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पिरूल से बनेगी बायोडिग्रेडेबल पॉलीथिन: वनाग्नि के कारक चीड़ की पत्तियों से बनाई जाएगी पारदर्शी पैकेजिंग फिल्म

Mon, 17 Feb 2025 11:31 AM IST
हीरा मेहरा सुरेंद्र कुमार वर्मा, संवाद
सुरेंद्र कुमार वर्मा, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Mon, 17 Feb 2025 11:31 AM IST
सार

पिरूल अब खाद्य पदार्थों की पैकिंग में काम आएगा। जीबी पंत कृषि और प्रौद्योगिक विवि के वैज्ञानिकों ने पिरूल से पारदर्शी पैकेजिंग फिल्म बनाने की तकनीक विकसित कर ली है। जो बायोडिग्रेडेबल है और भविष्य में पाॅलिथीन का बेहतर विकल्प बन सकती है।

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Pantnagar News: Biodegradable polythene will be made from Pirul
पिरूल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पहाड़ों में वनाग्नि का कारण बन रहा पिरूल (चीड़ की पत्तियां) अब खाद्य पदार्थों की पैकिंग में काम आएगा। जीबी पंत कृषि और प्रौद्योगिक विवि के वैज्ञानिकों ने पिरूल से पारदर्शी पैकेजिंग फिल्म बनाने की तकनीक विकसित कर ली है। जो बायोडिग्रेडेबल है और भविष्य में पाॅलिथीन का बेहतर विकल्प बन सकती है।

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प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में फूड एंड प्रोसेसिंग विभाग के प्राध्यापक डॉ. पीके ओमरे ने बताया कि तकनीक में पिरूल से फाइबर और सेल्युलोज निकाला गया, जिसमें पाॅलीविनाइल अल्कोहल (पीएलए) मिश्रण का उपयोग करके बायोडिग्रेडेबल फिल्में बनाने की एक नई प्रक्रिया विकसित की है। सेल्युलोज फाइबर को अलग करने के लिए व्यवस्थित प्रक्रिया का पालन करते हुए पिरूल फाइबर का निष्कर्षण किया गया था।

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शुरू में कच्ची पिरूल की पत्तियों को विली मिल का उपयोग करके बारीक पीस लिया गया और अलग-अलग आकार की जाली में छान लिया गया। मोम और अशुद्धियों को खत्म करने के लिए पाउडर सामग्री को सॉक्सलेट डी-वैक्सिंग से गुजारा गया। इसके बाद निस्पंदन और सुखाया गया। फिर ब्लीचिंग के लिए गर्म पानी में उपचार को नियोजित किया गया। जबकि क्षार उपचार ने हेमिकेलुलोज को हटाने की प्रक्रिया पूरी की। इसके अलावा ब्लीचिंग से लिग्निन को भी खत्म करने में मदद मिली, जिससे शुद्ध चीड़ फाइबर प्राप्त हुए, जो सिंथेटिक सामग्री के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में टिकाऊ बायोकंपोजिट के लिए महत्वपूर्ण क्षमता रखते हैं। संवाद

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दो किग्रा वजन क्षमता और 9-12 दिन में होगी विघटित
डाॅ. ओमरे के दिशा निर्देश में तकनीक विकसित करने वाली शोधार्थी श्रीजया शिवदास ने बताया कि बायोडिग्रेडेबल फिल्म का निर्माण विलायक कास्टिंग विधि का उपयोग करके किया गया है। एक समरूप मिश्रण बनाने के लिए स्टार्च और पीवीए को मिश्रित कर दिया गया, जिसमें निकाले गए चीड़ फाइबर को शामिल किया गया। फिर लचीलेपन को बढ़ाने के लिए एक प्लास्टिसाइजर जोड़ा गया और एक पतली फिल्म बनाने के लिए गर्म हवा वाले ओवन में सूखने से पहले घोल को सिलिकॉन मोल्ड की सतह पर डाला गया।

 

अंतिम उत्पाद का मूल्यांकन मोटाई, तन्य शक्ति, पानी में घुलनशीलता और बायोडिग्रेडेबिलिटी के लिए किया गया। यह बायोडिग्रेडेबल फिल्म 1-2 किलोग्राम वजन सहन कर सकती है और 9-12 दिनों के भीतर मिट्टी में पूरी तरह से विघटित हो जाती है।

 

पारंपरिक प्लास्टिक फिल्मों के लिए पर्यावरण के अनुकूल विकल्प पेश करते हुए इन फिल्मों में टिकाऊ पैकेजिंग और पर्यावरण संरक्षण में आशाजनक अनुप्रयोग हैं। यह प्लास्टिक कचरे और प्रदूषण को भी काफी कम कर सकते हैं। समाजहित में इस खोज के लिए एडवाइजर डाॅ. पीके ओमरे और सदस्यों डाॅ. टीपी सिंह, डाॅ. एनसी शाही व डाॅ. अनिल कुमार सहित शोधार्थी श्रीजया शिवदास को बहुत बधाई। -डाॅ. मनमोहन सिंह चौहान, कुलपति, जीबी पंत कृषि और प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय।

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