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अस्पताल में दो घंटे तड़पता रहा युवक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 10 Dec 2018 12:05 AM IST
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अज्ञात वाहन की टक्कर से घायल युवक को सीएचसी लाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। लेकिन अस्पताल में खड़ी दो एंबुलेंसों में से एक खराब होने और दूसरी में तेल नहीं होने के कारण युवक इलाज के अभाव में तड़पता रहा। करीब दो घंटे बाद खटीमा से पहुंची एंबुलेंस से हल्द्वानी ले जाते समय उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। खबर लिखे जाने तक पुलिस को मामले की तहरीर नहीं दी गई थी।
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शनिवार देर रात वार्ड 11 बाईपास कालोनी निवासी पीमा व्यापारी (22) पुत्र मोहन व्यापारी सिडकुल मार्ग किनारे खड़े होकर मोबाइल पर बात कर रहा था। इस दौरान पीछे से आ रहे अज्ञात डंपर की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। वहां से गुजर रहे एक पिकप चालक ने उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
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प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया, लेकिन सीएचसी में खड़ी दो 108 एंबुलेंसों में से एक में तेल नहीं था और दूसरी खराब थी। नगरपालिका चेयरमैन हरीश दूबे ने चिकित्साधिकारियों से बात की तो उन्होंने खटीमा से 108 एंबुलेंस भेजी। इस दौरान घायल युवक करीब दो घंटे इलाज के अभाव में तड़पता रहा।
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खटीमा से पहुंची एंबुलेंस उसे हल्द्वानी ले गई, जहां रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। हल्द्वानी पुलिस ने एसटीएच में पंचनामा भरकर उसका पोस्टमार्टम कराया।पालिकाध्यक्ष हरीश दूबे ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय से युवक का उपचार हो जाता तो उसकी जान बच सकती थी। पीमा मजदूरी करता था। वह अपने पीछे पत्नी और एक वर्ष की पुत्री छोड़ गया है। खबर लिखे जाने तक परिजनों की ओर से पुलिस को तहरीर नहीं मिली थी।
कोट ×==
दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल युवक को रात 8:20 बजे अस्पताल लाया गया, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया था। अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस से लेकर जाना था लेकिन उसमें तेल नहीं था और स्टॉफ भी मौजूद नहीं था। उन्होंने खटीमा सीएचसी से 108 एंबुलेंस मंगाने की बात की। साथ ही घायल के परिजनों को देर करने पर युवक की हालत बिगड़ने की बात बताते हुए प्राइवेट एंबुलेंस से ले जाने को कहा था लेकिन उनका कहना था कि वह 108 एंबुलेंस से ही लेकर जायेंगे। करीब दो घंटे बाद घायल को खटीमा से आई एंबुलेंस से हल्द्वानी ले जाया गया।
- डॉ. रवींद्र सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी, सितारगंज