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आजीवन कारावास के सात और टर्मर के एक कैदी की सजा माफ
ब्यूरो/अमर उजाला, सितारगंज।
Updated Sun, 20 Aug 2017 12:32 AM IST
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जेल से कैदी रिहा
- फोटो : अमर उजाला
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सितारगंज। संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) और केंद्रीय कारागार के आठ कैदियों की सरकार ने सजा माफ कर दी है। इस आदेश के अनुपालन में जेल प्रशासन ने शनिवार को सभी आठ कैदियों को रिहा कर दिया। जेल से बाहर आते ही इन कैदियों की मारे खुशी के बांछें खिल गईं। सभी ने भगवान का शुक्रिया अदा किया। परिजनों से गले मिले। उनके खुशी के आंसू छलके।
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संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में कुआंखेड़ा थाना लक्सर जिला हरिद्वार निवासी सुरेंद्र सिंह (53) पुत्र वासी, रीठा साहिब थाना लोहाघाट जिला चंपावत निवासी ईश्वरी राम पुत्र जीतराम, डिगारा पट्टी बडारी जिला पिथौरागढ़ के किशन राम पुत्र मोतीराम, बस्तड़ी अस्कोट जिला पिथौरागढ़ निवासी पुष्कर दत्त भट्ट (54) पुत्र धर्मदत्त भट्ट, दुगेटी दुंथा पट्टी थाना सनदेव तहसील डीडीहाट जिला पिथौरागढ़ निवासी भूपेंद्र राम (49) पुत्र गोपाल राम, अधोईवाला रायपुर देहरादून निवासी रविकांत उपाध्याय (49) पुत्र श्रीनिवास उपाध्याय, सनपट्टी थाना कोटबांगर जिला टिहरी गढ़वाल निवासी माशांतु (47) पुत्र ज्ञान सिंह हत्या के दोष में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे थे।
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इनकी फाइलें शासन में सजा माफी के लिए गई हुई थीं। केंद्रीय कारागार में सात साल की सजा वाले जसपुर निवासी विजयपाल सिंह (75) पुत्र पूरन सिंह ने भी तीन साल तीन माह एक दिन की सजा काटने पर शासन में सजा माफी की गुहार लगाई थी। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राज्यपाल डॉ. केके पॉल ने 15 अगस्त को इन कैदियों की फाइलें स्वीकृत कर सचिवालय को रिहाई के आदेश जारी किए थे। शनिवार को आईजी कारागार डॉ. पीवीके प्रसाद का संपूर्णानंद शिविर जेल में आठ कैदियों को रिहा करने का आदेश पहुंचा। जिस पर जेल अधीक्षक टीडी जोशी ने उक्त सभी आठ कैदियों को रिहा कर दिया। रिहा कैदियों में खुली जेल के सातों कैदी 17 से 22 साल तक की सजा काट चुके हैं। उनकी रिहाई से परिजनों में खुशियों का माहौल है। रिहा कैदियों का कहना था कि जेल से छूटने के बाद बची जिंदगी वह परिवार के बीच रहकर समाज के हित में गुजारेंगे।
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किसने कितनी सजा भोगी
कैदी सजा की अवधि
हरिद्वार के सुरेंद्र सिंह 19 वर्ष 2 माह 24 दिन
रीठा साहिब के ईश्वरी राम 17 वर्ष 1 माह 5 दिन
डिगारा पट्टी पिथौरागढ़ के किशन राम 18 वर्ष 1 माह 28 दिन
बस्तड़ी पिथौरागढ़ के पुष्कर दत्त भट्ट 17 वर्ष 7 माह 14 दिन
डीडीहाट के भूपेंद्र राम 19 वर्ष 11 माह 15 दिन
रायपुर देहरादून रविकांत उपाध्याय 19 साल 3 माह 7 दिन
टिहरी गढ़वाल के माशांतु 22 वर्ष 10 माह 14 दिन
जसपुर के विजय पाल सिंह 03 वर्ष 3 माह 1 दिन
सरकार हमारी भी अंतिम इच्छा कर दो पूरी!
सितारगंज। संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में 27 बीमार बुजुर्ग कैदियों की रिहाई नहीं हो सकी। ये कैदी अपने किए की सजा भोगते 70 से लेकर 98 वर्ष के हो चुके हैं। इन कैदियों की सजा माफी की फाइलें शासन में धूल फांक रही हैं जबकि, ये कैदी सजा माफी के लायक भी हैं, क्योंकि, इनमें अधिकतर कैदी गंभीर रोगों से पीड़ित होने के कारण दैनिक क्रिया तक नहीं कर पाते। बस, दिल में आस है तो सिर्फ जेल से रिहा होकर परिवार के बीच जीवन बिताने की।
इन कैदियों से जब बात की गई तो उनका कहना था कि सरकार! हमारी अंतिम इच्छा मानकर हमारी भी रिहाई कर दे। संपूर्णानंद शिविर खुली जेल में 58 कैदी थे। जिनमें अब सिर्फ 51 ही रह गए हैं। ऐसे ही सेंट्रल जेल में 383 में से अब 382 कैदी सजा काट रहे हैं। 169 हवालाती भी रखे गए हैं। जेल सूत्रों की माने तो 27 ऐसे बुजुर्ग कैदी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं जो 15 साल से लेकर 22 साल तक सजा पूरी करने के साथ ही 70 से 98 साल तक के हो चुके हैं।
इनमें 11 कैदी गंभीर रोगों से पीड़ित हैं। जिनका हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज से लेकर दिल्ली के एम्स अस्पताल तक इलाज चल रहा है। अल्ली खां काशीपुर निवासी अमीर बख्श (72) पुत्र गरीबा, कचनाल गाजी काशीपुर का निर्मल सिंह (70) पुत्र जीत सिंह, टुकड़ी नानकमत्ता निवासी अवतार सिंह (98) पुत्र मगर सिंह, मसीत गदरपुर निवासी अनवार हुसैन (74) पुत्र अलताफ हुसैन, मदकोटा रुद्रपुर निवासी जीत सिंह (82) पुत्र चानन सिंह, सलमती नानकमत्ता के पहलवान सिंह (83) पुत्र भोला सिंह, ध्यानपुर नानकमत्ता के कश्मीर सिंह (71) पुत्र बचन सिंह ये सभी बीमार हैं और चल-फिर भी नहीं पाते। नारायणपुर देवरिया गदरपुर निवासी कुंदन सिंह (73) पुत्र मस्सा सिंह, सिसई बंडिया किच्छा निवासी याकूब अहमद (84) पुत्र मासूम अहमद हृदयाघात, लखनपुर नंधौर वैली जिला नैनीताल का गंगा सिंह (74) पुत्र खड़क पैरालाइसिस एवं बरखेड़ा पांडे काशीपुर निवासी भूरे (76) पुत्र घासी किडनी रोग से ग्रस्त है।
पिछले साल शासन द्वारा गठित प्रमुख सचिव गृह, सचिव न्याय एवं महानिरीक्षक कारागार की संयुक्त पुनरीक्षण कमेटी ने संपूर्णानंद जेल का निरीक्षण कर बीमार, बुजुर्ग, सदाचरण वाले कैदियों का सत्यापन किया था और रिपोर्ट शासन को दी दी थी। जेल प्रशासन द्वारा भी कई बार पर इन कैदियों को रिहा करने की संस्तुति कर रिपोर्ट आईजी कारागार को दी। सरकार ने इन सात कैदियों को रिहा तो कर दिया लेकिन, 27 कैदी अभी भी बीमारी से जूझते हुए रिहाई की आस में सांसें गिन रहे हैं।
सेंट्रल, खुली जेल में आजीवन कारावास की सजा भोग रहे 27 बीमार बुजुर्ग कैदियों की रिहाई की संस्तुति कर आईजी कारागार, शासन को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। शासन स्तर पर मामला लंबित है। इसकी वजह से ये कैदी रिहा नहीं हुए हैं। शासन ही इस पर निर्णय लेगा।
- टीडी जोशी, जेल अधीक्षक
संपूर्णानंद शिविर एवं केंद्रीय कारागार, सितारगंज (यूएस नगर)