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Udham Singh Nagar News: नैनो तकनीक से उगाया 35% ज्यादा आयरन वाला मशरूम
Thu, 11 Dec 2025 12:56 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 11 Dec 2025 12:56 AM IST
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पंतनगर। कुपोषण से जूझती दुनिया के लिए जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय ने एक नई उम्मीद जगाई है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने आयरन नैनोकणों का उपयोग करके शिटाके मशरूम में 35 प्रतिशत अधिक आयरन जोड़ने की अनोखी तकनीक विकसित की है। इस नैनो-बायोफोर्टिफिकेशन विधि से ऊतकों में आयरन का प्रवाह कर ज्यादा पोषक मशरूम तैयार किया गया है। इस तकनीक का पेटेंट भी फाइल किया जा चुका है।
शिटाके मशरूम (लेंटिनुला इडाॅडस) को सबसे मूल्यवान औषधीय और खाद्य कवक माना जाता है। यह दुनिया भर में दूसरा सबसे अधिक उत्पादित मशरूम है। इसका स्वाद, पोषण और औषधीय गुण इसे सुपरफूड का दर्जा दिलाते हैं। पोषण और औषधीय सुपरफूड के रूप में बढ़ती लोकप्रियता की वजह से इसकी वैश्विक बाजार में भारी मांग है। खाद्य और फार्मा उद्योगों में इसकी जरूरत लगातार बढ़ रही है।
इस खास मशरूम में आवश्यक अमीनो अम्ल, फाइबर, विटामिन-बी, खनिज व लेंटिनान और एरिटाडेनिन जैसे विशिष्ट जैव सक्रिय तत्व पाए जाते हैं। जापान और चीन के घने जंगलों में ओक की लकड़ियों पर पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली यह प्रजाति लगभग एक हजार वर्ष पूर्व से जीवन अमृत के रूप में जानी जाती रही है। अब भारतीय वैज्ञानिकों ने तकनीकी नवाचार की मदद से शिटाके को वैश्विक बाजार में नई पहचान दी है।
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ऐसे तैयार हुआ खास मशरूम
यह शोध मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एवं जेनेटिक इंजीनियरिंग विभाग में डाॅ. अरुणा परिहार ने डॉ. संदीप अरोड़ा और डॉ. केपीएस कुशवाहा के मार्गदर्शन में किया है। अनुकूलित नैनो-बायोफोर्टिफिकेशन तकनीक से उन्होंने शिटाके में आयरन की मात्रा को लगभग 35 फीसदी तक बढ़ाने में सफलता हासिल की है, वह भी बिना किसी विषाक्त प्रभाव या गुणवत्ता में कमी के। यह नैनो स्तर के कण माइसीलियम के साथ प्रभावी रूप से आंतरिक क्रिया कर पोषक तत्व अवशोषण मार्गों को मजबूत करते हैं।
शिटाके के औषधीय गुण
-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला
-कैंसररोधी तत्वों से भरपूर
-सूजन कम करने में सहायक
-कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में उपयोगी
कोट...
विश्व में दो अरब से अधिक लोग सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से प्रभावित हैं। इनमें सबसे अधिक लौह तत्व की कमी है जिससे एनीमिया, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी और विकास संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अधिक आयरन वाला बायोफोर्टिफाइड शिटाके कुपोषण से लड़ने में एक टिकाऊ विकल्प है। -डाॅ. संदीप अरोड़ा, मशरूम विज्ञान विशेषज्ञ, जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर
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शिटाके मशरूम (लेंटिनुला इडाॅडस) को सबसे मूल्यवान औषधीय और खाद्य कवक माना जाता है। यह दुनिया भर में दूसरा सबसे अधिक उत्पादित मशरूम है। इसका स्वाद, पोषण और औषधीय गुण इसे सुपरफूड का दर्जा दिलाते हैं। पोषण और औषधीय सुपरफूड के रूप में बढ़ती लोकप्रियता की वजह से इसकी वैश्विक बाजार में भारी मांग है। खाद्य और फार्मा उद्योगों में इसकी जरूरत लगातार बढ़ रही है।
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इस खास मशरूम में आवश्यक अमीनो अम्ल, फाइबर, विटामिन-बी, खनिज व लेंटिनान और एरिटाडेनिन जैसे विशिष्ट जैव सक्रिय तत्व पाए जाते हैं। जापान और चीन के घने जंगलों में ओक की लकड़ियों पर पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली यह प्रजाति लगभग एक हजार वर्ष पूर्व से जीवन अमृत के रूप में जानी जाती रही है। अब भारतीय वैज्ञानिकों ने तकनीकी नवाचार की मदद से शिटाके को वैश्विक बाजार में नई पहचान दी है।
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ऐसे तैयार हुआ खास मशरूम
यह शोध मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एवं जेनेटिक इंजीनियरिंग विभाग में डाॅ. अरुणा परिहार ने डॉ. संदीप अरोड़ा और डॉ. केपीएस कुशवाहा के मार्गदर्शन में किया है। अनुकूलित नैनो-बायोफोर्टिफिकेशन तकनीक से उन्होंने शिटाके में आयरन की मात्रा को लगभग 35 फीसदी तक बढ़ाने में सफलता हासिल की है, वह भी बिना किसी विषाक्त प्रभाव या गुणवत्ता में कमी के। यह नैनो स्तर के कण माइसीलियम के साथ प्रभावी रूप से आंतरिक क्रिया कर पोषक तत्व अवशोषण मार्गों को मजबूत करते हैं।
शिटाके के औषधीय गुण
-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला
-कैंसररोधी तत्वों से भरपूर
-सूजन कम करने में सहायक
-कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में उपयोगी
कोट...
विश्व में दो अरब से अधिक लोग सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से प्रभावित हैं। इनमें सबसे अधिक लौह तत्व की कमी है जिससे एनीमिया, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी और विकास संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अधिक आयरन वाला बायोफोर्टिफाइड शिटाके कुपोषण से लड़ने में एक टिकाऊ विकल्प है। -डाॅ. संदीप अरोड़ा, मशरूम विज्ञान विशेषज्ञ, जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर