{"_id":"5b6c8ac64f1c1b8d3e8b6062","slug":"workers-protested-with-women-and-children","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिलाओं और बच्चों संग बेमियादी धरने पर बैठे श्रमिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिलाओं और बच्चों संग बेमियादी धरने पर बैठे श्रमिक
अमर उजाला ब्यूरो सितारगंज।
Updated Fri, 10 Aug 2018 12:11 AM IST
विज्ञापन
सितारगंज तहसील में बेमियादी धरने पर प्रदर्शन करते श्रमिक, महिला व बच्चे।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिडकुल की फैक्ट्रियों में स्थायी अधिनियम 1946 और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के उल्लंघन के खिलाफ श्रमिकों ने हुंकार भर दी है। बृहस्पतिवार को गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट लिमिटेड के कर्मचारी अपने बच्चों व महिलाओं के साथ तहसील पहुंचे और अधिनियमों के उल्लंघन और श्रमिक शोषण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने श्रमिक नेता हरीश सिंह सतवाल के गैरकानूनी गेटबंदी का भी विरोध जताया।
बृहस्पतिवार सुबह दस बजे सैकड़ों श्रमिक अपने परिवारों के साथ तहसील आ पहुंचे और तेज धूप के बाद बेमियादी धरने पर बैठ गए। मजदूर प्रतिनिधि कैलाश पांडे ने कहा कि गुजरात अंबुजा कंपनी में श्रम कानूनों का उल्लंघन हो रहा है। कहा कि कंपनी प्रबंधन कारखाना एक्ट 1948, स्थायी आदेश अधिनियम 1946, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 और औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के खिलाफ कार्य कर रहा है। जनार्दन पोखरिया ने एक सप्ताह में 12 घंटे की जगह 40-40 घंटे ओवरटाइम कराने और तय मानकों से कम पैसे देने का आरोप लगाया। इसके अलावा उन्होंने आज तक स्थायी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र नहीं दिए गए।
रामजीत सिंह ने कहा कि शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाले कर्मी हरीश सिंह सतवाल की गेटबंदी कर दी गई। कहा कि गैरकानूनी रूप से की गई गेटबंदी बंद होने पर ही आंदोलन समाप्त होगा। आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधक, एसडीएम और सहायक श्रमायुक्त से गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
इस दौरान प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की नेत्री नीता ने मांगों को महिलाओं का समर्थन देने की घोषणा की। कहा कि उनकी मांगें पूरी न हुई तो सिडकुल सितारगंज व पंतनगर की यूनियनों व संगठनों द्वारा व्यापक मोर्चा बनाकर आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। वहां शेर सिंह, गायत्री गंगवार, माया देवी, रजनी पांडे, जितेंद्र कुमार, सत्य प्रकाश, जीवन, महेंद्र, ललिता, नथुनी, सुमन, सोमा, बच्ची सिंह बिष्ट, चंदन सिंह बिष्ट, सुरेंद्र देउपा आदि थे।
क्रांतिकारी गीत गाकर जताया आक्रोश
सितारगंज। फैक्ट्रियों में श्रमिकों के शोषण के खिलाफ कर्मचारी, महिला और बच्चों ने एक सुर में क्रांतिकारी गीत गाकर आक्रोश जताया। ‘जागो रे एक बार जागो जागो रे’ जैसे क्रांतिकारी गीतों ने कर्मचारियों की आवाज बुलंद की और तहसील परिसर में तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
सीनियर फिटर हरीश सिंह सतवाल को चालीस गांव महाराष्ट्र में दो से तीन सप्ताह के लिए प्रोजेक्ट का काम करने भेजा जा रहा था, लेकिन उसने वहां जाने के आदेश का पत्र लेने से मना कर दिया और वहां नहीं गया। अगर वह वहां काम के लिए जाता है तो कोई गेटबंदी नहीं है। कंपनी अनुशासन बनाए रखना चाहती है। कंपनी ने अभी तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। श्रमिकों की अन्य समस्याओं के मांग पत्र को लेकर सहायक श्रमायुक्त के साथ वार्ता जारी है। - केके राय-एचआर हेड, गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट लिमिटेड, सिडकुल सितारगंज
विज्ञापन
बृहस्पतिवार सुबह दस बजे सैकड़ों श्रमिक अपने परिवारों के साथ तहसील आ पहुंचे और तेज धूप के बाद बेमियादी धरने पर बैठ गए। मजदूर प्रतिनिधि कैलाश पांडे ने कहा कि गुजरात अंबुजा कंपनी में श्रम कानूनों का उल्लंघन हो रहा है। कहा कि कंपनी प्रबंधन कारखाना एक्ट 1948, स्थायी आदेश अधिनियम 1946, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 और औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के खिलाफ कार्य कर रहा है। जनार्दन पोखरिया ने एक सप्ताह में 12 घंटे की जगह 40-40 घंटे ओवरटाइम कराने और तय मानकों से कम पैसे देने का आरोप लगाया। इसके अलावा उन्होंने आज तक स्थायी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र नहीं दिए गए।
विज्ञापन
रामजीत सिंह ने कहा कि शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाले कर्मी हरीश सिंह सतवाल की गेटबंदी कर दी गई। कहा कि गैरकानूनी रूप से की गई गेटबंदी बंद होने पर ही आंदोलन समाप्त होगा। आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधक, एसडीएम और सहायक श्रमायुक्त से गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
इस दौरान प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की नेत्री नीता ने मांगों को महिलाओं का समर्थन देने की घोषणा की। कहा कि उनकी मांगें पूरी न हुई तो सिडकुल सितारगंज व पंतनगर की यूनियनों व संगठनों द्वारा व्यापक मोर्चा बनाकर आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। वहां शेर सिंह, गायत्री गंगवार, माया देवी, रजनी पांडे, जितेंद्र कुमार, सत्य प्रकाश, जीवन, महेंद्र, ललिता, नथुनी, सुमन, सोमा, बच्ची सिंह बिष्ट, चंदन सिंह बिष्ट, सुरेंद्र देउपा आदि थे।
क्रांतिकारी गीत गाकर जताया आक्रोश
सितारगंज। फैक्ट्रियों में श्रमिकों के शोषण के खिलाफ कर्मचारी, महिला और बच्चों ने एक सुर में क्रांतिकारी गीत गाकर आक्रोश जताया। ‘जागो रे एक बार जागो जागो रे’ जैसे क्रांतिकारी गीतों ने कर्मचारियों की आवाज बुलंद की और तहसील परिसर में तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
सीनियर फिटर हरीश सिंह सतवाल को चालीस गांव महाराष्ट्र में दो से तीन सप्ताह के लिए प्रोजेक्ट का काम करने भेजा जा रहा था, लेकिन उसने वहां जाने के आदेश का पत्र लेने से मना कर दिया और वहां नहीं गया। अगर वह वहां काम के लिए जाता है तो कोई गेटबंदी नहीं है। कंपनी अनुशासन बनाए रखना चाहती है। कंपनी ने अभी तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। श्रमिकों की अन्य समस्याओं के मांग पत्र को लेकर सहायक श्रमायुक्त के साथ वार्ता जारी है। - केके राय-एचआर हेड, गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट लिमिटेड, सिडकुल सितारगंज