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अफ्रीका गए युवा ने पानी की किल्लत देखी तो हवा से पानी बना दिया
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काशीपुर आईआईएम में हवा से पानी बनाने वाली मशीन को स्थापित करते कंपनी के लोग।
- फोटो : KASHIPUR
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दक्षिण अफ्रीका घूमने गए भारत के एक युवक ने जब वहां पानी की किल्लत देखी तो भारत को भविष्य में पानी के संकट से बचाने के लिए हवा से पानी तैयार करना शुरू कर दिया। प्रयोग सफल होने के बाद सोमवार को कंपनी ने मशीन को आईआईएम काशीपुर में भी स्थापित किया है। आईआईएम फीड काशीपुर ने भी इसे अपने दृष्टि स्टार्टअप के तहत लिया है।
मूल रूप से गुरुग्राम के रहने वाले संजय गर्ग ने आईआईटी दिल्ली से शिक्षा ग्रहण की है। करीब एक वर्ष पूर्व संजय अपने परिवार के साथ दक्षिण अफ्रीका घूमने गए थे। यहां के केपटाउन शहर में संजय ने पानी की भारी किल्लत देखी। भारत में भी बढ़ती पेयजल समस्या को देखते हुए संजय इससे निपटने का समाधान खोजने लगे। इसके बाद संजय ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। उन्होंने गुरुग्राम में ही एक कंपनी खोली और हवा से पानी बनाने का प्रयोग शुरू कर दिया इसके लिए और एयर टू वाटर जनरेटर मशीन का निर्माण किया।
बताया कि इसमें तैयार पानी आरओ के पानी से अधिक पौष्टिक है। आरओ के पानी से शरीर को कई जरूरी मिनरल नहीं मिल पाते हैं जबकि यह मशीन मिनरल युक्त पानी देती है। इसमें किसी तरह की पाइप लाइन नही लगती। यह बिजली और सौर ऊर्जा से चलती है। इसमें बिजली की खपत भी कम होती है। मशीन पानी के साथ-साथ हवा को भी शुद्ध करती है। 30 लीटर पानी बनाने वाली मशीन की कीमत 40 से 50 हजार रुपये है। कंपनी ने अभी 30 से 100 लीटर तक पानी बनाने वाली मशीन तैयार की है। आगे कंपनी 1500 से 10 हजार लीटर क्षमता की मशीनें भी लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।
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पहले मशीन में चीन के उपकरणों को भी जोड़ा गया था लेकिन अब भारत में निर्मित उपकरणों का इस्तेमाल इसे तैयार करने में किया जा रहा है। अभी कोलकाता और दुबई से मशीनों के आर्डर मिले हैं। कंपनी में कोलकाता और दिल्ली में अपने दफ्तर खोले हैं। आईआईएम, फीड के सीईओ शिवानंद दास ने बताया कि यह एक बेहतरीन प्रयोग है और भविष्य में काफी कारगर साबित होगा। आईआईएम काशीपुर ने इसे अपने इनक्यूबेटेड स्टार्टअप में शामिल किया है। वहां पर आईआईएम के सौरभ, सूर्या मेहरा आदि लोग मौजूद थे।
हवा से ऐसे तैयार होगा पानी
हवा से पानी तैयार कर रहे संजय गर्ग ने बताया कि हवा में नमी होती है पानी तैयार करने के लिए सबसे पहले नमी को ट्रैप किया जाता है फिर कंप्रेशर की मदद से इसे पानी में बदल देते हैं। बाद में फिल्टर कर पानी को पीने लायक बनाया जाता है। इसमें पानी बर्बाद भी नहीं होता। 45 डिग्री तापमान तक इस मशीन को रखा जा सकता है। कंपनी की ओर से इसका पेटेंट भी फाइल कराया जा रहा है।
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मूल रूप से गुरुग्राम के रहने वाले संजय गर्ग ने आईआईटी दिल्ली से शिक्षा ग्रहण की है। करीब एक वर्ष पूर्व संजय अपने परिवार के साथ दक्षिण अफ्रीका घूमने गए थे। यहां के केपटाउन शहर में संजय ने पानी की भारी किल्लत देखी। भारत में भी बढ़ती पेयजल समस्या को देखते हुए संजय इससे निपटने का समाधान खोजने लगे। इसके बाद संजय ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। उन्होंने गुरुग्राम में ही एक कंपनी खोली और हवा से पानी बनाने का प्रयोग शुरू कर दिया इसके लिए और एयर टू वाटर जनरेटर मशीन का निर्माण किया।
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बताया कि इसमें तैयार पानी आरओ के पानी से अधिक पौष्टिक है। आरओ के पानी से शरीर को कई जरूरी मिनरल नहीं मिल पाते हैं जबकि यह मशीन मिनरल युक्त पानी देती है। इसमें किसी तरह की पाइप लाइन नही लगती। यह बिजली और सौर ऊर्जा से चलती है। इसमें बिजली की खपत भी कम होती है। मशीन पानी के साथ-साथ हवा को भी शुद्ध करती है। 30 लीटर पानी बनाने वाली मशीन की कीमत 40 से 50 हजार रुपये है। कंपनी ने अभी 30 से 100 लीटर तक पानी बनाने वाली मशीन तैयार की है। आगे कंपनी 1500 से 10 हजार लीटर क्षमता की मशीनें भी लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।
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पहले मशीन में चीन के उपकरणों को भी जोड़ा गया था लेकिन अब भारत में निर्मित उपकरणों का इस्तेमाल इसे तैयार करने में किया जा रहा है। अभी कोलकाता और दुबई से मशीनों के आर्डर मिले हैं। कंपनी में कोलकाता और दिल्ली में अपने दफ्तर खोले हैं। आईआईएम, फीड के सीईओ शिवानंद दास ने बताया कि यह एक बेहतरीन प्रयोग है और भविष्य में काफी कारगर साबित होगा। आईआईएम काशीपुर ने इसे अपने इनक्यूबेटेड स्टार्टअप में शामिल किया है। वहां पर आईआईएम के सौरभ, सूर्या मेहरा आदि लोग मौजूद थे।
हवा से ऐसे तैयार होगा पानी
हवा से पानी तैयार कर रहे संजय गर्ग ने बताया कि हवा में नमी होती है पानी तैयार करने के लिए सबसे पहले नमी को ट्रैप किया जाता है फिर कंप्रेशर की मदद से इसे पानी में बदल देते हैं। बाद में फिल्टर कर पानी को पीने लायक बनाया जाता है। इसमें पानी बर्बाद भी नहीं होता। 45 डिग्री तापमान तक इस मशीन को रखा जा सकता है। कंपनी की ओर से इसका पेटेंट भी फाइल कराया जा रहा है।