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चुनाव में दिखते और गायब होते हैं कई दल
चंदन बंगारी/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Thu, 02 Feb 2017 11:10 PM IST
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चुनावी समर में कई ऐसे दल भी कूद पड़ते हैं जो क्षेत्र के लोगों के लिए नए होते हैं। हालांकि ऐसे दलों से चुनाव लड़ने वाले स्थानीय चेहरों से कई लोग वाफिक भी रहते हैं, लेकिन ये दल चुनाव में कुछ हजार वोटों में सिमटने के बाद अचानक गायब हो जाते हैं। हर चुनाव में नए ही दल मैदान में दिखाई देते हैं। पिछले चार चुनावों में कई दलों की स्थिति आया राम, गया राम जैसी रही है।
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उत्तराखंड गठन के बाद हुए पहले चुनाव पर नजर डालें तो काशीपुर विधानसभा में 15 दावेदारों ने किस्मत आजमाई थीं। इनमें बड़ी पार्टियों के अलावा लोक जनशक्ति पार्टी, शिवसेना, राष्ट्रीय क्रांति पार्टी, समता पार्टी, समाजवादी जनता पार्टी भी शामिल थी, लेकिन इन दलों के प्रत्याशियों की हालत ऐसी रही कि कोई भी जमानत तक नहीं बचा सके। वर्ष 2007 के चुनाव में क्षेत्रीय पार्टी यूकेडी, शिवसेना, आरएलडी, इंडियन जस्टिस पार्टी, जन मोर्चा के उम्मीदवार भी मैदान में थे। पिछले चुनाव की तरह ये भी जमानत बचाने में कामयाब नहीं हो सके।
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वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा के अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस, मुस्लिम केरला स्टेट कमेटी, आरएलडी, शिवसेना, इंडियन जस्टिस पार्टी के अलावा उत्तराखंड रक्ष मोर्चा के प्रत्याशी भी मैदान में उतरे थे। इस चुनाव में रक्षा मोर्चा के प्रत्याशी ने 3667 वोटों के साथ चौथा स्थान हासिल कर सबको चौंका दिया था। वहीं छोटे दलों के प्रत्याशी जमानत नहीं बचा सके थे। इस बार के चुनाव में भी बड़े राष्ट्रीय दलों के साथ ही यूकेडी, राष्ट्रीय लोक दल, पीस पार्टी और यूकेडी डेमोक्रेटिक दल के उम्मीदवार मैदान में हैं। प्रत्याशी के नाम वापस लेने की वजह से समाजवादी पार्टी मैदान से बाहर हो चुकी है। अब देखना है कि जनता छोटे दलों के प्रत्याशियों पर कितना भरोसा कर पाती है।
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हर चुनाव में घट रहे प्रत्याशी
चुनाव के प्रति नेताओं की दिलचस्पी कम हो रही है। पिछले चार चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2002 में हुए चुनाव में काशीपुर सीट पर 15 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। वर्ष 2007 में प्रत्याशियों की संख्या जस की तस रही थी। वर्ष 2012 के चुनाव में ये संख्या 14 हो गई थी और इस चुनाव में प्रत्याशियों की संख्या 11 ही है।