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एक हजार से ज्यादा सूदखोर साहूकार सक्रिय
अमर उजाला ब्यूरो खटीमा।
Updated Sun, 16 Jul 2017 11:27 PM IST
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तहसील क्षेत्र में एक हजार से ज्यादा सूदखोर गैरकानूनी तरीके से ब्याज पर रकम देने का कारोबार कर रहे हैं। गली-मोहल्लों में ही कई लोग इस कारोबार में जुटे हैं। सूदखोरों के एजेंट भी सक्रिय रहते हैं, जिनके माध्यम से साहूकारों से रकम लेकर जरूरतमंदों तक पहुंचाई जाती है। छोटे से गांव कंचनपुर पचपेड़ा में ही मृतक किसान रामऔतार को उसके गांव के छह सूदखोरों ने रकम ब्याज और जमीन के बदले दी हुई थी।
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विकासखंड में 65 ग्रामसभाएं हैं। हर गांव में 10-15 लोग इस कारोबार में जुड़े हैं। यह संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। शहर में कई व्यवसायियों का साइड बिजनेस ब्याज पर रकम लगाना है। खुफिया विभाग की मानें तो तहसील क्षेत्र में एक हजार से अधिक सूदखोर काम कर रहे हैं। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। इन सभी सूदखोरों में एक भी सरकार से पंजीकृत नहीं हैं।
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यह ब्याजखोर हर गली, मोहल्ले में मिल जाएंगे। जहां ब्याजखोर नहीं मिलेगा वहां इनके एजेंट होते हैं। इनका काम जरूरतमंदों को ब्याज पर रकम दिलाना है। साहूकार से तीन प्रतिशत लेकर जरूरतमंद को पांच प्रतिशत में कर्ज देते हैं। व्यवसाई, किसान, मजदूर, नौकरीपेशा सभी तरह के लोग इनसे पीड़ित हैं। बाजार में कई तरह के सूदखोर हैं। कुछ सूदखोर रोज का ब्याज लेते हैं। कुछ लोग महीने का ब्याज लेते हैं। ब्याज का प्रतिशत जरुरतमंद की आवश्यकता को देखकर तय किया जाता है। सूदखोरों के जाल में फंसकर कई किसान, छोटे व्यवसायी बर्बादी के कगार पर हैं।
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सूदखोरों पर कसी जा रही है नकेल : एसडीएम
एसडीएम विजयनाथ शुक्ल ने कहा कि बिना पंजीकरण के ब्याज पर रकम देने वालों पर नकेल कसी जा रही है। कंचनपुर पचपेड़ा में किसान की आत्महत्या मामले में छह सूदखोर चिन्हित किए गए हैं। बहुत जल्द कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में बड़ी तादाद में सूदखोर सक्रिय हैं। अगर शिकायत आएगी तो कार्रवाई जरूर करेंगे।
रुपये देने से पहले सादे स्टांप पर करा लेते हैं हस्ताक्षर
सूदखोर ब्याज पर रकम देने से पहले सादे स्टांप पर जरूरतमंद से हस्ताक्षर और अंगूठा लगवाकर स्टांप अपने पास रख लेते हैं। रुपये न देने की स्थिति में सूदखोर उसकी जमीन, मकान जिससे रकम मिल सके वह लिख लेते हैं। जरूरतमंद मजबूरी में उनकी हर बात मान लेता है और रुपये लेने से पहले सादे स्टांप पर हस्ताक्षर कर देता है।
पहले महीने के ब्याज की रकम, स्टांप का खर्च काटकर मिलती है रकम
ब्याज पर रकम लेने वाले जरुरतमंद को पहले महीने का ब्याज काटकर ही रकम दी जाती है। स्टांप और फाइल बनाने के नाम पर हजार से 15 सौ रुपये भी लिए जाते हैं। सूदखोर ब्याज पर रकम तो दे देता है,उसके साथ ही उसका शेषण शुरू कर देते हैं।
पुलिस का सहारा लेकर भी वसूलते हैं रकम
सूदखोर पुलिस का सहारा लेकर भी रकम की वसूली करते हैं। इसके लिए कुछ प्रतिशत पुलिस का खर्च भी तय रहता है। जब कोई जरुरतमंद रकम अदा करने में आनाकानी करता है या फिरा ब्याज के प्रतिशत ज्यादा वसूलने का विरोध करता है तो उस पर पुलिस का सहारा लेकर दबाव बनाया जाता है।
राणा थारु परिषद ने किया था विरोध
राणा थारु परिषद कई बार इन सूदखोरों का विरोध कर चुकी है। परिषद के पूर्व अध्यक्ष एवं ब्लाक प्रमुख दान सिंह राणा ने कहा कि परिषद द्वारा शासन प्रशासन को कई बार सूदखोरों के नाम दिए गए हैं, जो सूदखोर किसानों पर ब्याज पर ब्याज लगाकर उनकी जमीनें हड़प रहे थे। यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सामने भी उठाया गया लेकिन पुलिस प्रशासन इसमें कोई काम नहीं करता है। उन्होंने बताया कि सूदखोरों ने कई किसानों को बर्बाद कर दिया है। पहले इनकी चपेट में थारु जनजाति के किसान होते थे लेकिन अब अन्य किसान भी इनकी चपेट में आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि ये समाज के लिए नासूर हैं। सरकार को स्वत: संज्ञान लेकर ऐसे सूदखोरों के विरुद्घ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।