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Udham Singh Nagar News: मानसून शुरू होने के साथ एलर्जी के मरीजों में हुई बढ़ोतरी
Tue, 24 Jun 2025 01:11 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 24 Jun 2025 01:11 AM IST
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काशीपुर। मानसून शुरू होने के साथ ही एलर्जी के रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। इसकी मुख्य वजह मौसम में बढ़ी नमी और गर्मी के कारण फंगस और बैक्टीरिया पनपते हैं और एलर्जी को पैदा करते हैं।
एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय के डॉ. अमरजीत सिंह साहनी ने बताया कि मानसून के दौरान एलर्जी के रोगी अधिक बढ़ जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस, एटोपिक डर्मेटाइटिस, फूड एलर्जी, ड्रग एलर्जी, गले में खराश व वायरल बुखार के मरीज शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में नमी अधिक होना बैक्टीरिया व फंगस के लिए अनुकूल होता है। हवा में इनकी मात्रा बढ़ने से सांस, स्किन और आंखों से जुड़ी एलर्जी के रोगी बढ़ जाते हैं। बताया वर्तमान में बड़ी संख्या में एलर्जी के मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। डॉ. साहनी ने बताया अस्थमा से पीड़ित लोगों को इस मौसम में सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बताया बंद जगहों पर मौजूद बैक्टीरिया, फंगस और कीड़े-मकोड़े एलर्जी के खतरे को बढ़ा देते हैं। कहा कि इस मौसम में गीले कपड़े, जूते-मोजे न पहनें और सीलन वाली जगह का अधिक प्रयोग करने से बचें।
इस तरह होती है एलर्जी
- गीले कपड़े, नमी वाली दीवारें व पुराने फर्नीचर पर फफूंदी आने से सांस की एलर्जी बढ़ जाती है।
- धूल व सीलन वाली जगहों पर बैक्टीरिया अस्थमा, साइनस व स्किन से जुड़ी एलर्जी को बढ़ा देते हैं।
- भीगे जूते-मोजे पहनने से फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
- मच्छरों के काटने से स्किन एलर्जी, सूजन और खुजली जैसी समस्या होती है।
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एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय के डॉ. अमरजीत सिंह साहनी ने बताया कि मानसून के दौरान एलर्जी के रोगी अधिक बढ़ जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस, एटोपिक डर्मेटाइटिस, फूड एलर्जी, ड्रग एलर्जी, गले में खराश व वायरल बुखार के मरीज शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में नमी अधिक होना बैक्टीरिया व फंगस के लिए अनुकूल होता है। हवा में इनकी मात्रा बढ़ने से सांस, स्किन और आंखों से जुड़ी एलर्जी के रोगी बढ़ जाते हैं। बताया वर्तमान में बड़ी संख्या में एलर्जी के मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। डॉ. साहनी ने बताया अस्थमा से पीड़ित लोगों को इस मौसम में सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बताया बंद जगहों पर मौजूद बैक्टीरिया, फंगस और कीड़े-मकोड़े एलर्जी के खतरे को बढ़ा देते हैं। कहा कि इस मौसम में गीले कपड़े, जूते-मोजे न पहनें और सीलन वाली जगह का अधिक प्रयोग करने से बचें।
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इस तरह होती है एलर्जी
- गीले कपड़े, नमी वाली दीवारें व पुराने फर्नीचर पर फफूंदी आने से सांस की एलर्जी बढ़ जाती है।
- धूल व सीलन वाली जगहों पर बैक्टीरिया अस्थमा, साइनस व स्किन से जुड़ी एलर्जी को बढ़ा देते हैं।
- भीगे जूते-मोजे पहनने से फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
- मच्छरों के काटने से स्किन एलर्जी, सूजन और खुजली जैसी समस्या होती है।