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उत्तराखंड: बचाए जाने के इंतजार में हजारों लोग

Thu, 20 Jun 2013 01:09 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Thu, 20 Jun 2013 01:09 PM IST
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uttarakhand flood disaster 150 dead hundreds missing

केदारनाथ घाटी में मौजूद हजारों जिंदगियां कहां सिसक रही हैं किसी को नहीं मालूम। लोग भूखे-प्यासे और बीमारी से मर रहे हैं लेकिन इनका हालचाल लेने वाला कोई नहीं है।

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हालांकि सेना, एनडीआरएफ, आईटीबीपी के हजारों जवान इन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन रास्ते बहने से बहुत परेशानियां आ रही हैं।

बचाव कार्य में खराब मौसम भी बाधा डाल रहा है। लेकिन अब खराब मौसम से बाधित हुआ राहत और बचाव कार्य फिर से शुरू हो गया है।

गांव के गांव बहे
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उत्तराखंड में तबाही का कोई ओर-छोर नहीं दिख रहा है। गांव के गांव बह जाने की सूचना मिल रही है। केदारघाटी और अन्य जगहों पर 62 हजार से ज्यादा लोग अब भी फंसे हैं। सेना और अन्य एजेंसियां राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं, लेकिन जन-धन के भारी नुकसान के बीच फिलहाल हर कोशिश कम पड़ रही है।
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तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत

केदारघाटी और अन्य जगहों पर 62 हजार से ज्यादा लोग अब भी फंसे हैं। इनमें से ज्यादातर चार दिन से भूखे हैं। सैकड़ों लोग लापता हैं। 150 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, लेकिन मरने वालों की संख्या हजारों में होने की आशंका जताई जा रही है।

अलग-अलग जगहों से बचाए गए लोगों की सूची

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, केदारघाटी में जगह-जगह लोगों के शव पड़े हैं और सैकड़ों लोग लापता है। 62 हजार से ज्यादा लोग अब भी विभिन्न जगहों पर फंसे हैं।

रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में भोजन के बिना फंसे लोगों की हालत बिगड़ रही है। सबसे खराब स्थिति केदारघाटी की है। सोनप्रयाग, गौरीकुंड, गुप्तकाशी, फाटा में फंसे सैकड़ों लोगों को चार दिन से खाने के लिए अन्न का एक दाना तक नसीब नहीं हो पाया है।

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बताया जा रहा है कि गौरीकुंड में फंसे करीब ढाई हजार लोगों में से कई की हालात गंभीर बनी हुई है। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 17 किमी क्षेत्र में कई लोग जंगलों में फंसे हैं।

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एनडीआरएफ की टीम अब तक केदारनाथ नहीं पहुंच पाई है। हालांकि, प्रमुख सचिव राकेश शर्मा के मुताबिक जगह-जगह खाने के पैकेट गिराए गए हैं।

वहीं अपने लोगों की हालत जानने और उनकी हर संभव मदद के लिए राजस्थान, पश्चिम बंगाल के मंत्री देहरादून पहुंचे।

अलग-थलग पड़ गए हैं गांव
उत्तरकाशी में बाढ़ से सड़क, संपर्क मार्ग और पुलों के बहने से गंगा घाटी के दर्जनों गांव अलग-थलग पड़ गए हैं। इन इलाकों में रसद का संकट गहराने लगा है।

तस्वीरों में देखिए: तबाही का मंजर


गंगोत्री हाईवे पर जगह-जगह फंसे चार हजार से ज्यादा यात्रियों के समक्ष भुखमरी की स्थिति है। गंगनानी, सुनगर, डबराणी के ढाबों में राशन खत्म होने पर यात्री जीवन बचाने के लिए निकटवर्ती गांवों में पहुंच रहे हैं।

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भैरोंघाटी, झाला, जसपुर, सुक्की, डबराणी, गंगनाणी तथा सुनगर में कही होटल ढाबों में राशन नहीं बचा है। सुक्की गांव में ही 950 से ज्यादा यात्री फंसे हैं।

गांव वालों ने पहले तो यात्रियों को गांव में शरण दी, लेकिन अब उनके घर का ही राशन खत्म होने लगा है। यही स्थिति गंगनानी तथा सुनगर की है। गांव वाले यात्रियों को जंगली सब्जियों की पहचान बताकर जीवन बचाने के लिए उन्हें खाने की सलाह दे रहे हैं।

हजारों लोगों को निकाला गया

बुधवार को रुद्रप्रयाग से 700 लोग, चमोली से 500 और निकाले गए। इन दोनों जगहों से मंगलवार को 2850 यात्री निकाले गए थे। सेना का दावा है कि अब तक साढ़े पांच हजार यात्री सुरक्षित निकाले गए हैं।

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हजारों स्थानीय लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। दूसरी ओर शासन ने अब तक 22 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का दावा किया है।

चमोली जिले में बुधवार को सुबह से ही गढ़वाल स्काउट के जवान राहत, बचाव कार्य में जुट गए। शाम तक बदरीनाथ, पुलना, घांघरिया और गोविंदघाट से करीब 500 तीर्थयात्री और स्थानीय लोगों को जोशीमठ लाया गया।

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उधर, रुद्रप्रयाग में केदारनाथ से लोगों को गुप्तकाशी, फाटा लाया गया। एनडीआरएफ की दो टीमें भी रुद्रप्रयाग पहुंच गई।

हेलीकॉप्टर के जरिए बृहस्पतिवार को प्रभावित क्षेत्रों में ये टीमें उतरेंगी। एनडीआरएफ टीम अस्थायी रास्ते व पुल बनाकर प्रभावितों को गुप्तकाशी तक लाने का काम करेगी। यहां से प्रभावितों को गुप्तकाशी-बसुकेदार-मयाली-घनसाली-टिहरी होते हुए ऋषिकेश पहुंचाया जाएगा।

उत्तराखंड सरकार का रवैया बेहद ढीला
भयावह आपदा के बावजूद उत्तराखंड सरकार का रवैया बेहद ढीला दिख रहा है।

आपदा में फंसे लोगों की तो दूर, बल्कि जो खुद बचकर किसी तरह सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे हैं सरकारी अमला उन्हें भी कोई मदद मुहैया नहीं करा पा रहा है। लोगों को खाना और पीने का पानी तक नसीब नहीं है।

राज्य में आपदा के बीच खुद मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ही दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करने में मसरूफ दिखे।

5 रुपये का बिस्कुट 100 में मिल रहा है
मुसीबत में कई लोग मुंह मांगी कीमत वसूल रहे हैं। कहीं एक पैकेट बिस्कुट के लिए 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं तो एक कप चाय भी 25 रुपये की मिल रही है।

वहीं, शरण देने की एवज में हजारों रुपये मांगे जा रहे हैं तो ऑटो टैक्सी वाले भी मजबूर लोगों की जेब पर जमकर डाका डाल रहे हैं।

मदद को आगे आए राज्य
--पंजाब ने हेमकुंड साहिब में फंसे तीर्थयात्रियों को निकालने के लिए भेजा हेलीकॉप्टर।
--महाराष्ट्र सरकार ने राहत कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये देने का किया ऐलान।
--यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने 25 करोड़ की मदद की घोषणा की।
--कई राज्यों ने अपने यहां के फंसे तीर्थयात्रियों की मदद के लिए टीमें भी तैनात कीं।

आपदा नियंत्रण कक्ष
उत्तराखंड में आई आपदा से संबंधित सूचना और राहत कार्यों के बारे में जानकारी लेने के लिए उत्तराखंड निवास में अस्थायी नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। राज्य सूचना अधिकारी नितिन उपाध्याय को इसका प्रभारी बनाया गया है।

नियंत्रण कक्ष का फोन नंबर 011-23010158, फैक्स 011-23016146 और मोबाइल नंबर-9990831003, 9718972333 हैं।

कहां कितने लोग फंसे
रुद्रप्रयाग में 24,729
चमोली में 26,662
उत्तरकाशी में 9,831
टिहरी में 900

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