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Udham Singh Nagar News: पश्चिम एशिया के हालात पर सिडकुल की सतर्क निगाहें
Tue, 10 Mar 2026 11:37 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 10 Mar 2026 11:37 PM IST
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रुद्रपुर। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ-साथ देश-दुनिया के उद्योगों पर भी पड़ने लगा है। वैश्विक स्तर पर व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ने से सिडकुल के उद्यमियों की चिंता भी बढ़ गई है।
उद्यमियों के अनुसार सिडकुल की कई इकाइयां कच्चे माल के लिए विदेशों पर निर्भर हैं जबकि तैयार उत्पादों का एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भेजा जाता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण शिपिंग रूट, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक लागत प्रभावित हो सकती है। इससे उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है और कंपनियों के मुनाफे का मार्जिन घट सकता है। उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो आयात-निर्यात के साथ उत्पादन लागत और बाजार की मांग पर भी असर पड़ सकता है।
सिडकुल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उद्योग जगत की स्थिति वेट एंड वॉच जैसी बनी हुई है। कंपनियां परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं और हालात सामान्य होने की उम्मीद कर रही हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर उत्पादन, निर्यात और रोजगार पर भी पड़ सकता है।
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यह समसामयिक घटना का असर है जो कंपनियों पर पड़ रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही अच्छे संकेत मिलेंगे और पहले जैसी स्थिति बनेगी। - एसके सिन्हा, अध्यक्ष, सिडकुल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
सबसे अधिक फार्मा, ऑटोमोबाइल और फुड कंपनियां संघर्ष से प्रभावित हो रही हैं। इसके चलते परिवहन की लागत में पहले की अपेक्षा बढ़ोतरी हुई है और डिमांड भी कहीं न कहीं कम हुई है। - अजय तिवारी, पूर्व अध्यक्ष, सिडकुल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
पहले से सिडकुल में सुस्ती, रोजगार तलाशने को विवश श्रमिक
रुद्रपुर। औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में सुस्ती का माहौल है। सिडकुल में करीब 7-8 कंपनियां पहले से ही निष्क्रिय हैं और जिले में करीब 48 से अधिक उद्योग बंद हो चुके हैं।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि बाजार की परिस्थितियों में बदलाव, लागत में बढ़ोतरी और कंपनियों की व्यावसायिक रणनीति में बदलाव जैसे कारणों से कुछ इकाइयों ने उत्पादन कम किया या अन्य स्थानों पर शिफ्ट किया है। सिडकुल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारियों और पुराने उद्यमियों के अनुसार निष्क्रिय पड़े प्लॉटों को फिर से उपयोग में लाने और नए उद्योग स्थापित कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े कामगारों का कहना है कि कुछ इकाइयों में पहले बड़ी संख्या में श्रमिक काम करते थे। अब उत्पादन कम होने और इकाइयों के बंद होने से रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो रहे हैं। कई श्रमिकों को दूसरे क्षेत्रों में काम तलाशना पड़ रहा है।
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उद्यमियों के अनुसार सिडकुल की कई इकाइयां कच्चे माल के लिए विदेशों पर निर्भर हैं जबकि तैयार उत्पादों का एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भेजा जाता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण शिपिंग रूट, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक लागत प्रभावित हो सकती है। इससे उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है और कंपनियों के मुनाफे का मार्जिन घट सकता है। उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो आयात-निर्यात के साथ उत्पादन लागत और बाजार की मांग पर भी असर पड़ सकता है।
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सिडकुल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उद्योग जगत की स्थिति वेट एंड वॉच जैसी बनी हुई है। कंपनियां परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं और हालात सामान्य होने की उम्मीद कर रही हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर उत्पादन, निर्यात और रोजगार पर भी पड़ सकता है।
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यह समसामयिक घटना का असर है जो कंपनियों पर पड़ रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही अच्छे संकेत मिलेंगे और पहले जैसी स्थिति बनेगी। - एसके सिन्हा, अध्यक्ष, सिडकुल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
सबसे अधिक फार्मा, ऑटोमोबाइल और फुड कंपनियां संघर्ष से प्रभावित हो रही हैं। इसके चलते परिवहन की लागत में पहले की अपेक्षा बढ़ोतरी हुई है और डिमांड भी कहीं न कहीं कम हुई है। - अजय तिवारी, पूर्व अध्यक्ष, सिडकुल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
पहले से सिडकुल में सुस्ती, रोजगार तलाशने को विवश श्रमिक
रुद्रपुर। औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में सुस्ती का माहौल है। सिडकुल में करीब 7-8 कंपनियां पहले से ही निष्क्रिय हैं और जिले में करीब 48 से अधिक उद्योग बंद हो चुके हैं।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि बाजार की परिस्थितियों में बदलाव, लागत में बढ़ोतरी और कंपनियों की व्यावसायिक रणनीति में बदलाव जैसे कारणों से कुछ इकाइयों ने उत्पादन कम किया या अन्य स्थानों पर शिफ्ट किया है। सिडकुल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारियों और पुराने उद्यमियों के अनुसार निष्क्रिय पड़े प्लॉटों को फिर से उपयोग में लाने और नए उद्योग स्थापित कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े कामगारों का कहना है कि कुछ इकाइयों में पहले बड़ी संख्या में श्रमिक काम करते थे। अब उत्पादन कम होने और इकाइयों के बंद होने से रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो रहे हैं। कई श्रमिकों को दूसरे क्षेत्रों में काम तलाशना पड़ रहा है।