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Udham Singh Nagar News: नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को बालिग बताया, आरोपी और विवेचना अधिकारी अदालत में तलब
Mon, 15 Dec 2025 10:31 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 15 Dec 2025 10:31 PM IST
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काशीपुर। आरोपी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को विवेचना अधिकारी ने अपनी जांच में बालिग दर्शा दिया और आरोपी की बहन और अन्य को जांच से बाहर कर दिया। इस पर पीड़िता ने दोबारा वाद परिवर्तन की अपील की जिसमें दिए गए शैक्षिक प्रमाणपत्रों से पता चला कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। मामले में कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट के तहत 12 जनवरी 2026 को पेश होने के आदेश दिए हैं। साथ ही विवेचना अधिकारी को भी पेश होने के लिए कहा गया है।
आईटीआई थाना क्षेत्र निवासी पीड़िता ने 10 दिसंबर 2019 को आईटीआई थाना पुलिस में तहरीर दी थी। इसमें उसने ग्राम बरखेड़ा पांडे निवासी दीपक सागर, उसकी बहन व कुछ अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीड़िता ने खुद को 15 वर्षीय बताकर अपने शैक्षिक प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किए थे। इस मामले में विवेचना अधिकारी ने आरोपी की बहन के कहने पर दीपक सागर को छोड़कर अन्य सभी के नाम जांच से हटा दिए थे।
विवेचना अधिकारी ने अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीएससी रुद्रपुर के न्यायालय में धारा 376, 506 आईपीसी में आरोपपत्र प्रस्तुत कर दिए जबकि पीड़िता ने न्यायालय में स्वयं बयान दर्ज कराते हुए खुद को नाबालिग बताया था। बाद में पीड़िता ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में धारा 216 सीआरपीसी के तहत आरोप में परिवर्तन करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। तब आरोपी के अधिवक्ता ने इस प्रार्थनापत्र पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वाद को लंबित करने के उद्देश्य से यह किया जा रहा है।
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न्यायालय ने तथ्यों की जानकारी के लिए शैक्षिक प्रमाणपत्र और संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य, राजस्व निरीक्षक के बयान सुनने के बाद कहा कि पीड़िता का घटना के समय नाबालिग होना प्रतीत होता है। अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीएससी संगीता आर्य की अदालत ने आदेश में कहा कि दीपक सागर को पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत आरोप विचरित किया जाना न्यायसंगत है।
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आईटीआई थाना क्षेत्र निवासी पीड़िता ने 10 दिसंबर 2019 को आईटीआई थाना पुलिस में तहरीर दी थी। इसमें उसने ग्राम बरखेड़ा पांडे निवासी दीपक सागर, उसकी बहन व कुछ अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीड़िता ने खुद को 15 वर्षीय बताकर अपने शैक्षिक प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किए थे। इस मामले में विवेचना अधिकारी ने आरोपी की बहन के कहने पर दीपक सागर को छोड़कर अन्य सभी के नाम जांच से हटा दिए थे।
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विवेचना अधिकारी ने अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीएससी रुद्रपुर के न्यायालय में धारा 376, 506 आईपीसी में आरोपपत्र प्रस्तुत कर दिए जबकि पीड़िता ने न्यायालय में स्वयं बयान दर्ज कराते हुए खुद को नाबालिग बताया था। बाद में पीड़िता ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में धारा 216 सीआरपीसी के तहत आरोप में परिवर्तन करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। तब आरोपी के अधिवक्ता ने इस प्रार्थनापत्र पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वाद को लंबित करने के उद्देश्य से यह किया जा रहा है।
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न्यायालय ने तथ्यों की जानकारी के लिए शैक्षिक प्रमाणपत्र और संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य, राजस्व निरीक्षक के बयान सुनने के बाद कहा कि पीड़िता का घटना के समय नाबालिग होना प्रतीत होता है। अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीएससी संगीता आर्य की अदालत ने आदेश में कहा कि दीपक सागर को पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत आरोप विचरित किया जाना न्यायसंगत है।