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एसआईटी को समाज कल्याण विभाग नहीं मिल पा रहे पूरे दस्तावेज

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jan 2021 11:20 PM IST
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SIT in Scholarship
रुद्रपुर। दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआईटी को समाज कल्याण विभाग से पूरे अभिलेख नहीं मिल पा रहे हैं। एसआईटी ने जिला समाज कल्याण विभाग से विद्यार्थियों का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। इधर, समाज कल्याण निदेशक विनोद गोस्वामी ने स्पष्ट कर दिया है कि जितना रिकॉर्ड उनके पास था, वह एसआईटी को दे दिया गया है। कर्मचारियों की कमी के चलते पूरा रिकॉर्ड देने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। विवेचना के बाद एसआईटी अन्य तथ्यों के बारे में स्वत: जानकारी एकत्र कर सकती है।
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जिले में 60 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा सरकार की ओर से कराए गए ऑडिट में हुआ है। घोटाले के खुलासे के लिए गठित एसआईटी ने बाहरी राज्यों के शैक्षिक संस्थानों में 14 करोड़ की जांच पूरी करने के बाद जिले में जांच शुरू कर दी है। जांच से पहले समाज कल्याण विभाग से वर्ष 2011 से 2018 तक 215 निजी एवं सरकारी शैक्षिक संस्थानों में दर्शाए गए एक लाख 20 हजार विद्यार्थियों का रिकॉर्ड मांगा था। समाज कल्याण विभाग एसआईटी को अपने स्तर से लगातार रिकॉर्ड उपलब्ध करा रही है। वहीं, एसआईटी अधिकारियों का कहना है कि समाज कल्याण विभाग उन्हें पूरी जानकारी नहीं दे रहा है। दोनों विभागों के बीच चल रहे नोटिस और जुबानी बहस समाज कल्याण सचिव तक भी पहुंच चुकी है।
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इधर, समाज कल्याण विभाग के निदेशक विनोद गोस्वामी ने बताया कि समाज कल्याण की ओर से रिकॉर्ड नहीं देने की शिकायत उनके पास भी आई थी। उन्होंने ऊधमसिंह नगर पहुंचकर एसआईटी एचं विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की थी। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग की ओर से रिकॉर्ड देने में कहीं कोताही नहीं की जा रही है लेकिन एसआईटी एक बार में पूरा रिकॉर्ड नहीं मांग रही है। कर्मचारियों की कमी के चलते अधिकारियों और कर्मचारियों को परेशान होना पड़ रहा है।
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अलग-अलग कोर्स का रिकॉर्ड देना संभव नहीं
रुद्रपुर। समाज कल्याण निदेशक विनोद गोस्वामी का कहना है कि एसआईटी अलग-अलग कोर्स की सूची बनाकर देने को कह रही है। इसका रिकॉर्ड दे पाना संभव नहीं है। नौ साल में फाइलें इतनी हो गई हैं कि उन्हें टटोलना बड़ा मुश्किल है। इसके बावजूद कर्मचारी सभी प्रकार की जानकारी दे रहे हैं। विद्यार्थियों के मोबाइल नंबर बंद होने तक के सवाल समाज कल्याण विभाग से पूछना तर्कसंगत नहीं है।
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