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रूस-यूक्रेन युद्ध् लंबा खिंचने पर खाद व तेल की होगी कमी
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डॉ. एएस नैन। संवाद
- फोटो : RUDRAPUR
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पंतनगर। भारत का रूस और यूक्रेन के साथ कई उत्पादों का आयात-निर्यात होता है। कृषि क्षेत्र में एडिबल ऑयल और खाद का आयात होता है, जबकि दवाइयों और अन्य सामान का निर्यात होता है। युद्ध नहीं थमा तो आयात प्रभावित होगा, जिससे देश में इनका अभाव बढ़ेगा और मूल्य में बेतहाशा वृद्धि होगी।
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ. एएस नैन ने बताया कि देश में लगभग 2.5 मिलियन टन एडिबल ऑयल (सूरजमुखी का तेल) का आयात होता है। इसका 70 प्रतिशत यूक्रेन और 20 प्रतिशत रूस से आता है। इसी प्रकार यूक्रेन से खाद का लगभग 235 मिलियन डॉलर का आयात होता है। इनमें मुख्यत: पोटैशिक, एनपीके का मिश्रण व जैविक खादें शामिल हैं। यूक्रेन पर रूस के हमले में इकाइयां, उत्पादन व आपूर्ति ठप हो चुकी है। इसलिए वहां से आयात प्रभावित होगा और देश में इनकी उपलब्धता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। ऐसे में किसानों की खाद की मांग पूरी करना मुश्किल हो जाएगा जिससे इसके मूल्यों में बेतहाशा वृद्धि सहित कृषि उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों देशों के बीच युद्ध किस स्तर तक जाएगा और कब तक चलेगा। इसी प्रकार हमारे देश से रूस व यूक्रेन में चाय, दवाइयों व मेडिकल उपकरण का बड़ी मात्रा में निर्यात होता है। चूंकि दोनों देश युद्ध में हैं और उन्हें आने वाले समय में दवाइयों व मेडिकल उपकरण की बड़ी मात्रा में आवश्यकता होगी, जिससे निर्यात बढ़ने की पूरी संभावना है।
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500 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़े इस्पात के दाम
पंतनगर। रूस और यूक्रेन दोनों ही कोकिंग कोल और प्राकृतिक गैस सहित कच्चे माल की आपूर्ति करने के अलावा इसके निर्माता और निर्यातक हैं। रूस-यूक्रेन के बीच सैन्य संघर्ष गहराने के साथ ही आयात बाधित होने से घरेलू इस्पात (एचआरसी और टीएमटी) सरिया के दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो अभी दामों में और वृद्धि की संभावना है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कोकिंग कोल आयात के जरिए पूरा करता है।
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जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ. एएस नैन ने बताया कि देश में लगभग 2.5 मिलियन टन एडिबल ऑयल (सूरजमुखी का तेल) का आयात होता है। इसका 70 प्रतिशत यूक्रेन और 20 प्रतिशत रूस से आता है। इसी प्रकार यूक्रेन से खाद का लगभग 235 मिलियन डॉलर का आयात होता है। इनमें मुख्यत: पोटैशिक, एनपीके का मिश्रण व जैविक खादें शामिल हैं। यूक्रेन पर रूस के हमले में इकाइयां, उत्पादन व आपूर्ति ठप हो चुकी है। इसलिए वहां से आयात प्रभावित होगा और देश में इनकी उपलब्धता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। ऐसे में किसानों की खाद की मांग पूरी करना मुश्किल हो जाएगा जिससे इसके मूल्यों में बेतहाशा वृद्धि सहित कृषि उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
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यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों देशों के बीच युद्ध किस स्तर तक जाएगा और कब तक चलेगा। इसी प्रकार हमारे देश से रूस व यूक्रेन में चाय, दवाइयों व मेडिकल उपकरण का बड़ी मात्रा में निर्यात होता है। चूंकि दोनों देश युद्ध में हैं और उन्हें आने वाले समय में दवाइयों व मेडिकल उपकरण की बड़ी मात्रा में आवश्यकता होगी, जिससे निर्यात बढ़ने की पूरी संभावना है।
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500 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़े इस्पात के दाम
पंतनगर। रूस और यूक्रेन दोनों ही कोकिंग कोल और प्राकृतिक गैस सहित कच्चे माल की आपूर्ति करने के अलावा इसके निर्माता और निर्यातक हैं। रूस-यूक्रेन के बीच सैन्य संघर्ष गहराने के साथ ही आयात बाधित होने से घरेलू इस्पात (एचआरसी और टीएमटी) सरिया के दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो अभी दामों में और वृद्धि की संभावना है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कोकिंग कोल आयात के जरिए पूरा करता है।