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न खा पा रहे हैं और न ही चैन से सो पा रहे
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नानकमत्ता में छात्रा मनदीप कौर के पिता सूबेदार (रिटायर) दिलबाग सिंह तथा माता परदीप कौर।
- फोटो : SITARGANJ
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नानकमत्ता। एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन गई नानकमत्ता की मनदीप कौर ने बताया कि दहशत के बीच न तो ढंग से खा पा रहे हैं और न ही चैन से सो पा रहे हैं। बेसमेंट में रहकर वाहेगुरु से लड़ाई शांत होने की अरदास कर रहे हैं।
नगर के वार्ड नंबर सात निवासी सेवानिवृत्त सूबेदार दिलबाग सिंह की पुत्री मनदीप कौर (20) ढाई वर्ष पूर्व एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन के ओडेशा प्रांत में स्थित पाइरागोव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी वनित्सिया गई थी। सेना से रिटायर होने के बाद दिलबाग सिंह खेतीबाड़ी कर रहे हैं। दो संतानों में (23) वर्षीय पुत्र गुरजीत सिंह लॉकडाउन के चलते पिछले बर्ष कनाडा से वापस आया था। अब पिता के साथ खेतीबाड़ी में लगा है।
यूक्रेन में रूस के हमले की जानकारी मिलते ही मां परदीप कौर और पिता दिलबाग सिंह चिंतित हो उठे हैं। दोनों दिन में कई बार अपनी बेटी से मोबाइल पर बात करते हैं। बेटी मनदीप कौर ने बताया कि उनको पहले ही खाने पीने की चीजें एकत्रित करने की चेतावनी दी गई थी। वह अपनी पंजाब की तीन सहेलियों के साथ छात्रावास के नीचे बने बेसमेंट में सुरक्षित हैं। रात दिन हमले की सूचना का सायरन बजने से न तो वह ठीक से खा भी नहीं पा रहे हैं और न ही चैन से सो पा रहे हैं। एमबीबीएस की पढ़ाई अधूरी छूटने के साथ ही अपने जीवन की भी चिंता उन्हें सता रही है। भारतीय दूतावास ने उन्हें सुरक्षित भारत पहुंचाने का आश्वासन दिया है।
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नगर के वार्ड नंबर सात निवासी सेवानिवृत्त सूबेदार दिलबाग सिंह की पुत्री मनदीप कौर (20) ढाई वर्ष पूर्व एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन के ओडेशा प्रांत में स्थित पाइरागोव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी वनित्सिया गई थी। सेना से रिटायर होने के बाद दिलबाग सिंह खेतीबाड़ी कर रहे हैं। दो संतानों में (23) वर्षीय पुत्र गुरजीत सिंह लॉकडाउन के चलते पिछले बर्ष कनाडा से वापस आया था। अब पिता के साथ खेतीबाड़ी में लगा है।
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यूक्रेन में रूस के हमले की जानकारी मिलते ही मां परदीप कौर और पिता दिलबाग सिंह चिंतित हो उठे हैं। दोनों दिन में कई बार अपनी बेटी से मोबाइल पर बात करते हैं। बेटी मनदीप कौर ने बताया कि उनको पहले ही खाने पीने की चीजें एकत्रित करने की चेतावनी दी गई थी। वह अपनी पंजाब की तीन सहेलियों के साथ छात्रावास के नीचे बने बेसमेंट में सुरक्षित हैं। रात दिन हमले की सूचना का सायरन बजने से न तो वह ठीक से खा भी नहीं पा रहे हैं और न ही चैन से सो पा रहे हैं। एमबीबीएस की पढ़ाई अधूरी छूटने के साथ ही अपने जीवन की भी चिंता उन्हें सता रही है। भारतीय दूतावास ने उन्हें सुरक्षित भारत पहुंचाने का आश्वासन दिया है।

छात्रा मनदीप कौर।- फोटो : SITARGANJ
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