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प्रधान बनने को दूसरे समाज की युवती से शादी करने का आरोप
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बाजपुर। उत्तराखंड में इस बार पंचायत चुनाव में हुए आरक्षण ने प्रधानी के कई दावेदारों के पैरों के तले की जमीन खिसका दी तो किसी ग्राम पंचायत में चुनाव लड़ने को उम्मीदवार ही नहीं मिल रहा। बाजपुर में ऐसी ही एक ग्राम पंचायत के अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित होने पर अनुसूचित जाति से प्रधानी के दावेदार के अरमानों पर पानी फिरा तो उसने तुरत-फुरत अपने बेटे की शादी अनुसूचित जनजाति की युवती से करा दी, ताकि उसे प्रधानी का चुनाव लड़ाया जा सके और प्रधानी परिवार के पास रहे।
आरक्षण में विसंगति का आलम ये है कि चंपावत के सुंगरखाल ग्राम पंचायत सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है लेकिन इस गांव में अनु. जाति का एक ही परिवार रहता है। परिवार के मुखिया का निधन हो चुका है। उनकी पत्नी भी दो बच्चों की शर्त के चलते चुनाव नहीं लड़ सकती और बच्चे 21 साल की आयु के नहीं होने के कारण चुनाव नहीं लड़ सकते। जाहिर है, इस गांव को प्रधान शायद नहीं मिल सकेगा।
बाजपुर गांव की सीट इस बार अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित कर दी गई। गांव के अनुसूचित जाति का एक परिवार चुनाव लड़ना चाहता था लेकिन आरक्षण ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया। लेकिन चुनाव तो लड़ना ही था, इसलिए परिवार के मुखिया ने अपने बेटे अरविंद उर्फ अमर की शादी भीखमपुरी गांव की अनुसूचित जनजाति की युवती रजनी से कर दी।
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अब यह परिवार रजनी को चुनाव लड़ाएगा। हालांकि इस मामले में गांव की राजनीति गरमा गई है। गांव के कुछ लोगों ने इस कदम का विरोध किया है। उन्होंने तहसीलदार जोगासिंह को ज्ञापन सौंपकर ग्राम सभा बाजपुर में फर्जी वोट और फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र बनाने की शिकायत करते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों मेें पूर्व प्रधान द्वारिका प्रसाद, रहमत अली, राजू आदि थे।
ज्ञापन की प्रति एसडीएम एपी वाजपेयी और बीडीओ हरसिंह मेहरा को भेजी गई है। तहसीलदार जोगासिंह के अनुसार अनुसूचित जाति के युवक अरविंद और अनुसूचित जनजाति की युवती रजनी ने नौ सितंबर को कोर्ट मैरिज की है। अरविंद के पिता रजनी का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज करवाने तहसील आए थे, उचित प्रक्रिया के बाद ही लिस्ट में नाम दर्ज कराया जाएगा।
ससुराल के गांव की निवासी हो जाएगी विवाहिता
उपजिलाधिकारी एपी वाजपेयी ने बताया कि शादी होने पर विवाहिता अपनी ससुराल के गृह स्थान की निवासी हो जाएगी। पात्रता की श्रेणी में होने पर विवाहिता का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज किया जा सकता है। हालांकि बाजपुर गांव में युवक और युवती के कोर्ट मैरिज किए जाने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
कोर्ट की शरण लेंगे
बाजपुर। पूर्व बीडीसी सदस्य मुनब्बर अली ने बताया कि चुनाव में भागीदारी करने के लिए कुछ लोग अवसरवादिता को बढ़ा दे रहे हैं। ग्राम सभा बाजपुर गांव में प्रधान पद की सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गई है। गांव निवासी एक युवक ने दूसरी जाति की युवती से इसी महीने में कोर्ट मैरिज की है। 16 सिंतबर तक वोटर लिस्ट में युवती का नाम अंकित नहीं है। इस मामले को लेकर ग्रामीण कोर्ट की शरण में जाने का मन बना रहे हैं।
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आरक्षण में विसंगति का आलम ये है कि चंपावत के सुंगरखाल ग्राम पंचायत सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है लेकिन इस गांव में अनु. जाति का एक ही परिवार रहता है। परिवार के मुखिया का निधन हो चुका है। उनकी पत्नी भी दो बच्चों की शर्त के चलते चुनाव नहीं लड़ सकती और बच्चे 21 साल की आयु के नहीं होने के कारण चुनाव नहीं लड़ सकते। जाहिर है, इस गांव को प्रधान शायद नहीं मिल सकेगा।
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बाजपुर गांव की सीट इस बार अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित कर दी गई। गांव के अनुसूचित जाति का एक परिवार चुनाव लड़ना चाहता था लेकिन आरक्षण ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया। लेकिन चुनाव तो लड़ना ही था, इसलिए परिवार के मुखिया ने अपने बेटे अरविंद उर्फ अमर की शादी भीखमपुरी गांव की अनुसूचित जनजाति की युवती रजनी से कर दी।
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अब यह परिवार रजनी को चुनाव लड़ाएगा। हालांकि इस मामले में गांव की राजनीति गरमा गई है। गांव के कुछ लोगों ने इस कदम का विरोध किया है। उन्होंने तहसीलदार जोगासिंह को ज्ञापन सौंपकर ग्राम सभा बाजपुर में फर्जी वोट और फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र बनाने की शिकायत करते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों मेें पूर्व प्रधान द्वारिका प्रसाद, रहमत अली, राजू आदि थे।
ज्ञापन की प्रति एसडीएम एपी वाजपेयी और बीडीओ हरसिंह मेहरा को भेजी गई है। तहसीलदार जोगासिंह के अनुसार अनुसूचित जाति के युवक अरविंद और अनुसूचित जनजाति की युवती रजनी ने नौ सितंबर को कोर्ट मैरिज की है। अरविंद के पिता रजनी का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज करवाने तहसील आए थे, उचित प्रक्रिया के बाद ही लिस्ट में नाम दर्ज कराया जाएगा।
ससुराल के गांव की निवासी हो जाएगी विवाहिता
उपजिलाधिकारी एपी वाजपेयी ने बताया कि शादी होने पर विवाहिता अपनी ससुराल के गृह स्थान की निवासी हो जाएगी। पात्रता की श्रेणी में होने पर विवाहिता का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज किया जा सकता है। हालांकि बाजपुर गांव में युवक और युवती के कोर्ट मैरिज किए जाने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
कोर्ट की शरण लेंगे
बाजपुर। पूर्व बीडीसी सदस्य मुनब्बर अली ने बताया कि चुनाव में भागीदारी करने के लिए कुछ लोग अवसरवादिता को बढ़ा दे रहे हैं। ग्राम सभा बाजपुर गांव में प्रधान पद की सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गई है। गांव निवासी एक युवक ने दूसरी जाति की युवती से इसी महीने में कोर्ट मैरिज की है। 16 सिंतबर तक वोटर लिस्ट में युवती का नाम अंकित नहीं है। इस मामले को लेकर ग्रामीण कोर्ट की शरण में जाने का मन बना रहे हैं।