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Udham Singh Nagar News: वीडियो कॉल से किए बेटे के आखिरी दीदार, परिजन बेसुध

Tue, 13 May 2025 01:05 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Tue, 13 May 2025 01:05 AM IST
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The family saw their son for the last time through a video call, and their family members are inconsolable
मो.सलमान
जसपुर। सड़क हादसे में हुई मौत के एक सप्ताह बाद जसपुर के युवक का शव सऊदी अरब में ही दफना दिया गया। परिजनों की इजाजत एवं भारतीय राजदूतावास (रियाद) की कागजी कार्रवाई में सात दिन का समय लगा। मृतक के भारतीय दोस्त ने दफनाए जाने की कार्रवाई पूरी की। परिजनों ने अपने बेटे के आखिरी दीदार वीडियो कॉल के जरिये किए। शव देखकर परिजन बेसुध हो गए।
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मोहल्ला नई बस्ती डेरिया निवासी मोहम्मद सलमान (25) पुत्र अहमदुल्लाह सऊदी अरब के रियाद की एक कंपनी में ट्रक मैकेनिक के फील्ड वर्कर का काम करता था। पांच अप्रैल की रात आठ बजे वह रियाद से लगभग 250 किमी दूर होता तमीमी (सऊदी अरब) में ट्रक रिपेयर करने जा रहा था। उसके साथ उसका एक भारतीय दोस्त मोहम्मद रिजवान (28) पुत्र मोहम्मद इस्लाम निवासी शरीफ नगर (मुरादाबाद, यूपी) भी था। दोनों युवक कंपनी की हायलेक्स कार में सवार थे। बताते हैं कि रियाद-होता तमीमी के दुबई मार्ग पर टायर फटने से कार अनियंत्रित हो गई और फुटपाथ से टकराकर पलट गई। इससे सलमान की मौके पर ही मौत हो गई जबकि रिजवान का पैर फ्रैक्चर हो गया।
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सऊदी अरब में रिजवान के दोस्त मोहम्मद अफजाल ने बताया कि सलमान के शव को होता तमीमी (सऊदी अरब) के सरकारी अस्पताल में रखा गया था। परिजनों की इजाजत के बाद सोमवार को भारतीय राजदूतावास (रियाद) के सेक्रेटरी प्रवीण कुमार ने शव उनके सुपुर्द कर दिया। इसके बाद अफजाल ने सलमान के परिजनों को वीडियो कॉलिंग की। इसके जरिये परिजनों ने सलमान को अखिरी बार देखा। शव देख परिजन रोते-रोते बेसुध हो गए। नमाज-ए-मगबिर के बाद रियाद की अलराजी मस्जिद में सलमान की नमाज-ए-जनाजा पढ़ी गई। देर शाम नसीम शहर के कब्रिस्तान में शव दफनाया गया।
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दफीना न कर पाने से परिवार में मायूसी

जसपुर। मृतक के पिता अहमदुल्लाह ने बताया कि पुत्र का दफीना परिजनों की ओर से न किए जाने से परिवार में मायूसी है। उन्होंने ही घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सलमान को सात साल पहले काम करने सऊदी अरब भेजा था। उसकी एक बड़ी बहन भी है। सलमान के कंधों पर बहन के विवाह की जिम्मेदारी थी। उसे 25 मई को घर आना था।
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