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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Udham Singh Nagar News ›   Poison of factories dissolved in drinking water

पेयजल में भी घुल रहा फैक्ट्रियों का जहर

Thu, 15 Mar 2018 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो सितारगंज।
अमर उजाला ब्यूरो सितारगंज। Updated Thu, 15 Mar 2018 12:39 AM IST
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 स्थानीय सिद्ध गर्ब्यांग में छह माह से फैक्ट्रियों की काली राख उड़ना और प्रदूषित पानी का बहना बदस्तूर जारी है। अब तो पीने के पानी में भी फैक्ट्रियों का जहर घुल रहा है। इंडिया मार्का हैंडपंपों व नलों से भी विषैला पानी निकल रहा है। बुधवार को गांव वालों ने प्रदर्शन कर आक्रोश जताया। कहा एनजीटी में मामला दर्ज हो गया है। 

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पिथौरागढ़ के धारचूला ब्लॉक के 250 परिवारों को शासन ने साल 2000 में सिद्ध गर्ब्यांग में बसाया था। 2005 में यहां एल्डिको सिडकुल की स्थापना से आसपास करीब 100 फैक्ट्रियां लग गईं। इन फैक्ट्रियों का गंदा पानी ट्रीट करने के लिए एल्डिको ने जिंदल कंपनी के सहयोग 2012 में चार एमएलडी का कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगा दिया लेकिन यह प्लांट भी इन कंपनियों के जहरीले पानी को ट्रीट करने में नाकाफी साबित हो रहा है।
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 अक्टूबर 2017 से इन कंपनियों की चिमनियों से काली राख उड़ने का मामला सामने आने लगा। धीरे-धीरे राख सिद्ध गर्ब्यांग की आबादी तक पहुंच गई। नौ दिसंबर को ग्रामीणों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया। सुनवाई न होने पर दस दिन बाद ग्रामीण तहसील पहुंचे। 20 दिसंबर को कुमाऊं कमिश्नर ने डीएम और छह जनवरी को अनुसूचित जनजाति आयोग के सचिव ने पीसीबी को कार्रवाई के लिए लिखा।
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पीसीबी सदस्य/सचिव ने 26 जनवरी को क्षेत्रीय अधिकारी को कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 27 जनवरी को एससी/एसटी आयोग के अध्यक्ष नृप सिंह नपल्च्याल ने पीसीबी को मामले में कार्रवाई के आदेश दिए। इन सबके बावजूद धरातल पर स्थिति जस की तस है। फैक्ट्रियों का जहरीला पानी गांव के पास जमा हो रहा है। गांव में दुर्गंध फैलने के साथ पर्यावरण को क्षति हो रही है। गांव के नलों व हैंडपंपों में आने वाला पानी भी विषैला हो गया है। उन्होंने पीसीबी की कार्रवाई को पानी की सेंपलिंग तक ही सीमित बताया।


एनजीटी की कार्रवाई पर जताया हर्ष
सितारगंज में ग्रामीणों ने बताया कि 19 फरवरी को सिद्ध गर्ब्यांग कल्याण सेवा समिति के नेतृत्व में उन्होंने एनजीटी के जस्टिस आरएस राठौर को चिट्ठी लिखी थी। मामले में दो अप्रैल को सुनवाई की तिथि तय हुई है। इसका ग्रामीण स्वागत करते हैं। कहा कि वह उद्योगों का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि पर्यावरण को दूषित होने से रोकने और गांव में जहरीले पानी से होने वाली संभावित संक्रामक बीमारियों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।


धन्यवाद! अमर उजाला
सितारगंज में सिद्ध गर्ब्यांग में प्रदूषण मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से समय-समय पर प्रकाशित किया। जिसके लिए गांव के लोगों ने बुधवार को प्रदर्शन के बाद अमर उजाला का धन्यवाद किया। कहा कि विस्थापित 250 परिवारों की आवाज को सिर्फ अमर उजाला ने ही बुलंद किया। 

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