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Udham Singh Nagar News: झूठी निकली पुलिस के टॉर्च की कहानी, सात साल बाद दो युवक निकले बेगुनाह
Mon, 15 Dec 2025 10:33 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 15 Dec 2025 10:33 PM IST
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रुद्रपुर। पुलिस अक्सर अपनी फर्द में जिक्र करती है कि उन्होंने टॉर्च की रोशनी में संदिग्धों लोगों को दबोचा जो आपराधिक घटना की योजना बना रहे थे। किच्छा पुलिस ने भी सात साल पहले टॉर्च की रोशनी में यूपी के शाहजहांपुर निवासी दो युवकों को पकड़ा। आरोप था कि दोनों डकैती की योजना बना रहे थे। अदालत में पुलिस कर्मियों के बयानों में ही विरोधाभास हो गया। इस पर अदालत ने सात साल बाद दोनों को डकैती के मामले में दोषमुक्त कर दिया है।
घटना सितंबर 2018 की है। किच्छा थाना के तत्कालीन एसओ मोहन चंद्र पांडे अपने सहयोगी विनोद जोशी समेत एसओजी इंचार्ज कमलेश भट्ट के साथ पंचायत भवन के सामने रेलवे लाइन पर पहुंचे। जहां से पुलिस ने पांच युवकों को पकड़ा था। पकड़े गए युवकों के पास से पुलिस ने तमंचा व चाकू भी बरामद किए थे। जब पुलिस ने उनसे पूछताछ की तो वह बात सामने आई कि वह किसी घर में डकैती की योजना बना रहे थे।
सभी अपराधी किस्म के हैं और रुद्रपुर में गैंग बनाकर लूट व डकैती कर चुके हैं। पुलिस ने सभी को पकड़कर प्राथमिकी दर्ज की। नवंबर 2018 को इस मामले में आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए गए।
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मामला द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश मीना देउपा की अदालत में चला। पुलिस ने बताया था कि उन्होंने रात के अंधेरे में टॉर्च की रोशनी में अभियुक्तों को पकड़ा। न्यायालय ने पुलिसकर्मियों के बयान लिए तो तत्कालीन थानाध्यक्ष ने बताया कि कार 400 मीटर पहले खड़ी की। इसके बाद पुलिस टॉर्च की रोशनी में गई। इसी तरह अन्य पुलिस कर्मियों के बयान लिए तो विरोधाभास हुआ। किसी ने 300 तो किसी ने 40 मीटर तक टॉर्च की रोशनी में पहुंचने का बयान दिया।
सेवानिवृत्त एसआई सुधाकर जोशी के बयान थे कि अभियुक्त पकड़ने के दौरान गाड़ी 30-35 मीटर दूर खड़ी थी। इसके अलावा पास में गांव होने पर किसी स्वतंत्र व्यक्ति के पुलिस बयान दर्ज नहीं कर सकी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बयानों में विरोधाभास होने पर 12 दिसंबर को डकैती के अभियुक्त बनाए गए मिलकिया, थाना निगोही, शाहजहांपुर उत्तरप्रदेश निवासी खेम उर्फ खिम्मा व ईशापुर, थाना निगोही, शाहजहांपुर उत्तरप्रदेश बचराम को डकैती के आरोप में दोषमुक्त कर दिया है।
किसी अन्य केस में शामिल नहीं तो तुरंत रिहा करें
अदालत ने यह भी कहा कि रिहाई आदेश संबंधित कारागार को भेजा जाए। दोनों अभियुक्त यदि किसी दूसरे मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें जेल से तुरंत रिहा किया जाए।
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घटना सितंबर 2018 की है। किच्छा थाना के तत्कालीन एसओ मोहन चंद्र पांडे अपने सहयोगी विनोद जोशी समेत एसओजी इंचार्ज कमलेश भट्ट के साथ पंचायत भवन के सामने रेलवे लाइन पर पहुंचे। जहां से पुलिस ने पांच युवकों को पकड़ा था। पकड़े गए युवकों के पास से पुलिस ने तमंचा व चाकू भी बरामद किए थे। जब पुलिस ने उनसे पूछताछ की तो वह बात सामने आई कि वह किसी घर में डकैती की योजना बना रहे थे।
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सभी अपराधी किस्म के हैं और रुद्रपुर में गैंग बनाकर लूट व डकैती कर चुके हैं। पुलिस ने सभी को पकड़कर प्राथमिकी दर्ज की। नवंबर 2018 को इस मामले में आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए गए।
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मामला द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश मीना देउपा की अदालत में चला। पुलिस ने बताया था कि उन्होंने रात के अंधेरे में टॉर्च की रोशनी में अभियुक्तों को पकड़ा। न्यायालय ने पुलिसकर्मियों के बयान लिए तो तत्कालीन थानाध्यक्ष ने बताया कि कार 400 मीटर पहले खड़ी की। इसके बाद पुलिस टॉर्च की रोशनी में गई। इसी तरह अन्य पुलिस कर्मियों के बयान लिए तो विरोधाभास हुआ। किसी ने 300 तो किसी ने 40 मीटर तक टॉर्च की रोशनी में पहुंचने का बयान दिया।
सेवानिवृत्त एसआई सुधाकर जोशी के बयान थे कि अभियुक्त पकड़ने के दौरान गाड़ी 30-35 मीटर दूर खड़ी थी। इसके अलावा पास में गांव होने पर किसी स्वतंत्र व्यक्ति के पुलिस बयान दर्ज नहीं कर सकी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बयानों में विरोधाभास होने पर 12 दिसंबर को डकैती के अभियुक्त बनाए गए मिलकिया, थाना निगोही, शाहजहांपुर उत्तरप्रदेश निवासी खेम उर्फ खिम्मा व ईशापुर, थाना निगोही, शाहजहांपुर उत्तरप्रदेश बचराम को डकैती के आरोप में दोषमुक्त कर दिया है।
किसी अन्य केस में शामिल नहीं तो तुरंत रिहा करें
अदालत ने यह भी कहा कि रिहाई आदेश संबंधित कारागार को भेजा जाए। दोनों अभियुक्त यदि किसी दूसरे मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें जेल से तुरंत रिहा किया जाए।