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डमी फर्म बनाकर टैक्स चोरी करने वाले भी रडार में
चंदन बंगारी रुद्रपुर।
Updated Wed, 05 Dec 2018 12:09 AM IST
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रुद्रपुर के राज्यकर कार्यालय में छापेमारी की जानकारी देते अपर आयुक्त अनिल सिंह।
- फोटो : Amar ujala
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राज्य कर विभाग ने रुद्रपुर सर्किल में जिन 19 प्रतिष्ठानों में छापेमारी की है, उनके कर्ताधर्ता जुलाई से जीएसटी जमा नहीं कर रहे थे। विभाग की एसटीएफ ने ई-वे बिल के आधार पर छापेमारी की और 15 से 20 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ने की बात सामने आई है। एसटीएफ कई और कारोबारियों के ई-वे बिल खंगाल रही है। इसके अलावा कई ऐसे व्यापारी भी हैं जो डमी फर्म बनाकर कर प्रत्यक्ष का लाभ हासिल कर रहे हैं। ऐसे व्यापारी भी विभाग के निशाने में हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही कई और कारोबारियों के प्रतिष्ठानों में छापेमारी की कार्रवाई हो सकती है।
दरअसल कारोबारी को 50 हजार रुपये से अधिक का माल खरीदने या बेचने पर ई-वे बिल बनाना होता है। ई-वे बिल बनते ही उसकी रिपोर्ट विभाग के सिस्टम में आ जाती है। काफी समय से ई-वे बिल से सामानों की खरीद और बिक्री कर रहे कुछ बड़े कारोबारी जीएसटी कर जमा नहीं कर रहे थे। इसके बाद विभाग की एसटीएम ने करोड़ों का कारोबार करने वाले कुछ कारोबारियों के ई-वे बिल खंगाले तो पता चला कि जुलाई से कईयों ने टैक्स ही जमा नहीं किया है।
इसके बाद 10 टीमों ने 19 प्रतिष्ठानों में छापेमारी की और इसी दौरान पांच कारोबारियों से 2.93 करोड़ रुपये जीएसटी कर जमा भी करा लिया। लेकिन अभी बड़ी तादाद में बड़े-छोटे कारोबारी हैं, जो टैक्स नहीं जमा कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि विभाग पहले बड़ी मात्रा में खरीद बिक्री कर टैक्स जमा नहीं करने वालों की सूची तैयार कर रही है। इसके अलावा ऐसे व्यापारी भी चिन्हित हो रहे हैं, जो डमी फर्म बनाकर कर प्रत्यक्ष का लाभ हासिल कर रहे हैं। माल को खरीदने और बेचने में डमी फर्म के साथ ही वृत्तीय व्यापार का सहारा लेकर टैक्स चोरी किया जा रहा है।
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स्टोन क्रशर और स्टॉकिस्टों पर भी नजर
रुद्रपुर। राज्य कर विभाग की एसटीएफ की नजर खनन कारोबारियों पर है। सूत्रों की मानें तो कईं स्टॉकिस्ट और स्टोन क्रशर संचालकों ने ई-रवन्ना में बड़ी मात्रा में खनन सामग्री को खरीदा और बेचा है। लेकिन वे जीएसटी कर जमा नहीं कर रहे हैं। एसटीएफ ऐसे कारोबारियों को भी सूचीबद्ध कर रहा है और जल्द कार्यवाही कर सकता है।
राज्य कर रुद्रपुर की एसटीएफ इकाई ऐसे व्यापारियों की सघन जांच कर रही है जो ई वे बिल से सामान की खरीद बिक्री करने के बावजूद जीएसटी टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं। ऐसे व्यापारियों को चिह्नित कर छापेमारी की कार्यवाही की जाती रहेगी।
- अनिल सिंह, अपर आयुक्त राज्य कर।
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दरअसल कारोबारी को 50 हजार रुपये से अधिक का माल खरीदने या बेचने पर ई-वे बिल बनाना होता है। ई-वे बिल बनते ही उसकी रिपोर्ट विभाग के सिस्टम में आ जाती है। काफी समय से ई-वे बिल से सामानों की खरीद और बिक्री कर रहे कुछ बड़े कारोबारी जीएसटी कर जमा नहीं कर रहे थे। इसके बाद विभाग की एसटीएम ने करोड़ों का कारोबार करने वाले कुछ कारोबारियों के ई-वे बिल खंगाले तो पता चला कि जुलाई से कईयों ने टैक्स ही जमा नहीं किया है।
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इसके बाद 10 टीमों ने 19 प्रतिष्ठानों में छापेमारी की और इसी दौरान पांच कारोबारियों से 2.93 करोड़ रुपये जीएसटी कर जमा भी करा लिया। लेकिन अभी बड़ी तादाद में बड़े-छोटे कारोबारी हैं, जो टैक्स नहीं जमा कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि विभाग पहले बड़ी मात्रा में खरीद बिक्री कर टैक्स जमा नहीं करने वालों की सूची तैयार कर रही है। इसके अलावा ऐसे व्यापारी भी चिन्हित हो रहे हैं, जो डमी फर्म बनाकर कर प्रत्यक्ष का लाभ हासिल कर रहे हैं। माल को खरीदने और बेचने में डमी फर्म के साथ ही वृत्तीय व्यापार का सहारा लेकर टैक्स चोरी किया जा रहा है।
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स्टोन क्रशर और स्टॉकिस्टों पर भी नजर
रुद्रपुर। राज्य कर विभाग की एसटीएफ की नजर खनन कारोबारियों पर है। सूत्रों की मानें तो कईं स्टॉकिस्ट और स्टोन क्रशर संचालकों ने ई-रवन्ना में बड़ी मात्रा में खनन सामग्री को खरीदा और बेचा है। लेकिन वे जीएसटी कर जमा नहीं कर रहे हैं। एसटीएफ ऐसे कारोबारियों को भी सूचीबद्ध कर रहा है और जल्द कार्यवाही कर सकता है।
राज्य कर रुद्रपुर की एसटीएफ इकाई ऐसे व्यापारियों की सघन जांच कर रही है जो ई वे बिल से सामान की खरीद बिक्री करने के बावजूद जीएसटी टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं। ऐसे व्यापारियों को चिह्नित कर छापेमारी की कार्यवाही की जाती रहेगी।
- अनिल सिंह, अपर आयुक्त राज्य कर।