंगा के महत्व को सहेजने के लिए एक अध्ययन समूह का गठन किया गया है, जिसमें हिमालयी पर्यावरण शिक्षा संस्थान के सुरेश भाई, हिमालय सेवा संघ के मनोज पांडे, उत्तराखंड जन जागृति संस्थान के अरण्य रंजन, उत्तरकाशी के सुरेंद्र पुरी, हिमला डंगवाल आदि शामिल हैं। दिल्ली विश्वाविघालय की पूर्व प्रोफेसर अंजलि कपिला के संयोजन में चलाए जा रहे अभियान का शुभारंभ मई 2017 को किया गया था।
अभियान के दूसरे चरण में अध्ययन दल ने मुखवा गांव के सेलुकू (सोएगा कौन) नामक उत्सव में भाग लिया। गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल, अशोक सेमवाल, हर्षिल की प्रधान बसंती नेगी समेत दर्जनों लोगो से बातचीत करके मेलों व त्योहारों की जानकारी ली गई।
अभियान के दूसरे चरण में अध्ययन दल ने मुखवा गांव के सेलुकू (सोएगा कौन) नामक उत्सव में भाग लिया। गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल, अशोक सेमवाल, हर्षिल की प्रधान बसंती नेगी समेत दर्जनों लोगो से बातचीत करके मेलों व त्योहारों की जानकारी ली गई।
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