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तीन कैदियों को 150वीं गांधी जयंती पर मिल सकती है आजादी
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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सितारगंज। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर भारत सरकार की ओर से देश की विभिन्न जेलों में सामान्य अपराध में सजा काट रहे कैदियों को रिहा किया जा रहा है। इसके तहत सेंट्रल जेल के तीन कैदियों की फाइल भी शासन को भेजी गई है। संभावना है कि उक्त कैदियों को दो अक्तूबर को रिहा किया जा सकता है।
तीन अगस्त 2018 को आईजी कारागार डॉ. पीवीके प्रसाद ने संयुक्त सचिव वूमन सेफ्टी, गृह मंत्रालय की ओर से जारी गाइड लाइन के साथ संपूर्णानंद सेंट्रल जेल को आदेश जारी किया था। इसके तहत जेल में सामान्य अपराधों में सजा काट रहे कैदियों का डेटा मांगा गया था। संपूर्णानंद सेंट्रल जेल में तीन साल से लेकर 10 साल तक की सजा काट रहे तीन कैदियों को चिह्नित कर उनके रिहाई की फाइल आईजी कारागार को भेजी गई थी।
जेल अधीक्षक दधिराम मौर्य ने बताया कि सेंट्रल जेल में यूपी का भी एक कैदी है, जो गैर इरादतन हत्या के दोष में 10 साल की सजा काट रहा है। अल्मोड़ा कोर्ट से इस कैदी को सजा हुई थी। इसके अलावा यूएस नगर का एक कैदी चोरी और अन्य सामान्य अपराधों में चार साल की सजा भोग रहा है। एक कैदी गैंगस्टर के दोष में तीन साल की सजा काट रहा है। तीनों ही गृह मंत्रालय की गाइड लाइन के तहत इस योजना में चयनित किए गए हैं। इन कैदियों की फाइल आईजी को भेजी गई थी। राज्य सरकार और आईजी कारागार से आदेश मिलने पर तीनों को रिहा किया जाएगा।
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रिहाई की गाइड लाइन से ये कैदी बाहर
- फांसी से दंडित या फिर फांसी से आजीवन कारावास में परिवर्तित न हो।
- आजीवन सजायाफ्ता कैदी।
- टाडा, पोटा, यूएपीए, एनएसए के दोषी।
- ऑफीशियल सीक्रेट एक्ट, एंटी हाईजैकिंग एक्ट के दोषी।
- दहेज हत्या, दुष्कर्म, पॉक्सो और एनडीपीएस एक्ट के दोषी कैदी।
- जाली करेंसी, भ्रष्टाचार, मानव तस्करी, मनी लॉन्डरिंग के दोषी।
- फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट, ब्लैक मनी और हथियार तस्करी के दोषी।
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तीन अगस्त 2018 को आईजी कारागार डॉ. पीवीके प्रसाद ने संयुक्त सचिव वूमन सेफ्टी, गृह मंत्रालय की ओर से जारी गाइड लाइन के साथ संपूर्णानंद सेंट्रल जेल को आदेश जारी किया था। इसके तहत जेल में सामान्य अपराधों में सजा काट रहे कैदियों का डेटा मांगा गया था। संपूर्णानंद सेंट्रल जेल में तीन साल से लेकर 10 साल तक की सजा काट रहे तीन कैदियों को चिह्नित कर उनके रिहाई की फाइल आईजी कारागार को भेजी गई थी।
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जेल अधीक्षक दधिराम मौर्य ने बताया कि सेंट्रल जेल में यूपी का भी एक कैदी है, जो गैर इरादतन हत्या के दोष में 10 साल की सजा काट रहा है। अल्मोड़ा कोर्ट से इस कैदी को सजा हुई थी। इसके अलावा यूएस नगर का एक कैदी चोरी और अन्य सामान्य अपराधों में चार साल की सजा भोग रहा है। एक कैदी गैंगस्टर के दोष में तीन साल की सजा काट रहा है। तीनों ही गृह मंत्रालय की गाइड लाइन के तहत इस योजना में चयनित किए गए हैं। इन कैदियों की फाइल आईजी को भेजी गई थी। राज्य सरकार और आईजी कारागार से आदेश मिलने पर तीनों को रिहा किया जाएगा।
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रिहाई की गाइड लाइन से ये कैदी बाहर
- फांसी से दंडित या फिर फांसी से आजीवन कारावास में परिवर्तित न हो।
- आजीवन सजायाफ्ता कैदी।
- टाडा, पोटा, यूएपीए, एनएसए के दोषी।
- ऑफीशियल सीक्रेट एक्ट, एंटी हाईजैकिंग एक्ट के दोषी।
- दहेज हत्या, दुष्कर्म, पॉक्सो और एनडीपीएस एक्ट के दोषी कैदी।
- जाली करेंसी, भ्रष्टाचार, मानव तस्करी, मनी लॉन्डरिंग के दोषी।
- फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट, ब्लैक मनी और हथियार तस्करी के दोषी।