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उत्तराखंडः देवप्रयाग में बादल फटने से दो लोगों की मौत
देहरादून/ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jun 2013 12:08 PM IST
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उत्तराखंड में हो रही बारिश के कारण सेना के राहत और बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।
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वहीं, देवप्रयाग के दूभ मरोरा गांव में मंगलवार सुबह बादल फटने से एक ही परिवार के दो लोगों की मौत हो गई।
इस परिवार के दो सदस्य अभी भी लापता हैं।
आपदा में फंसे हजारों लोगों को बचाने की राह में बारिश, बादल और घाटियों में छाई धुंध जवानों का कड़ा इम्तिहान ले रही है।
लेकिन मुश्किलों से लड़कर सेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ के जवानों ने चार हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया। इनमें से ज्यादातर को बेहद दुर्गम रास्तों से पैदल निकाला गया।
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शासन के मुताबिक अब भी चार हजार तीर्थयात्री बेहद मुश्किल हालात में फंसे हैं, जिन्हें मंगलवार को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि सेना साढ़े छह से सात हजार लोगों को निकालने का लक्ष्य मानकर चल रही है।
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हालांकि अभी भी हजारों लोग उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में फंसे हुए हैं। इनको वहां से सुरक्षित निकालने के लिए सेना ने अपना पूरा दमखम लगा दिया है। हालांकि अभी भी सेना के सामने कुछ प्रमुख बाधाएं कड़ी परीक्षा ले रही है।
बाधा नंबर-1: बदरीनाथ से जोशीमठ
यहां सोमवार दोपहर 12 बजे के बाद हवाई बचाव अभियान शुरू हुआ और दोपहर तीन बजे बंद हो गया। पैदल मार्ग से 1200 लोगों को लामबगड़ का वर्मा पुल पार करवाने में आईटीबीपी और सेना को खासी दिक्कतें झेलनी पड़ी। इसके स्थान पर हैलीब्रिज बनाकर फंसे लोगों को निकाला।
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बाधा नंबर-2: हर्षिल से उत्तरकाशी
धरासु में हैलीकाप्टर सेवा सोमवार सुबह दस बजे शुरू होकर शाम तीन बजे तक चली। वायुसेना व सेना के 5 एमआई17 हेलीकाप्टरों ने उड़ाने भरकर हर्षिल से 402 लोगों को चिन्यालीसौड़ पहुंचाया। इस मार्ग पर खराब मौसम सबसे बड़ा बाधक है। यहां पर सेना ने गाड़ियां चलाईं, लेकिन बारिश प्रभावित से रहा है।
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बाधा नंबर-3: देहरादून
देहरादून के जौलीग्रांट और सहस्त्रधारा से 14 हेलीकाप्टर सोमवार शाम चार बजे तक उड़ान भरन के लिए के लिए जूझते रहे। वायुसेना ने सुबह 10 बजे उड़ानें भरी लेकिन देवप्रयाग के पास भारी धुंध के कारण लौटना पड़ा।
ऐसे में पहाड़ों पर राहत सामग्री, चिकित्सक, राहत कर्मी को ले जाने के साथ केदार घाटी और उत्तरकाशी से यात्री लाने में दिक्कत झेलनी पड़ी। देहरादून का हवाई मिशन लगभग ठप रहा।
बाधा नंबर-4: केदार घाटी
खराब मौसम के चलते दोपहर एक एक बजे तक गौचर से हेलीकॉप्टर गुप्तकाशी को उड़ान नहीं भर सके। जंगलचट्टी से दो उड़ाने संभव हो पाई हैं। लगभग डेढ़ सौ यात्री पैदल निकाले गए हैं।
बाधा नंबर-4: केदार घाटी
सैकड़ों लोग हेलीकॉप्टर से भी निकाले गए। शासन के मुताबिक अब भी चार हजार लोग बेहद मुश्किल हालात में फंसे हैं, जिन्हें मंगलवार को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाएगा।
बाधा नंबर-5: बारिश, ठंड व भूस्खलन
दिक्कत यह है कि सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए सैकड़ों लोग भी कई जगह बारिश, ठंड और भूस्खलन की आशंका के बीच असुरक्षित स्थिति में पहुंच गए हैं।
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ऐसे ही डेढ़ हजार यात्री वे हैं, जो बदरीनाथ धाम से तो निकल आए हैं लेकिन चमोली जिले के लामबगड़ में फंस गए हैं। ये यात्री अलकनंदा के तट पर खतरों और आशंकाओं के बीच खुले आसमान के नीचे रात बिताने का मजबूर हैं। दिक्कत यहीं खत्म नहीं होती।
मंगलवार को और तेज बारिश की आशंका है। ऐसे में फंसे हुए चार से पांच हजार लोगों को निकालना और मुश्किल काम होगा। सोमवार को चमोली जिले में दिनभर बादल छाए रहे और शाम पांच बजे से बदरीनाथ, जोशीमठ, गोविंदघाट आदि क्षेत्रों में हल्की बारिश शुरू हो गई।
भारी पड़ेगा मौसम
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले तीन दिनों में राज्य भर में बारिश का सिलसिला कायम रहने वाला है। आपदा प्रभावित चमोली और उत्तरकाशी जिलों में भी भारी बारिश की आशंका है। कुमाऊं के पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल आदि स्थानों पर तेज बारिश होगी।
शासन के मुताबिक प्राकृतिक आपदा के बाद रुद्रप्रयाग, चमोली व उत्तरकाशी जिलों में फंसे तीर्थयात्रियों की संख्या अब चार हजार है।
हालांकि, कई जगह यात्रियों की संख्या को लेकर मिल रही सूचनाओं को देखें तो यह आंकड़ा काफी कम लगता है। ऐसे में बचे और निकाले लोगों की संख्या पर भ्रम बना हुआ है।
-557 मौतें अधिकृत तौर पर बताई गई हैं। 22 जून को भी मुख्य सचिव ने इतनी ही मौतों की जानकारी दी थी।
--402 यात्री उत्तरकाशी के हर्षिल से निकाले गए।
--351 यात्री मनेरी और 77 भटवाड़ी से निकले।
--1700 यात्री बदरीनाथ धाम से निकाले गए।
--160 यात्री इनमें से एयरलिफ्ट किए गए।
--200 यात्री यमुनोत्री घाटी से बचाए गए।
--1470 लोग जोशीमठ से निकालकर आगे भेजे गए।
(ये सभी लोग पहले बदरीनाथ, घांघरिया, पुलना जैसे खतरनाक जगहों से निकालकर यहां लाए गए थे।)
--1000 लोग जगह-जगह से सड़क मार्ग से गंतव्य को रवाना।
--2500 श्रद्धालु बदरीनाथ धाम में अब भी हैं।
--2000 स्थानीय लोग भी बदरीनाथ में फंसे हैं।
--1250 यात्री हर्षिल में अब भी फंसे हुए हैं।
--200 लोग मनेरी, 40 यात्री भटवाड़ी में हैं।
--1500 लोग उफनाई अलकनंदा नदी के तट पर चमोली जिले के लामबगड़ में फंसे हैं।
(ये वो यात्री हैं, जो जगह-जगह से बचाकर यहां लाए गए हैं। उफनाई नदी के चलते एक-एक कर लोगों को निकाला जा रहा है।)