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Udham Singh Nagar News: सितारगंज की जायडस वेलनेस कंपनी में घोषित बंदी अवैध करार
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रुद्रपुर। सितारगंज में जायडस वेलनेस कंपनी की बंदी को शासन ने अवैध करार दिया है। इस संबंध में श्रम सचिव ने आदेश जारी किया है जिसके बाद अब आंदोलित श्रमिकों को वेतन लाभ के साथ ही कंपनी में लगे ताले खुलने के आसार नजर आ रहे हैं। हालांकि श्रम सचिव के आदेश के बाद श्रम अधिकारी नियमानुसार कार्यवाही करने की बात कह रहे हैं।
दरअसल सिडकुल औद्योगिक संस्थान में स्थित जायडस वेलनेस प्रोडक्ट्स लिमिटेड के प्लांट को प्रबंधन ने 18 जून से बंद कर दिया था। प्रबंधन ने बंदी की वजह कच्चे माल की कीमतों में इजाफा और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की वजह से हो रहे आर्थिक नुकसान को बताया था। बिना किसी पूर्व सूचना के कंपनी बंद करने से डेढ़ सौ स्थायी और सैकड़ों अस्थायी कर्मचारी बेरोजगार हो गए थे।
फैक्टरी की बंदी को अवैध करार देते हुए कर्मचारी आंदोलनरत हैं। कर्मचारियों ने बंदी को गलत बताते हुए श्रम विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा था लेकिन कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं होने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। श्रम विभाग की ओर से तय समय के बाद भी जवाब दाखिल नहीं होने पर कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दाखिल की थी।
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बीते 30 नवंबर को कर्मचारियों ने बंदी वापस लेने के खिलाफ आंदोलन भी किया था। जिसके बाद श्रम सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने कंपनी की बंदी को उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 (उत्तराखंड राज्य में यथावृत्त) की धारा 6डब्ल्यू और 6वी का उल्लंघन माना है। उन्होंने आदेश जारी कर बंदी को अविधिक करार दिया है।
उपश्रमायुक्त विपिन कुमार ने बताया कि कंपनी की बंदी को अवैध घोषित कर दिया गया है। अब पीड़ित पक्ष की ओर से प्रत्यावेदन मिलने के बाद नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। इधर कंपनी की बंदी अवैध घोषित करने के बाद आंदोलित कर्मचारियों में फैक्टरी खुलने की आस जग रही है।
उपनेता प्रतिपक्ष और हल्द्वानी विधायक का मिला सहयोग
जायडस कंपनी के श्रमिक शनिवार को 169वें दिन भी फैक्टरी गेट पर बेमियादी धरने डटे रहे। श्रमिकों ने कहा कि देहरादून में विधानसभा कूच सफल रहा। उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने जायडस कर्मचारियों की आवाज को विधानसभा सत्र में उठाया जिसका संज्ञान लेते हुए फैसला कर्मचारियों के हक में आया है। श्रमिकों ने दोनों नेताओं का आभार जताया।
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दरअसल सिडकुल औद्योगिक संस्थान में स्थित जायडस वेलनेस प्रोडक्ट्स लिमिटेड के प्लांट को प्रबंधन ने 18 जून से बंद कर दिया था। प्रबंधन ने बंदी की वजह कच्चे माल की कीमतों में इजाफा और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की वजह से हो रहे आर्थिक नुकसान को बताया था। बिना किसी पूर्व सूचना के कंपनी बंद करने से डेढ़ सौ स्थायी और सैकड़ों अस्थायी कर्मचारी बेरोजगार हो गए थे।
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फैक्टरी की बंदी को अवैध करार देते हुए कर्मचारी आंदोलनरत हैं। कर्मचारियों ने बंदी को गलत बताते हुए श्रम विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा था लेकिन कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं होने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। श्रम विभाग की ओर से तय समय के बाद भी जवाब दाखिल नहीं होने पर कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दाखिल की थी।
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बीते 30 नवंबर को कर्मचारियों ने बंदी वापस लेने के खिलाफ आंदोलन भी किया था। जिसके बाद श्रम सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने कंपनी की बंदी को उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 (उत्तराखंड राज्य में यथावृत्त) की धारा 6डब्ल्यू और 6वी का उल्लंघन माना है। उन्होंने आदेश जारी कर बंदी को अविधिक करार दिया है।
उपश्रमायुक्त विपिन कुमार ने बताया कि कंपनी की बंदी को अवैध घोषित कर दिया गया है। अब पीड़ित पक्ष की ओर से प्रत्यावेदन मिलने के बाद नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। इधर कंपनी की बंदी अवैध घोषित करने के बाद आंदोलित कर्मचारियों में फैक्टरी खुलने की आस जग रही है।
उपनेता प्रतिपक्ष और हल्द्वानी विधायक का मिला सहयोग
जायडस कंपनी के श्रमिक शनिवार को 169वें दिन भी फैक्टरी गेट पर बेमियादी धरने डटे रहे। श्रमिकों ने कहा कि देहरादून में विधानसभा कूच सफल रहा। उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने जायडस कर्मचारियों की आवाज को विधानसभा सत्र में उठाया जिसका संज्ञान लेते हुए फैसला कर्मचारियों के हक में आया है। श्रमिकों ने दोनों नेताओं का आभार जताया।