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पूर्णागिरी जनशताब्दी एक्सप्रेस टनकपुर स्टेशन पहुंचने से पहले ही अचानक पीछे की और दौड़ पड़ी
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खटीमा में नदन्ना पुल के पास रुकी ट्रेन से उतरे यात्री।
- फोटो : KHATIMA
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खटीमा/टनकपुर। गाय से टकराने के बाद ट्रेन उल्टी होकर चलने लगी तो लोको पायलट ने सबसे पहले रेलवे अधिकारियों को सूचना दी। अधिकारियों ने ट्रेन रोकने के प्रयास करने के साथ सबसे पहले क्रासिंग पर पड़ने वाले फाटक बंद कराए क्योंकि अगर फाटक खुले होते और लोगों की आवाजाही हो रही होती तो कई लोग ट्रेन की चपेट में आ सकते थे। टनकपुर से खटीमा के बीच 24 किलोमीटर की दूरी में ट्रेन चार फाटक पार कर पांचवें फाटक के पास पहुंचने वाली थी, तभी उसे रोक लिया गया।
बुधवार को टनकपुर से जनशताब्दी एक्सप्रेस के वापस लौटने की घटना से टनकपुर से लेकर खटीमा तक अफरातफरी का माहौल रहा। इस बीच, टनकपुर, बनबसा से लेकर मेलाघाट रोड, लोहियाहेड रोड के फाटक तक बंद रहे और सभी जगह पर पुलिस तैनात रही। इस दौरान सभी फाटकों के पास खासा जाम लग गया। जाम में फंसे लोग भी ट्रेन में बैठे लोगों की सही सलामती की दुआ मांगते नजर आए। स्टेशन पर रेलवे कर्मचारी आला अधिकारियों की ओर से आने वाले निर्देशों का इंतजार कर रहे थे। नदन्ना पुल पर ट्रेन के रुकने की सूचना जब रेलवे अधिकारियों व अन्य लोगों को मिली तो सभी ने राहत की सांस ली। ट्रेन के रुकने पर रेलवे फाटक खुले और जाम में फंसे वाहनों को सामान्य होने में करीब पौन घंटा लगा।
इधर, स्टेशन अधीक्षक केडी कापड़ी ट्रेन के रुकते ही मौके पर पहुंचे। इस दौरान लोको पायलट मुबारक अली, सहचालक जितेंद्र कुमार, रेलवे के सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार मिश्रा, रेलवे टेक्नीशियन दिनेश कुमार, आरसी प्रसाद ने रुकी ट्रेन के प्रत्येक पहिए के आगे पत्थर और लकड़ी की गिट्टियों के साथ चेन लगाकर पुख्ता व्यवस्था की। स्टेशन अधीक्षक कापड़ी एवं रेलवे पुलिस ने ट्रेन में फंसे यात्रियों को उतारकर निजी व्यवस्था से उन्हें टनकपुर भेजा। ट्रेन के सकुशल रुकने एवं मार्ग में किसी प्रकार का हादसा नहीं होने पर आम जनता, यात्रियों एवं रेलवे विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। नदन्ना नहर के समीप लोगों का हुजूम लगा रहा। इस दौरान ट्रेन में फंसे सभी यात्री एक डिब्बे में एकत्रित मिले। टेक्नीशियन दिनेश कुमार ने बताया कि गाय के टकराने से इंजन के आगे लगा ब्रेक का प्रेशर पाइप फटने से ट्रेन के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया था। पीछे को ढलान होने की वजह से ट्रेन रुक नहीं पाई और पीछे की ओर दौड़ने लगी।
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ट्रेन में सवार यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सहम गए थे सभी
खटीमा। ट्रेन खटीमा, बनबसा पार करके टनकपुर पहुंचने वाली थी, इसी बीच ट्रेन को लौटता देख आसपास के लोग भी हैरान हो गए। ट्रेन के हॉर्न नहीं देने पर लोगों को किसी अनहोनी की आशंका हुई थी।
ट्रेन में बैठे यात्रियों में दहशत बनी रही
खटीमा। चंपावत निवासी सरस्वती देवी अपने बेटे के साथ दिल्ली से टनकपुर आ रही थी। अचानक ट्रेन रुकी और कुछ देर बाद धीरे-धीरे लौटने लगी। उन्हें हड़बड़ाहट में उतरने का मौका नहीं मिला और रेल तेजी से पीछे को चलने लगी।
- बरेली निवासी संध्या पाल अपने परिजनों के साथ पूर्णागिरि मां के दर्शन के लिए जा रहीं थीं। अचानक घटी इस घटना से सभी सहम गए। माता रानी की कृपा रही कि वापस भाग रही ट्रेन रुक गई और सभी यात्री सकुशल रहे।
- चंदोसी मुरादाबाद निवासी गुड्डू ने बताया कि वह परिवार के पांच सदस्यों के साथ टनकपुर, चंपावत घूमने जा रहे थे। अचानक गाय से टकराने के बाद ट्रेन के ब्रेक फेल हो गए और ट्रेन वापस भागने लगी। कुछ सूझ नहीं रहा था क्या करें।
ट्रेन में कितने यात्री थे ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है - जनसंपर्क अधिकारी
खटीमा। पूर्वोत्तर रेलवे इज्जत नगर के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि रेलवे प्रशासन के पास फिलहाल ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है कि ट्रेन में कितने यात्री थे। लेकिन सभी यात्री सुरक्षित है। इसकी पुख्ता जानकारी है।
चार साल पहले भी बगैर इंजन दौड़े थे मालगाड़ी के डिब्बे
टनकपुर (चंपावत)। करीब चार साल पहले भी टनकपुर से बगैैर इंजन मालगाड़ी के आठ डिब्बे अचानक दौड़ पड़े थे। तब भी बड़ा हादसा होने से बचा था। बगैर इंजन दौड़े मालगाड़ी के इन डिब्बों को खटीमा में छह लाइनें लदी डिपट्राली को अवरोधक बनाकर मालगाड़ी को रोका गया था। उस समय बनबसा के पास मालगाड़ी के डिब्बों की चपेट में छह बकरियां आ गईं थी, जबकि चकरपुर में ट्रेक पर खड़े एक ट्रैक्टर को डिब्बे घसीटकर खटीमा तक ले गए थे।
वर्ष 2017 की बात है जब पीलीभीत से टनकपुर तक बड़ी रेल लाइन बिछाने का काम चल रहा था। गिट्टी ले जाने के लिए टनकपुर स्टेशन में मालगाड़ी के आठ डिब्बे बगैर इंजन खड़े थे। जेसीबी मशीन से इन डिब्बों में गिट्टी लादी जा रही थी कि जेसीबी से लगे धक्के से मालगाड़ी के ये डिब्बे अचानक ट्रेक पर दौड़ पड़े। इससे रेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए थे। टनकपुर से बनबसा तक इन डिब्बों को रोकने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली थी। इसके बाद बनबसा स्टेशन से आगे बढ़ चुके डिब्बों को रोकने के लिए चकरपुर के पास लाइन पर एक ट्रैक्टर खड़ा किया गया, लेकिन तेज रफ्तार ये डिब्बे ट्रैक्टर को भी अपने साथ घसीट ले गए। तब तक खटीमा स्टेशन पर अवरोधक बना दिया गया था और इन डिपट्रॉलियों से टकराने के बाद ही डिब्बों को रोकने में सफलता मिल पाई थी। (संवाद)
मालगाड़ी के डिब्बे दौड़ने के बाद भी रेलवे विभाग नहीं रहा गंभीर
खटीमा। वर्ष 2017 में घटी मालगाड़ी के वापस लौटने की घटना को रेलवे विभाग ने गंभीरता से नहीं लिया। यदि तब नसीहत ली होती तो आज पूर्णागिरी जनशताब्दी एक्सप्रेस को गाय से टकराने के समय ही रोक लिया जाता। गनीमत यह रही कि 24 किमी दूरी तक रेल पटरी पर किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।
घटनाक्रम :
4:05 :- टनकपुर पहुंचने से पहले ही मनिहारगोठ स्थित होम सिग्नल के पास गाय ट्रेन से टकराई और ट्रेन रुक गई।
4:06 :- ट्रेन अचानक खटीमा की और लौटने लगी, ब्रेक फेल होने से ट्रेन रुकने के बजाय पीछे सरकने लगी।
4:07 :- ट्रेन की रफ्तर धीरे थी, लिहाजा 20 से 25 यात्री ट्रेन से उतर भी गए।
4:07 :- रेलवे के अधिकारियों ने बनबसा-खटीमा सहित मझोला, न्यूरिया, पीलीभीत स्टेशनों को सूचना दी।
4:08 :- आनन-फानन इस रूट के सारे फाटक बंद कर दिए गए।
4:09 :- सुरक्षा के नजरिए से सिविल पुलिस एवं रेलवे की टीम अलर्ट हो गईं।
4:11 :- पीछे को दौड़ रही ट्रेन को रोकने संबंधी प्रयास बनबसा, चकरपुर में कारगर साबित नहीं हुए।
4:16 :- 40 से 45 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से भाग रही ट्रेन की रफ्तार जगबुढ़ा पुल पर पहुंचते ही कम हुई।
4:28 :- नदन्ना नहर के पास रेलवे कर्मचारियों ने लाइन पर घास-फूस एवं लकड़ी के गुटके, ठोकरें लगाकर ट्रेन रुकवाई।
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बुधवार को टनकपुर से जनशताब्दी एक्सप्रेस के वापस लौटने की घटना से टनकपुर से लेकर खटीमा तक अफरातफरी का माहौल रहा। इस बीच, टनकपुर, बनबसा से लेकर मेलाघाट रोड, लोहियाहेड रोड के फाटक तक बंद रहे और सभी जगह पर पुलिस तैनात रही। इस दौरान सभी फाटकों के पास खासा जाम लग गया। जाम में फंसे लोग भी ट्रेन में बैठे लोगों की सही सलामती की दुआ मांगते नजर आए। स्टेशन पर रेलवे कर्मचारी आला अधिकारियों की ओर से आने वाले निर्देशों का इंतजार कर रहे थे। नदन्ना पुल पर ट्रेन के रुकने की सूचना जब रेलवे अधिकारियों व अन्य लोगों को मिली तो सभी ने राहत की सांस ली। ट्रेन के रुकने पर रेलवे फाटक खुले और जाम में फंसे वाहनों को सामान्य होने में करीब पौन घंटा लगा।
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इधर, स्टेशन अधीक्षक केडी कापड़ी ट्रेन के रुकते ही मौके पर पहुंचे। इस दौरान लोको पायलट मुबारक अली, सहचालक जितेंद्र कुमार, रेलवे के सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार मिश्रा, रेलवे टेक्नीशियन दिनेश कुमार, आरसी प्रसाद ने रुकी ट्रेन के प्रत्येक पहिए के आगे पत्थर और लकड़ी की गिट्टियों के साथ चेन लगाकर पुख्ता व्यवस्था की। स्टेशन अधीक्षक कापड़ी एवं रेलवे पुलिस ने ट्रेन में फंसे यात्रियों को उतारकर निजी व्यवस्था से उन्हें टनकपुर भेजा। ट्रेन के सकुशल रुकने एवं मार्ग में किसी प्रकार का हादसा नहीं होने पर आम जनता, यात्रियों एवं रेलवे विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। नदन्ना नहर के समीप लोगों का हुजूम लगा रहा। इस दौरान ट्रेन में फंसे सभी यात्री एक डिब्बे में एकत्रित मिले। टेक्नीशियन दिनेश कुमार ने बताया कि गाय के टकराने से इंजन के आगे लगा ब्रेक का प्रेशर पाइप फटने से ट्रेन के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया था। पीछे को ढलान होने की वजह से ट्रेन रुक नहीं पाई और पीछे की ओर दौड़ने लगी।
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ट्रेन में सवार यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सहम गए थे सभी
खटीमा। ट्रेन खटीमा, बनबसा पार करके टनकपुर पहुंचने वाली थी, इसी बीच ट्रेन को लौटता देख आसपास के लोग भी हैरान हो गए। ट्रेन के हॉर्न नहीं देने पर लोगों को किसी अनहोनी की आशंका हुई थी।
ट्रेन में बैठे यात्रियों में दहशत बनी रही
खटीमा। चंपावत निवासी सरस्वती देवी अपने बेटे के साथ दिल्ली से टनकपुर आ रही थी। अचानक ट्रेन रुकी और कुछ देर बाद धीरे-धीरे लौटने लगी। उन्हें हड़बड़ाहट में उतरने का मौका नहीं मिला और रेल तेजी से पीछे को चलने लगी।
- बरेली निवासी संध्या पाल अपने परिजनों के साथ पूर्णागिरि मां के दर्शन के लिए जा रहीं थीं। अचानक घटी इस घटना से सभी सहम गए। माता रानी की कृपा रही कि वापस भाग रही ट्रेन रुक गई और सभी यात्री सकुशल रहे।
- चंदोसी मुरादाबाद निवासी गुड्डू ने बताया कि वह परिवार के पांच सदस्यों के साथ टनकपुर, चंपावत घूमने जा रहे थे। अचानक गाय से टकराने के बाद ट्रेन के ब्रेक फेल हो गए और ट्रेन वापस भागने लगी। कुछ सूझ नहीं रहा था क्या करें।
ट्रेन में कितने यात्री थे ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है - जनसंपर्क अधिकारी
खटीमा। पूर्वोत्तर रेलवे इज्जत नगर के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि रेलवे प्रशासन के पास फिलहाल ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है कि ट्रेन में कितने यात्री थे। लेकिन सभी यात्री सुरक्षित है। इसकी पुख्ता जानकारी है।
चार साल पहले भी बगैर इंजन दौड़े थे मालगाड़ी के डिब्बे
टनकपुर (चंपावत)। करीब चार साल पहले भी टनकपुर से बगैैर इंजन मालगाड़ी के आठ डिब्बे अचानक दौड़ पड़े थे। तब भी बड़ा हादसा होने से बचा था। बगैर इंजन दौड़े मालगाड़ी के इन डिब्बों को खटीमा में छह लाइनें लदी डिपट्राली को अवरोधक बनाकर मालगाड़ी को रोका गया था। उस समय बनबसा के पास मालगाड़ी के डिब्बों की चपेट में छह बकरियां आ गईं थी, जबकि चकरपुर में ट्रेक पर खड़े एक ट्रैक्टर को डिब्बे घसीटकर खटीमा तक ले गए थे।
वर्ष 2017 की बात है जब पीलीभीत से टनकपुर तक बड़ी रेल लाइन बिछाने का काम चल रहा था। गिट्टी ले जाने के लिए टनकपुर स्टेशन में मालगाड़ी के आठ डिब्बे बगैर इंजन खड़े थे। जेसीबी मशीन से इन डिब्बों में गिट्टी लादी जा रही थी कि जेसीबी से लगे धक्के से मालगाड़ी के ये डिब्बे अचानक ट्रेक पर दौड़ पड़े। इससे रेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए थे। टनकपुर से बनबसा तक इन डिब्बों को रोकने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली थी। इसके बाद बनबसा स्टेशन से आगे बढ़ चुके डिब्बों को रोकने के लिए चकरपुर के पास लाइन पर एक ट्रैक्टर खड़ा किया गया, लेकिन तेज रफ्तार ये डिब्बे ट्रैक्टर को भी अपने साथ घसीट ले गए। तब तक खटीमा स्टेशन पर अवरोधक बना दिया गया था और इन डिपट्रॉलियों से टकराने के बाद ही डिब्बों को रोकने में सफलता मिल पाई थी। (संवाद)
मालगाड़ी के डिब्बे दौड़ने के बाद भी रेलवे विभाग नहीं रहा गंभीर
खटीमा। वर्ष 2017 में घटी मालगाड़ी के वापस लौटने की घटना को रेलवे विभाग ने गंभीरता से नहीं लिया। यदि तब नसीहत ली होती तो आज पूर्णागिरी जनशताब्दी एक्सप्रेस को गाय से टकराने के समय ही रोक लिया जाता। गनीमत यह रही कि 24 किमी दूरी तक रेल पटरी पर किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।
घटनाक्रम :
4:05 :- टनकपुर पहुंचने से पहले ही मनिहारगोठ स्थित होम सिग्नल के पास गाय ट्रेन से टकराई और ट्रेन रुक गई।
4:06 :- ट्रेन अचानक खटीमा की और लौटने लगी, ब्रेक फेल होने से ट्रेन रुकने के बजाय पीछे सरकने लगी।
4:07 :- ट्रेन की रफ्तर धीरे थी, लिहाजा 20 से 25 यात्री ट्रेन से उतर भी गए।
4:07 :- रेलवे के अधिकारियों ने बनबसा-खटीमा सहित मझोला, न्यूरिया, पीलीभीत स्टेशनों को सूचना दी।
4:08 :- आनन-फानन इस रूट के सारे फाटक बंद कर दिए गए।
4:09 :- सुरक्षा के नजरिए से सिविल पुलिस एवं रेलवे की टीम अलर्ट हो गईं।
4:11 :- पीछे को दौड़ रही ट्रेन को रोकने संबंधी प्रयास बनबसा, चकरपुर में कारगर साबित नहीं हुए।
4:16 :- 40 से 45 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से भाग रही ट्रेन की रफ्तार जगबुढ़ा पुल पर पहुंचते ही कम हुई।
4:28 :- नदन्ना नहर के पास रेलवे कर्मचारियों ने लाइन पर घास-फूस एवं लकड़ी के गुटके, ठोकरें लगाकर ट्रेन रुकवाई।