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नायब तहसीलदार पर 25 हजार का जुर्माना
ब्यूूराे, अमर उजाला, गदरपुर।
Updated Tue, 28 Jul 2015 02:02 AM IST
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आरटीआई के तहत आवेदक को सूचना देने में लापरवाही बरतना लोक सूचना अधिकारी/नायब तहसीलदार को भारी पड़ गया। असंतुष्ट आवेदक द्वारा की गई द्वितीय अपील में उत्तराखंड सूचना आयोग ने लोक सूचना अधिकारी/नायब तहसीलदार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
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वार्ड नंबर छह निवासी मोहम्मद यूनुस उस्मानी ने 14 मई 2014 को तहसील मुख्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत 7 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी।
तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी/नायब तहसीलदार ने 7 बिंदुओं पर मांगी गई सूचना उपलब्ध कराई, लेकिन मो. युनूस उस्मानी ने सूचनाओं से असंतुष्ट होकर 15 दिसंबर 2014 को प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर की। अपीलीय अधिकारी के आदेश से भी संतुष्ट न होकर उस्मानी ने 6 फरवरी 2015 को द्वितीय अपील उत्तराखंड सूचना आयोग में दर्ज करायी।
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आयोग के राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल द्वारा 13 अप्रैल 2015 को अपील की सुनवाई करते हुए संबंधित पत्रावली एवं कार्यवाही के भाग का अवलोकन करने के बाद पाया कि लोक सूचना अधिकारी/नायब तहसीलदार ने सूचना का अधिकार विषय को बेहद हल्के से लिया।
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जिसपर आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर आवेदक को 15 दिन के भीतर मांगी गई सूचनाऐं देने का आदेश दिया था। 12 मई 2015 को स्पष्टीकरण सहित आयोग के समक्ष उपस्थित होने को भी कहा गया था, लेकिन निर्धरित तिथि पर लोक सूचना अधिकारी/नायब तहसीलदार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नही थे।
सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल ने आयोग के अलावा जिलाधिकारी के भी आदेश पर गंभीरता न दिखाने पर स्थिति को गंभीर मानते हुए लोक सूचना अधिकारी/नायब तहसीलदार पर 250 रुपये प्रतिदिन की दर से अधिकतम 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया।
डीएम को नायब तहसीलदार के जून और जुलाई के वेतन से दो समान किस्तों में काटकर राजस्व खाते में जमा कराने के निर्देश दिए। साथ ही प्रशासनिक कार्रवाई को भी कहा।