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इस दिवाली फिर पिटेगा पटाखों का कारोबार
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काशीपुर में पाटाखों से सजी दुकान।
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। दिवाली के दिन सिर्फ ग्रीन पटाखे छोड़ने की ही अनुमति रहेगी। पटाखा कारोबारियों के धंधे पर इसका असर पड़ना लाजिमी है। शहर में 40 व्यापारियों को तीन दिनों तक सिर्फ ग्रीन पटाखे बेचने की अनुमति दी गई है।
एसडीएम आकांक्षा वर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक व्यापारी इस बार सिर्फ ग्रीन पटाखे ही बेच सकेंगे। 40 व्यक्तियों को लाइसेंस निर्गत किए गए हैं। ये सभी दुकानें उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज के खेल मैदान में लगाई गई हैं। पटाखा कारोबारियों का कहना है कि वे पहले से ही मंदी की मार झेल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से उनका पुराना स्टाक अनुपयोगी हो गया है।
पटाखे के कारोबार में पहले से ही 50 से 60 फीसद गिरावट की उम्मीद है। काशीपुर में बाजपुर रोड, कचनालगाजी और जसपुरखुर्द में पटाखे के थोक व्यापारी हैं। यहां पटाखे शिवकाशी से आते हैं। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले दो वर्षों में काशीपुर में पटाखों का कारोबार बुरी तरह पिछड़ा है।
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एहतियात के तौर पर दुुकानों पर पानी से भरे ड्रम रखे गए हैं। इस साल चकरी, मिट्टी के अनार, फूलजड़ी, स्काईशॉट की मांग ज्यादा है। ग्रीन पटाखों की बाध्यता से कारोबार प्रभावित हुआ है। प्रशासन की सख्ती के चलते रिटेल दुकानदार कम आवाज वाले पटाखों की मांग कर रहे हैं। मल्टी कलर रॉकेट की कीमत डेढ़ हजार रुपये तक हैं।
प्रदूषण मुक्त होते हैं ग्रीन पटाखे
काशीपुर। ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं लेकिन इनसे प्रदूषण काफी कम होता है। सामान्य पटाखों की तुलना में ये 40 से 50 प्रतिशत तक कम हानिकारक क्षमता की गैस उत्पन्न करते हैं। अमूमन सामान्य पटाखों से भारी मात्रा में नाइट्रोजन और सल्फर गैस उत्सर्जित होती है जो वातावरण को प्रदूषित करती है। इसके उलट ग्रीन पटाखों में प्रयुक्त होने वाले रसायनिक तत्व कम वोल्यूम के होते हैं।
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एसडीएम आकांक्षा वर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक व्यापारी इस बार सिर्फ ग्रीन पटाखे ही बेच सकेंगे। 40 व्यक्तियों को लाइसेंस निर्गत किए गए हैं। ये सभी दुकानें उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज के खेल मैदान में लगाई गई हैं। पटाखा कारोबारियों का कहना है कि वे पहले से ही मंदी की मार झेल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से उनका पुराना स्टाक अनुपयोगी हो गया है।
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पटाखे के कारोबार में पहले से ही 50 से 60 फीसद गिरावट की उम्मीद है। काशीपुर में बाजपुर रोड, कचनालगाजी और जसपुरखुर्द में पटाखे के थोक व्यापारी हैं। यहां पटाखे शिवकाशी से आते हैं। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले दो वर्षों में काशीपुर में पटाखों का कारोबार बुरी तरह पिछड़ा है।
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एहतियात के तौर पर दुुकानों पर पानी से भरे ड्रम रखे गए हैं। इस साल चकरी, मिट्टी के अनार, फूलजड़ी, स्काईशॉट की मांग ज्यादा है। ग्रीन पटाखों की बाध्यता से कारोबार प्रभावित हुआ है। प्रशासन की सख्ती के चलते रिटेल दुकानदार कम आवाज वाले पटाखों की मांग कर रहे हैं। मल्टी कलर रॉकेट की कीमत डेढ़ हजार रुपये तक हैं।
प्रदूषण मुक्त होते हैं ग्रीन पटाखे
काशीपुर। ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं लेकिन इनसे प्रदूषण काफी कम होता है। सामान्य पटाखों की तुलना में ये 40 से 50 प्रतिशत तक कम हानिकारक क्षमता की गैस उत्पन्न करते हैं। अमूमन सामान्य पटाखों से भारी मात्रा में नाइट्रोजन और सल्फर गैस उत्सर्जित होती है जो वातावरण को प्रदूषित करती है। इसके उलट ग्रीन पटाखों में प्रयुक्त होने वाले रसायनिक तत्व कम वोल्यूम के होते हैं।