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धान की फसल को नष्ट कर रहा तेला कीट
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धान की फसल पर लगा तेला कीट। संवाद
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। खेतों में खड़ी धान की फसल को तेला (ब्राउन प्लांट हॉपर) कीट काफी हद तक नुकसान पहुंचा रहा है। जसपुर ब्लॉक के हरियावाला गांव में किसान इससे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। प्रारंभिक अवस्था में कीट पौधे को चूसता है उसके बाद पूरा खेत सूखना लगता है।
किसान विकास क्लब के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार ने बताया कि तेला को फुदका मच्छर भी कहा जाता है। यह कीट प्रतिवर्ष धान की फसल में लगता है लेकिन इस वर्ष कीटों की संख्या अधिक है। यह कीट एक ही दीन में धान के पौधे को चूसकर उसे पराल में बदल देता है। रासायनिक दवाओं का भी इस कीट पर अधिक असर नहीं हो रहा है जिससे काफी किसानों की फसल प्रभावित हो रही है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने बताया कि बचाव के लिए कीट प्रभावित खेतों में पानी जमा न होने दें और उर्वरकों का प्रयोग भी सावधानी के साथ करना चाहिए। कीट पर नियंत्रण पाने के लिए नीम का तेल जैसे निमीसिडनया नीम गोल्ड का प्रयोग 10 मिली लीटर प्रति लीटर की दर से करें । इसमें डिटर्जेंट मिला दें जिससे मादा कीटों की प्रजनन क्षमता काफी कम हो जाती है। रासायनिक नियंत्रण में इमिडाक्लोप्रिड, इथोफेनपाक्स, पाईमेट्रोजिन, फिप्रोनील आदि का प्रयोग करें।
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किसान विकास क्लब के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार ने बताया कि तेला को फुदका मच्छर भी कहा जाता है। यह कीट प्रतिवर्ष धान की फसल में लगता है लेकिन इस वर्ष कीटों की संख्या अधिक है। यह कीट एक ही दीन में धान के पौधे को चूसकर उसे पराल में बदल देता है। रासायनिक दवाओं का भी इस कीट पर अधिक असर नहीं हो रहा है जिससे काफी किसानों की फसल प्रभावित हो रही है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने बताया कि बचाव के लिए कीट प्रभावित खेतों में पानी जमा न होने दें और उर्वरकों का प्रयोग भी सावधानी के साथ करना चाहिए। कीट पर नियंत्रण पाने के लिए नीम का तेल जैसे निमीसिडनया नीम गोल्ड का प्रयोग 10 मिली लीटर प्रति लीटर की दर से करें । इसमें डिटर्जेंट मिला दें जिससे मादा कीटों की प्रजनन क्षमता काफी कम हो जाती है। रासायनिक नियंत्रण में इमिडाक्लोप्रिड, इथोफेनपाक्स, पाईमेट्रोजिन, फिप्रोनील आदि का प्रयोग करें।
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