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झुलसे फैक्टरी कर्मी की मौत, परिजनों ने फैक्टरी गेट पर शव रखकर लगाया जाम

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 11 Sep 2022 11:55 PM IST
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Others. - फोटो : KASHIPUR
काशीपुर। फैक्टरी के बायलर में एसिड डालते समय गंभीर रूप से झुलसे श्रमिक की दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक के परिजन उसका शव लेकर महुआखेड़ागंज फैक्टरी प्रबंधन से वार्ता के लिए पहुंचे लेकिन वार्ता के विफल होने पर गुस्साए लोगों ने पहले अलीगंज रोड और बाद में फैक्टरी के सामने शव रखकर जाम लगा दिया। सूचना पर सीओ समेत पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची लेकिन प्रदर्शनकारी फैक्टरी मालिक को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़े रहे। देर रात दोनों पक्षों में समझौता होने के बाद परिजन शव लेकर चले गए।
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ग्राम कल्याणपुर थाना भगतपुर जिला मुरादाबाद निवासी बाबूराम (40) पुत्र राम सिंह महुआखेड़ागंज स्थित रबर, टायर बनाने वाली फैक्टरी में काम करता था। तीन सितंबर को बॉयलर में एसिड डालते समय बाबूराम गंभीर रूप से झुलस गया था। उसे पाकवाड़ा स्थित टीएमयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गंभीर हालत होने पर उसे दिल्ली रेफर कर दिया गया था जहां शनिवार को उसकी मौत हो गई।
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परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद से फैक्टरी प्रबंधन ने उसकी कोई सुध नहीं ली। रविवार को परिजन एंबुलेंस से बाबूराम का शव लेकर महुआखेड़ागंज स्थित फैक्टरी पहुंच गए। उन्होंने फैक्टरी के प्रबंधन से मुआवजे के संबंध में वार्ता की लेकिन वह मांग के मुताबिक मुआवजा देने को राजी नहीं हुए। परिजनों ने फैक्टरी प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पैगा पुलिस से शिकायत की।
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इसी दौरान ग्रामीणों ने अलीगंज रोड पर जाम लगा दिया जिससे यातायात बाधित हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जाम खुलवा दिया। कुछ देर बाद ग्रामीणों ने फैक्टरी गेट पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंचे आईटीआई थाना प्रभारी आशुतोष कुमार सिंह, चौकी प्रभारी विजय गुसाईं ने लोगों को समझाने का प्रयास किया लेकिन वे फैक्टरी मालिक को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़े रहे।

हंगामे की सूचना पर सीओ वंदना वर्मा भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने भी प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। देर रात तक लोग मृतक आश्रितों को मुआवजे की मांग के लिए फैक्टरी गेट पर डटे रहे। बाद में प्रबंधन ने पीड़ित परिवार की मांगें मान लीं। सीओ वंदना वर्मा ने बताया कि वार्ता में फैक्टरी प्रबंधन ने परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी देने, ईएसआई से मिलने वाली प्रतिपूर्ति के अलावा प्रबंधन की और से आर्थिक सहायता दिए जाने पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई। इसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया है।
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