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पत्नी का शव लेकर दस किमी तक पैदल चले

Sun, 23 Jun 2013 01:34 AM IST
प्रेम प्रताप सिंह
प्रेम प्रताप सिंह Updated Sun, 23 Jun 2013 01:34 AM IST
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uttarakhand disaster tragic story

उत्तराखंड प्रलय में जोधपुर के रहने वाले दिनेश राठी ने अपना बहुत कुछ खो दिया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के पहाड़ ने उनकी जिंदगी तबाह कर दी।

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सपने में भी उन्होंने नहीं सोचा था कि उनका जीवन ऐसे बिखर जाएगा। पत्नी और छोटा बेटा बिछड़ जाएंगे।

वह वो पल याद कर सिहर जाते हैं जब पत्नी का शव लेकर उनको दस किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। बाद में उसे नदी में प्रवाहित किया।

राठी ने कहा कि 16 जून की सुबह पूरे परिवार के साथ केदारनाथ का दर्शन करके वे रामबाड़ा लौट रहे थे। मां पालकी में थी और वे सभी पैदल।

कुछ देर पहले ही मां पालकी से उतरकर पैदल चल रही थी। लगभग सात बजे अचानक एक आवाज सुनाई दी। पीछे मुड़कर देखा तो ऐसा लगा कि नदी तेजी से उनके पास आ रही है। वे अपनी मां को लेकर पहाड़ पर ऊपर चढ़ने लगे।
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पत्नी और छोटा बेटा कुश दूसरी ओर भागे। ये दोनों पहाड़ पर नहीं चल पाए। पत्नी की तो मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छोटा बेटा लापता हो गया।

बड़ा बेटा कुशल (18) और बहन का बेटा सार्थक किसी तरह बच गए। उनके सिर में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि मां भी जख्मी हैं। कुशल के सिर और सार्थक के पैर की सर्जरी शनिवार को हुई। दिनेश राठी शुक्रवार की रात देहरादून पहुंचे हैं।
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सुबह उठते ही दो-तीन की हो जाती थी मौत
दिनेश राठी बताते हैं कि 16 जून को आपदा आने के बाद पर्यटक समूह में रात गुजराते थे। रात में सोते समय जितने लोग साथ सोते थे। सुबह होते-होते समूह में से दो से तीन लोगों की मौत हो जाती थी। जितने लोगों की आपदा से मौत हुई है। लगभग उससे कहीं अधिक लोगों की मौत दहशत, भूख, प्यास और ठंड से हो गई है।

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