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वोटर तो हैं, हम क्या जानें आम नागरिक के अधिकार

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 17 Jan 2022 12:39 AM IST
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Voters of Forest Villages
सितारगंज के बाराकोली वन रेंज के बैगुल खत्ते में दशकों से डेरा बनाकर रह रहे गुर्जर परिवार। - फोटो : SITARGANJ
मो. यामीन अंसारी
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सितारगंज। जंगल में डेरे बनाकर रहने वाले गुर्जर परिवारों का रहन-सहन आज भी बदहाल है। आम नागरिक के अधिकारों के इतर आज भी वह उपेक्षित जीवन जीने को विवश हैं। गुर्जर परिवार आम नागरिक की तरह तो हैं पर जीने के अधिकार क्या होते हैं यह उन्हें नहीं पता है। मालूम है तो बस इतना ही हर चुनाव में वोट डालना है।
पहले इन्हें ग्रामसभा में वोट डालने का अधिकार था लेकिन अब ग्रामसभा की मतदाता सूची से खत्ते का नाम काट दिया गया है। इससे यह परिवार ग्रामसभा की मतदाता सूची से भी बाहर हो गया है। विधानसभा में जरूर वोट डालने का अधिकार मिला हुआ है। इनके खत्ते में न तो बिजली की सुविधा है, न पानी और न ही सड़क बनी है।
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वन खत्तों में रहने वाले गुर्जर बीते दो दशक से अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। हर बार उनके मन में यही जिज्ञासा होती है कि शायद इस बार शासनतंत्र उन पर मेहरबानी कर दे लेकिन कहीं इस बार भी गुर्जर परिवार वोट बैंक बनकर न रह जाएं। यह चिंता इन परिवारों को अभी से सालने लगी है। सितारगंज के बाराकोली वन रेंज के बैगुल खत्ते में 18 डेरे हैं। तकरीबन 80 मतदाता है। ये मतदाता सितारगंज ग्रामसभा फिरोजपुर वनकुईया के जनप्रतिनिधियो को अपना वोट डालते थे। लेकिन, ग्राम पंचायत की मतदाता सूची से नाम कटने से यह लोग अब किसी भी ग्राम पंचायत से नहीं जुड़े हैं। विधानसभा चुनाव में जरूर वोटर हैं।
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अधिकारों को लेकर जब बात की तो दिल में छिपा दर्द बयां कर उठे। उनका कहना था कि पशुपालन ही एकमात्र रोजगार का जरिया है। शासन की ओर से राजस्व गांवों के लोगो को योजनाओं का लाभ दिया जाता है लेकिन उनके लिए कभी किसी ने नहीं सोचा। न ही उनके बच्चों को ही बेहतर सुविधा दी जाती है। सरकार ने स्कूल खोले भी हैं तो सिर्फ प्राथमिक स्तर तक के हैं। यहां बच्चे सिर्फ पांचवीं तक की शिक्षा ग्रहण करते हैं। लेकिन उच्च शिक्षा के लिए उनके बच्चों को कोई लाभ नहीं मिलता। बकौल, गुर्जर समुदाय ‘ काश हमारे खत्तों को भी राजस्व ग्राम में शामिल किया होता तो आज हम योजनाओं का लाभ ले पाते।’ उन्होंने सरकार से आम नागरिक की तरह उन्हें भी योजनाओं का लाभ दिए जाने की मांग की है। साथ ही उच्च प्राथमिक शिक्षा के लिए अलग से स्कूल खोलने की मांग की।
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