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प्रिकाल के दो ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द, वाद भी दायर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Tue, 06 Sep 2016 11:39 PM IST
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श्रमिक
- फोटो : अमर उजाला
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अपने मांगों के लिए अनशन पर बैठे प्रिकाल श्रमिकों द्वारा कंपनी के ठेकेदारों पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने के बाद श्रम विभाग ने कंपनी के दो ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। साथ ही वाद भी दायर किया गया है। कांट्रेक्ट लेबर एक्ट का उल्लंघन करने पर प्रिकाल कंपनी के पंजीकरण प्रमाण पत्र को वापस लेने की अनुशंसा भी शासन को भेजी गई है।
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बता दें कि प्रिकाल कंपनी ने कुछ दिन पहले कंपनी के कुछ ठेका श्रमिकों को निकाल दिया था। श्रमिकों का आरोप था कि कांट्रेक्टर द्वारा उन्हें लोडिंग अनलोडिंग के लिए नियुक्त किया गया था, लेकिन कंपनी के भीतर उनसे उन कामों को लिया जा रहा है, जिनकी उन्हें जानकारी नहीं है। विरोध करने पर कांट्रेक्टर ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर उन्हें कंपनी से निकाल दिया। इसके बाद कई और श्रमिक भी निकाले गए श्रमिकों के समर्थन में आ गये। सभी ने कंपनी और ठेकेदारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रशासन ने श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया।
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जिसके बाद श्रमिकों ने आंदोलन को उग्र करते हुए इसे आमरण अनशन में बदल दिया। इससे प्रशासन के साथ ही ठेकेदारों के भी हाथ पांव फूल गए। श्रमिकों का अनशन तुड़वाने के लिए प्रशासन ने जोर जबरदस्ती का सहारा लिया। सोमवार को हुए घटनाक्रम में कई श्रमिक चोटिल हो गए। इसके बाद मामला श्रमायुक्त तक पहुंचा और कंपनी में निरीक्षण किया गया। इस दौरान श्रमिकों से लोडिंग अनलोडिंग की बजाय अन्य कामों को करवाने की पुष्टि हुई।
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श्रम विभाग ने कंपनी के दोनों ठेकेदारों का लाइसेंस रद्द करने के बाद उनके खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में कांट्रेक्ट लेबर एक्ट 1970 के तहत वाद दायर किया। साथ ही सहायक श्रमायुक्त उम्मेद सिंह चौहान के माध्यम से प्रिकाल कंपनी को जारी पंजीकरण प्रमाण पत्र को वापस करने की अनुशंसा भी शासन को भेजी गई है।
अमिता लोहनी ने की पुलिस अत्याचार की निंदा
राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अमिता लोहनी ने श्रम विभाग परिसर पहुंचकर अनशन पर बैठे प्रिकाल ठेका श्रमिकों से वार्ता की। लोहनी के अनुसार पुलिस प्रशासन ने धरने पर बैठी युवतियों के साथ अभद्रता करने के साथ ही अमानवीय हरकत की है। जिलाधिकारी के माध्यम से वह पूरे मामले की जांच करवाएंगी। जिस तरह से महिला श्रमिकों के साथ हाथापाई और छीनाझपटी की गई है। वह पूरी तरह से तानाशाही रवैया दर्शाता है। वह इस मामले का मुख्यमंत्री के समक्ष भी रखेंगी। श्रमिकों के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
श्रमिकों ने आंदोलन को किया और तेज
पुलिस और जिला प्रशासन के कठोर रवैये के बाद भी प्रिकाल ठेका श्रमिकों के आंदोलन को विराम नहीं दिया गया। पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हुई मारपीट के बाद मंगलवार को श्रमिकों ने आंदोलन को और अधिक तेज कर दिया है। सोमवार तक जहां छह लोग अनशन पर बैठे थे वहीं मंगलवार को पांच और लोगों के अनशन पर बैठने से अनशनकारियों की संख्या 11 पहुंच गई है। श्रमिकों का कहना है न्याय मिलने से पहले वह आंदोलन को खत्म नहीं करेंगे। वहीं आंदोलनरत श्रमिकों के समर्थन में कई फैक्ट्रियों के श्रमिकों ने भी उन्हें अपना समर्थन देने की घोषणा की है।
देर शाम को शहर में भी निकाला जुलूस
प्रिकाल के ठेका श्रमिकों के साथ सोमवार सुबह को हुई पुलिस और पीएसी सहित जिला प्रशासन के अधिकारी द्वारा हाथापाई और छीनाझपटी के विरोध में मंगलवार देर शाम को सिडकुल की विभिन्न कंपनियों के सैकड़ों श्रमिकों ने शहर में जुलूस निकाला। मुख्य बाजार से होते हुए श्रमिक मीरा मार्ग, भगत सिंह चौक, गोल मार्केट से होते हुए नैनीताल हाईवे पर करीब दो घंटे तक अपने आक्रोश को जताते रहे।