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Exclusive: पौधों को जीवित रखने में मददगार बनेंगे गोबर से बने गमले, वैज्ञानिकों ने ईजाद की तकनीक; ये है खासियत

Thu, 03 Apr 2025 12:53 PM IST
हीरा मेहरा सुरेंद्र कुमार वर्मा, संवाद
सुरेंद्र कुमार वर्मा, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 03 Apr 2025 12:53 PM IST
सार

पंतनगर विवि के वैज्ञानिकों ने गाय के गोबर और कंपोस्ट में कंपोनेंट मिलाकर ईको फ्रेंडली बायोडिग्रेडेबल गमले बनाने की तकनीक ईजाद की है। इस तकनीक का पेटेंट भी हासिल हो गया है।

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Pots made of cow dung will be helpful in keeping the plants alive in pantnagar
गोबर के गमले - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि पंतनगर के वैज्ञानिकों ने गाय के गोबर और कंपोस्ट में कंपोनेंट मिलाकर ईको फ्रेंडली बायोडिग्रेडेबल गमले बनाने की तकनीक ईजाद की है। इसमें जड़ों का समुचित विकास के साथ ही नमी संरक्षण और संचयन भी होता है। पौधों के समुचित विकास के लिए आवश्यक 16 पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में निरंतर मिलते रहते हैं। दावा है कि इससे पौधे 100 प्रतिशत जीवित रहते हैं। इस तकनीक का पेटेंट भी हासिल हो गया है। कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक डाॅ. जीके द्विवेदी, डाॅ. अविनाश मिश्रा और डाॅ. मधु द्विवेदी ने बताया कि बहुत हल्के होने से गमले के ट्रांसपोर्टेशन में टूट-फूट का खतरा नहीं रहता है।

 

ये खासियत भी है इन गमलों की

- बल और दबाव सहने की क्षमता अधिक होती है।

- 26.22 किलो भार सहन कर सकते हैं।

- भंडारण में इनसे दुर्गंध नहीं आती है

- बरसात में इनमें मोल्ड और फंफूद भी नहीं लगती।

- इनकी सरंध्रता और पारगम्यता बहुत अच्छी है।

- वायु और जल का अंतः और बाह्य आवागमन, जल अवशोषण व धारण क्षमता 65-70 प्रतिशत आंकी गई है।

गमलों से भूमि संरक्षण भी
भूमि पर गोबर गमलों का निघटन बहुत धीमे होता है। इससे विघटन के दौरान भूमि से कार्बन डाई ऑक्साइड की वायुमंडल में हानि 60 दिन में बहुत ही कम मात्रा 0.541 प्रतिशत होती है। इससे भूमि में जैविक पदार्थों की मात्रा में काफी वृद्धि होती है, जो भूमि पर सक्रिय और स्थायी कार्बन पूल और भंडार को बढ़ाता है। इन गमलों को भूमि पर रखने से मृदा में सूक्ष्म जीवाणुओं की काफी वृद्धि पाई गई। गोबर के गमलों का पीएच मान 7.5-8.0 के बीच, कार्बन नाइट्रोजन का अनुपात 25ः45 के साथ नाइट्रोजन (0.75-0.87 प्रतिशत), फॉस्फोरस (0.54-0.65 प्रतिशत) पोटेशियम (0.7-08 प्रतिशत), कैल्शियम (1.25-1.75 प्रतिशत), मैग्नीशियम(0.5-0.64 प्रतिशत), लोहा (0-357), मैगनीज (0.487), जिंक (0.018) और तांबा (0.015 पीपीएम) प्रचुर मात्रा में मिलते रहते हैं। संवाद

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गाय के गोबर से निर्मित गमले काफी हद तक कारगर साबित हुए हैं। इन्हें पौधरोपण कार्यक्रमों में अपनाया जा सकता है। साथ ही यह ग्रामीण रोजगार, डेयरी और नर्सरी उद्योग में काफी उपयोगी सिद्ध होगा। इससे हरियाली का क्षेत्र बढ़ेगा, जल संरक्षण और भू-सरंक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। - डाॅ. मनमोहन सिंह चौहान, कुलपति पंत विवि।

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