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हादसे में बाइक सवार जीजा-साले समेत तीन की मौत
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नानकमत्ता के पचपेड़ा गांव में बबलू व मोहन स्वरूप की मौत पर बिलखते परिजन।
- फोटो : SITARGANJ
सितारगंज। लकड़ी से भरे बेकाबू ट्रक ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार जीजा-साले समेत तीन मजदूरों की मौत हो गई। पुलिस ने क्षतिग्रस्त बाइक और ट्रक को कब्जे में ले लिया। युवकों की मौत से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
ग्राम नई बस्ती पचपेड़ा नानकमत्ता निवासी कुंवर पाल (34) पुत्र मोहन लाल, बबलू (27) पुत्र बाबूराम और बबलू का साला मोहन स्वरूप (29) पुत्र हरीशंकर शनिवार सुबह बाइक (यूके 06 एए 0807) से पिपलिया फार्म पुलभट्टा में भूसी भरने का काम करने के लिए निकले थे। विरेंद्रनगर मोड़ पर गलत दिशा से आ रहे लकड़ी से भरे ट्रक (यूपी 23 टी 9513) ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे के बाद चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया। हादसे में कुंवर पाल का हेलमेट टूट गया और और कुंवर पाल के साथ ही बबलू की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, मोहन स्वरूप गंभीर रूप से घायल हो गया। आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से खटीमा नागरिक अस्पताल रेफर किया गया। जहां उसने भी दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंचे एसआई सुरेंद्र सिंह कोरंगा और हरविंदर कुमार ने क्षतिग्रस्त बाइक एवं ट्रक के कब्जे में ले लिया। साथ ही अस्पताल पहुंचकर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हादसे में एक ही गांव के तीन लोगों की मौत से पूरा गांव गमजदा है।
एक ही गांव से तीन अर्थियों के उठने से हर आंख हुई नम
सितारगंज/नानकमत्ता। नानकमत्ता के ग्राम नई बस्ती पचपेड़ा में तीन अर्थियां एक साथ उठने से गांव में शोक का माहौल है। तीन मृतकों में से जब जीजा-साले की अर्थी एक ही घर से उठी तो परिजनों की चीत्कार से हर किसी की आंख भर आई।
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बबलू, उसका साले मोहन स्वरूप और अन्य साथी कुंवरपाल गहरे मित्र थे। तीनों एक साथ ही मजदूरी करने जाते थे और दुनिया को भी तीनों एक साथ अलविदा कह गए। गांव में तीनों की मौत की खबर से शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के करुण क्रंदन से हर किसी भी आंखें आंसुओं से छलछला उठीं। मृतक कुंवर पाल की पत्नी आशा देवी और बूढ़ी मां केतकी देवी का रो-रो कर बुरा हाल है। वह अपने पीछे दो मासूम पुत्र और दो पुत्रियों को बिलखते छोड़ गया। इसी तरह मृतक बबलू की पत्नी मीना देवी तथा बड़े पुत्र विक्की (10), विकास (9) और बेटी पवित्रा (6) गुमसुम अपनी मां और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
इसी तरह मृतक मोहन स्वरूप भी मजदूरी कर परिवार का लालन पोषण करता था। मौत की सूचना से उसकी पत्नी पूजा बेसुध हो गई है। मोहन की ढाई साल की बेटी और आठ महीने का बेटा है। परिवारों के एकमात्र सहारा तीनों मजदूरों की असमय मौत परिजनों पर भी दुखों का पहाड़ टूट गया है। संवाद
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ग्राम नई बस्ती पचपेड़ा नानकमत्ता निवासी कुंवर पाल (34) पुत्र मोहन लाल, बबलू (27) पुत्र बाबूराम और बबलू का साला मोहन स्वरूप (29) पुत्र हरीशंकर शनिवार सुबह बाइक (यूके 06 एए 0807) से पिपलिया फार्म पुलभट्टा में भूसी भरने का काम करने के लिए निकले थे। विरेंद्रनगर मोड़ पर गलत दिशा से आ रहे लकड़ी से भरे ट्रक (यूपी 23 टी 9513) ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे के बाद चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया। हादसे में कुंवर पाल का हेलमेट टूट गया और और कुंवर पाल के साथ ही बबलू की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, मोहन स्वरूप गंभीर रूप से घायल हो गया। आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से खटीमा नागरिक अस्पताल रेफर किया गया। जहां उसने भी दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंचे एसआई सुरेंद्र सिंह कोरंगा और हरविंदर कुमार ने क्षतिग्रस्त बाइक एवं ट्रक के कब्जे में ले लिया। साथ ही अस्पताल पहुंचकर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हादसे में एक ही गांव के तीन लोगों की मौत से पूरा गांव गमजदा है।
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एक ही गांव से तीन अर्थियों के उठने से हर आंख हुई नम
सितारगंज/नानकमत्ता। नानकमत्ता के ग्राम नई बस्ती पचपेड़ा में तीन अर्थियां एक साथ उठने से गांव में शोक का माहौल है। तीन मृतकों में से जब जीजा-साले की अर्थी एक ही घर से उठी तो परिजनों की चीत्कार से हर किसी की आंख भर आई।
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बबलू, उसका साले मोहन स्वरूप और अन्य साथी कुंवरपाल गहरे मित्र थे। तीनों एक साथ ही मजदूरी करने जाते थे और दुनिया को भी तीनों एक साथ अलविदा कह गए। गांव में तीनों की मौत की खबर से शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के करुण क्रंदन से हर किसी भी आंखें आंसुओं से छलछला उठीं। मृतक कुंवर पाल की पत्नी आशा देवी और बूढ़ी मां केतकी देवी का रो-रो कर बुरा हाल है। वह अपने पीछे दो मासूम पुत्र और दो पुत्रियों को बिलखते छोड़ गया। इसी तरह मृतक बबलू की पत्नी मीना देवी तथा बड़े पुत्र विक्की (10), विकास (9) और बेटी पवित्रा (6) गुमसुम अपनी मां और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
इसी तरह मृतक मोहन स्वरूप भी मजदूरी कर परिवार का लालन पोषण करता था। मौत की सूचना से उसकी पत्नी पूजा बेसुध हो गई है। मोहन की ढाई साल की बेटी और आठ महीने का बेटा है। परिवारों के एकमात्र सहारा तीनों मजदूरों की असमय मौत परिजनों पर भी दुखों का पहाड़ टूट गया है। संवाद