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गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब के प्रधान होंगे सेवा सिंह
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर।
Updated Wed, 27 Jun 2018 12:01 AM IST
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सेवा सिंह।
- फोटो : amar ujala
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गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब के प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद का कोर्ट ने फैसला सुनाकर पटाक्षेप कर दिया है। कोर्ट ने पूर्व के प्रस्ताव के आधार पर सेवा सिंह को प्रधान और जसविंदर सिंह गिल को उप प्रधान बनाने का निर्णय सुनाया है। इसके अलावा, प्रीतम सिंह संधू महासचिव और केहर सिंह सचिव होंगे। देर रात आए कोर्ट के फैसले के बाद तराई सिख महासभा के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। इस मामले को लेकर 18 जून से सुनवाई चल रही थी।
गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब में 18 साल रिसीवर के कार्यकाल के बाद वर्ष 2016 में हाइकोर्ट के आदेश पर चुनाव कराए गए थे। चुनाव में किसी गुट को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका था। इस पर चुनाव अधिकारी ने सर्वसम्मति से जसविंदर सिंह गिल को प्रधान और सेवा सिंह को उप प्रधान चुना था। प्रीतम सिंह संधू को महासचिव और केहर सिंह को सचिव चुना गया था।
डेढ़ साल के कार्यकाल के बाद सेवा सिंह को प्रधान और जसविंदर को उप प्रधान बनाने पर सहमति बनी थी। 22 दिसंबर 2016 को पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्यों ने पदभार ग्रहण किया था। 22 नवंबर 2017 को गुरुद्वारा साहिब में मर्यादा के विपरीत कार्य करने पर गुरुनानक बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य ने सेवा, केहर और प्रीतम के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
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इसके बाद प्रधान ने तीनों को निलंबित कर कमेटी सदस्यों की सहमति पर जरनैल सिंह को उप प्रधान, सरदार धन्ना सिंह को महासचिव और भाई पाल सिंह को सचिव नियुक्त किया था। सेवा सिंह सहित तीनों पदाधिकारियों ने अपने निलंबन को गलत करार देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने एडीजे तृतीय की अदालत को मामले का निस्तारण करने के आदेश दिए थे।
इसी बीच, 21 जून 2018 को जसविंदर सिंह का डेढ़ साल का कार्यकाल खत्म हो गया। इसके बाद डीएम, एसएसपी और अपर जिला जज विवेक द्विवेदी की मौजूदगी में दोनों पक्षों की राय लेकर सर्वसम्मति बनाने की कोशिश की गई थी। दोनों पक्षों के लोगों के राजी नहीं होने पर डीएम ने एसडीएम सितारगंज को 27 जून तक रिसीवर नियुक्त कर दिया था। मंगलवार को दिनभर चली सुनवाई के बाद देर शाम एडीजे तृतीय विवेक द्विवेदी ने पूर्व में तय प्रस्ताव के आधार पर सेवा सिंह को प्रधान, जसविंदर गिल को उपप्रधान, प्रीतम सिंह संधू को महासचिव और केहर सिंह को सचिव बनाने का निर्णय सुनाया।
इधर, सेवा सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर एडीजे तृतीय की अदालत ने पूर्व में तय प्रस्ताव के आधार पर फैसला सुनाया गया है। उनका, प्रीतम और केहर का निलंबन भी रद्द कर दिया गया है। उनका कार्यकाल 20 दिसंबर 2021 तक रहेगा। कोर्ट के आदेश की प्रति बुधवार को डीएम को मिलने के बाद सभी को चार्ज मिल जाएगा।
तय तारीख में पेश नहीं हुए जसविंदर गिल
रुद्रपुर। एडीजे तृतीय की अदालत में 18 जून से सुनवाई चल रही थी। इसी दिन जसविंदर सिंह गिल अपने अधिवक्ता के साथ कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने 24 जून को पक्ष रखने के लिए पेश होने की तारीख ली थी। सेवा सिंह ने बताया कि 24 को न जसविंदर आए और न ही उनके अधिवक्ता। ऐसा ही 25 और 26 जून को भी हुआ। उनकी जगह केवल अधिवक्ता के असिस्टेंट ही कोर्ट में हाजिर हुए थे।
कोर्ट के फैसले से पुलिस प्रशासन को राहत
रुद्रपुर। एडीजे कोर्ट के फैसले से पुलिस प्रशासन को भी राहत मिली है। डीएम ने दोनों पक्षों की सहमति नहीं होने पर 27 जून तक रिसीवर नियुक्त किया है। 27 तक दोनों को सर्वसम्मति बनाने का वक्त दिया गया था। लेकिन, दोनों गुटों के रवैये से सर्वसम्मति बनने के आसार बेहद कम थे। दोनों पक्षों में टकराव की संभावना भी थी। ऐसे में प्रबंधन को लेकर फैसला करने को लेकर पुलिस प्रशासन के माथे पर भी बल था।
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गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब में 18 साल रिसीवर के कार्यकाल के बाद वर्ष 2016 में हाइकोर्ट के आदेश पर चुनाव कराए गए थे। चुनाव में किसी गुट को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका था। इस पर चुनाव अधिकारी ने सर्वसम्मति से जसविंदर सिंह गिल को प्रधान और सेवा सिंह को उप प्रधान चुना था। प्रीतम सिंह संधू को महासचिव और केहर सिंह को सचिव चुना गया था।
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डेढ़ साल के कार्यकाल के बाद सेवा सिंह को प्रधान और जसविंदर को उप प्रधान बनाने पर सहमति बनी थी। 22 दिसंबर 2016 को पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्यों ने पदभार ग्रहण किया था। 22 नवंबर 2017 को गुरुद्वारा साहिब में मर्यादा के विपरीत कार्य करने पर गुरुनानक बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य ने सेवा, केहर और प्रीतम के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
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इसके बाद प्रधान ने तीनों को निलंबित कर कमेटी सदस्यों की सहमति पर जरनैल सिंह को उप प्रधान, सरदार धन्ना सिंह को महासचिव और भाई पाल सिंह को सचिव नियुक्त किया था। सेवा सिंह सहित तीनों पदाधिकारियों ने अपने निलंबन को गलत करार देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने एडीजे तृतीय की अदालत को मामले का निस्तारण करने के आदेश दिए थे।
इसी बीच, 21 जून 2018 को जसविंदर सिंह का डेढ़ साल का कार्यकाल खत्म हो गया। इसके बाद डीएम, एसएसपी और अपर जिला जज विवेक द्विवेदी की मौजूदगी में दोनों पक्षों की राय लेकर सर्वसम्मति बनाने की कोशिश की गई थी। दोनों पक्षों के लोगों के राजी नहीं होने पर डीएम ने एसडीएम सितारगंज को 27 जून तक रिसीवर नियुक्त कर दिया था। मंगलवार को दिनभर चली सुनवाई के बाद देर शाम एडीजे तृतीय विवेक द्विवेदी ने पूर्व में तय प्रस्ताव के आधार पर सेवा सिंह को प्रधान, जसविंदर गिल को उपप्रधान, प्रीतम सिंह संधू को महासचिव और केहर सिंह को सचिव बनाने का निर्णय सुनाया।
इधर, सेवा सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर एडीजे तृतीय की अदालत ने पूर्व में तय प्रस्ताव के आधार पर फैसला सुनाया गया है। उनका, प्रीतम और केहर का निलंबन भी रद्द कर दिया गया है। उनका कार्यकाल 20 दिसंबर 2021 तक रहेगा। कोर्ट के आदेश की प्रति बुधवार को डीएम को मिलने के बाद सभी को चार्ज मिल जाएगा।
तय तारीख में पेश नहीं हुए जसविंदर गिल
रुद्रपुर। एडीजे तृतीय की अदालत में 18 जून से सुनवाई चल रही थी। इसी दिन जसविंदर सिंह गिल अपने अधिवक्ता के साथ कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने 24 जून को पक्ष रखने के लिए पेश होने की तारीख ली थी। सेवा सिंह ने बताया कि 24 को न जसविंदर आए और न ही उनके अधिवक्ता। ऐसा ही 25 और 26 जून को भी हुआ। उनकी जगह केवल अधिवक्ता के असिस्टेंट ही कोर्ट में हाजिर हुए थे।
कोर्ट के फैसले से पुलिस प्रशासन को राहत
रुद्रपुर। एडीजे कोर्ट के फैसले से पुलिस प्रशासन को भी राहत मिली है। डीएम ने दोनों पक्षों की सहमति नहीं होने पर 27 जून तक रिसीवर नियुक्त किया है। 27 तक दोनों को सर्वसम्मति बनाने का वक्त दिया गया था। लेकिन, दोनों गुटों के रवैये से सर्वसम्मति बनने के आसार बेहद कम थे। दोनों पक्षों में टकराव की संभावना भी थी। ऐसे में प्रबंधन को लेकर फैसला करने को लेकर पुलिस प्रशासन के माथे पर भी बल था।