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धरने के बाद अब आमरण अनशन पर छात्र
अमर उजाला ब्यूरो, सितारगंज।
Updated Sat, 12 Aug 2017 11:54 PM IST
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अनशन
- फोटो : अमर उजाला
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बीए में आवेदन करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को प्रवेश देने, बीकॉम, बीएससी की कक्षाएं संचालित कराने की मांग को लेकर डिग्री कॉलेज में धरना दे रहे छात्र-छात्राओं ने अब आमरण अनशन शुरू कर दिया है। दिनभर प्राचार्य के समझाने के बावजूद छात्र अपनी मांगों पर अडिग रहे। इधर, कॉलेज में प्रवेश काउंसलिंग की प्रक्रिया छात्रों के आंदोलन के कारण तीसरे दिन भी ठप रही।
राजकीय महाविद्यालय सिसौना में 10 अगस्त से बीए कक्षाओं में आवेदन करने वाले सभी विद्यार्थियों को प्रवेश देने, बीएससी, बीकॉम की कक्षाएं संचालित कराने की मांग को लेकर छात्र महासंघ के नेतृत्व में छात्र-छात्राएं आंदोलनरत हैं।
शनिवार को छात्र-छात्राओं का धरना आमरण अनशन में बदल गया और छात्र महासंघ के सचिव दीपांशु रावत, छात्र संघ अध्यक्ष विश्वजीत विश्वास, उपाध्यक्ष अजय कठायत, छात्र नेता परवेज पटौदी, भाष्कर सिंह राणा, अमित विश्वास, जयदेव पाल, राहुल राय, देवाशीष, दीपक कुमार, सरोज मंडल आदि आमरण अनशन पर बैठ गए।
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छात्र महासंघ सचिव रावत ने कहा कि उच्च शिक्षा निदेशालय ने मानक के अनुसार सीमित 120 सीटों पर ही प्रवेश देने का तुगलकी फरमान जारी किया है जबकि, प्रवेश के लिए ऑनलाइन करीब 562 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया। कहा कि 120 विद्यार्थियों के प्रवेश मिलने के बाद शेष पढ़ाई से वंचित हो जाएंगे।
छात्र-छात्राओं ने कहा कि पिछले एक माह से वह मांगों को लेकर कॉलेज प्रशासन समेत तमाम विभागीय उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भेज चुके हैं लेकिन, उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया। मांग पूरी होने तक अनशन जारी रहेगा। वहां महासंघ की छात्रा उपाध्यक्ष दीपिका देवनाथ, ज्योति दास, राजू नगदली, सोनम राय आदि थे। सीएचसी के डॉक्टरों ने अनशन पर बैठे छात्रों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
आश्वासन नहीं, प्रवेश दो!
प्राचार्य डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा, प्राध्यापिका डॉ. रजविंदर कौर ने शनिवार की सुबह 10 बजे से आमरण अनशन पर बैठे छात्रों को धरनास्थल पहुंचकर समझाने का प्रयास किया। प्राचार्य डॉ. वर्मा नेे कहा कि छात्रों की मांगों को विश्वविद्यालय के कुलपति, उच्च शिक्षा निदेशक, डीएम को अवगत करा दिया गया है। बताया कि शीघ्र ही कोई न कोई हल भी निकल आएगा।
उन्होंने निदेशालय में स्वयं जाकर उनकी मांगों से निदेशक को अवगत कराने का भी आश्वासन दिया, लेकिन, छात्र नहीं माने। छात्रों ने कहा सर, आश्वासन नहीं चाहिए। सभी बच्चों को प्रवेश मिले। इधर, देर शाम तहसीलदार शेर सिंह ग्वाल पुलिस टीम के साथ धरनास्थल पहुंचे और अनशन खत्म करने का आग्रह किया। लेकिन छात्र मांगों पर अड़े रहे।
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राजकीय महाविद्यालय सिसौना में 10 अगस्त से बीए कक्षाओं में आवेदन करने वाले सभी विद्यार्थियों को प्रवेश देने, बीएससी, बीकॉम की कक्षाएं संचालित कराने की मांग को लेकर छात्र महासंघ के नेतृत्व में छात्र-छात्राएं आंदोलनरत हैं।
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शनिवार को छात्र-छात्राओं का धरना आमरण अनशन में बदल गया और छात्र महासंघ के सचिव दीपांशु रावत, छात्र संघ अध्यक्ष विश्वजीत विश्वास, उपाध्यक्ष अजय कठायत, छात्र नेता परवेज पटौदी, भाष्कर सिंह राणा, अमित विश्वास, जयदेव पाल, राहुल राय, देवाशीष, दीपक कुमार, सरोज मंडल आदि आमरण अनशन पर बैठ गए।
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छात्र महासंघ सचिव रावत ने कहा कि उच्च शिक्षा निदेशालय ने मानक के अनुसार सीमित 120 सीटों पर ही प्रवेश देने का तुगलकी फरमान जारी किया है जबकि, प्रवेश के लिए ऑनलाइन करीब 562 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया। कहा कि 120 विद्यार्थियों के प्रवेश मिलने के बाद शेष पढ़ाई से वंचित हो जाएंगे।
छात्र-छात्राओं ने कहा कि पिछले एक माह से वह मांगों को लेकर कॉलेज प्रशासन समेत तमाम विभागीय उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भेज चुके हैं लेकिन, उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया। मांग पूरी होने तक अनशन जारी रहेगा। वहां महासंघ की छात्रा उपाध्यक्ष दीपिका देवनाथ, ज्योति दास, राजू नगदली, सोनम राय आदि थे। सीएचसी के डॉक्टरों ने अनशन पर बैठे छात्रों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
आश्वासन नहीं, प्रवेश दो!
प्राचार्य डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा, प्राध्यापिका डॉ. रजविंदर कौर ने शनिवार की सुबह 10 बजे से आमरण अनशन पर बैठे छात्रों को धरनास्थल पहुंचकर समझाने का प्रयास किया। प्राचार्य डॉ. वर्मा नेे कहा कि छात्रों की मांगों को विश्वविद्यालय के कुलपति, उच्च शिक्षा निदेशक, डीएम को अवगत करा दिया गया है। बताया कि शीघ्र ही कोई न कोई हल भी निकल आएगा।
उन्होंने निदेशालय में स्वयं जाकर उनकी मांगों से निदेशक को अवगत कराने का भी आश्वासन दिया, लेकिन, छात्र नहीं माने। छात्रों ने कहा सर, आश्वासन नहीं चाहिए। सभी बच्चों को प्रवेश मिले। इधर, देर शाम तहसीलदार शेर सिंह ग्वाल पुलिस टीम के साथ धरनास्थल पहुंचे और अनशन खत्म करने का आग्रह किया। लेकिन छात्र मांगों पर अड़े रहे।