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राज्य में औद्योगिक विकास का वातावरण विकसित किया जा सकता है: बंसल
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केजीसीसीआई अध्यक्ष अशोक बंसल।
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (केजीसीसीआई) के अध्यक्ष अशोक बंसल ने कहा कि केंद्र एवं राज्य के द्वारा प्रदत्त औद्योगिक नीतियों के आकर्षण से विगत वर्षों में उत्तराखंड राज्य में बड़ी संख्या में उद्योग स्थापित हुए हैं। उत्तराखंड सरकार भी व्यापार की सुगमता का वातावरण तैयार करने की कोशिश कर रही है लेकिन उद्यमियों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मेथेनॉल कारोबार के लाइसेंस प्रक्रिया को सरल करने की मांग की है।
मंगलवार को एक बयान में बंसल ने कहा कि राज्य में कई ऐसे उद्योग हैं जो अपने यहां कच्चे माल के रूप में मेथेनॉल का उपयोग करते हैं। मेथेनॉल का उपयोग करने के लिए उद्योगों को राज्य आबकारी विभाग से लाइसेंस प्राप्त करना होता है। वर्तमान में विभिन्न जटिल प्रक्रियाएं पूर्ण करने के बाद लाइसेंस प्राप्त करने में उद्यमियों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
प्रति वर्ष लाइसेंस का नवीनीकरण करना, लाइसेंस नवीनीकरण में किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक देरी के मामले में उद्योग मेथेनॉल की खरीद नहीं कर पाते। इसके साथ ही प्रत्येक टैंकर के लिए राज्य आबकारी विभाग से अलग से परमिट लेना आवश्यक होना, परमिट की वैधता सामग्री की वास्तविक प्राप्ति तक जारी होने की तारीख से एक माह होना जो बेहद कम है आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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बंसल ने कहा कि अन्य लाइसेंसों की तरह इसकी भी अवधि पांच वर्ष की जानी चाहिए। उद्योगों के कच्चे माल के रूप में खरीदे जाने वाले मेथेनॉल के लिए परमिट की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। परमिट की बजाए आबकारी विभाग द्वारा उद्योगों से अन्य विभागों की तरह मासिक रिटर्न प्रस्तुत कराई जा सकती है।
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मंगलवार को एक बयान में बंसल ने कहा कि राज्य में कई ऐसे उद्योग हैं जो अपने यहां कच्चे माल के रूप में मेथेनॉल का उपयोग करते हैं। मेथेनॉल का उपयोग करने के लिए उद्योगों को राज्य आबकारी विभाग से लाइसेंस प्राप्त करना होता है। वर्तमान में विभिन्न जटिल प्रक्रियाएं पूर्ण करने के बाद लाइसेंस प्राप्त करने में उद्यमियों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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प्रति वर्ष लाइसेंस का नवीनीकरण करना, लाइसेंस नवीनीकरण में किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक देरी के मामले में उद्योग मेथेनॉल की खरीद नहीं कर पाते। इसके साथ ही प्रत्येक टैंकर के लिए राज्य आबकारी विभाग से अलग से परमिट लेना आवश्यक होना, परमिट की वैधता सामग्री की वास्तविक प्राप्ति तक जारी होने की तारीख से एक माह होना जो बेहद कम है आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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बंसल ने कहा कि अन्य लाइसेंसों की तरह इसकी भी अवधि पांच वर्ष की जानी चाहिए। उद्योगों के कच्चे माल के रूप में खरीदे जाने वाले मेथेनॉल के लिए परमिट की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। परमिट की बजाए आबकारी विभाग द्वारा उद्योगों से अन्य विभागों की तरह मासिक रिटर्न प्रस्तुत कराई जा सकती है।