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बांसखेड़ा कलां का खसरा नंबर 165 बनेगा फांस
चंदन बंगारी रुद्रपुर।
Updated Mon, 04 Dec 2017 12:04 AM IST
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एनएच-74 में हुए भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में करोड़ों रुपये को ठिकाने लगाने को लेकर कागजों में हुई हेराफेरी उजागर हो रही है। काशीपुर के बांसखेड़ाकला के खसरा नंबर 165 की जमीन को थ्री-जी में कृषि दर्शाया गया था, लेकिन ठीक दो महीने बाद एसएलओ ने खुद का निर्णय बदलते हुए अकृषि कर दस करोड़ रुपये का मुआवजा बांट दिया।
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दिलचस्प यह है कि एनएच एक्ट में थ्री-जी में दर्ज भूमि की प्रकृति में आपत्ति की सुनवाई केवल आर्बिट्रेटर ही कर सकता है, लेकिन इस मामले में एसएलओ ने खुद ही आर्बिट्रेटर का काम कर गलत तरीके से भूमि की प्रकृति को बदलकर सरकार को चपत लगाई थी। एसआईटी ने मामले के दस्तावेज साक्ष्य के लिए सुरक्षित रख लिए हैं।
एनएच-74 की जद में काशीपुर तहसील के बांसखेड़ाकला गांव की जमीनें भी आई थीं। इन जमीनों के काश्तकारों को चार गुना मुआवजा दिलाने के लालच में खेल खेला गया। एसआईटी की जांच में बांसखेड़ा कला के काश्तकार की डेढ़ एकड़ जमीन एनएच की जद में आ रही थी। काश्तकार के खसरा नंबर 165 को 11 मई 2016 को थ्री जी में कृषि दर्शाई गई थी।
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इसके अनुसार, संबंधित काश्तकार को करीब 70 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा मिलना था, लेकिन इसी खसरा नंबर पर सुनियोजित ढंग से खेल किया गया। तत्कालीन एसएलओ ने 15 जुलाई 2016 को खुद के निर्णय को बदलकर थ्री-जी में जमीन को अकृषि कर दिया था। इसके बाद मुआवजे की रकम दस करोड़ पहुंच गई। इसका भुगतान भी संबंधित काश्तकार को किया गया।
इसकी एवज में मोटा कमीशन भी काश्तकार से लिया गया था। एनएच एक्ट के अनुसार थ्री-डी में एसएलओ काश्तकार की आपत्ति की सुनवाई करने के बाद जमीन की प्रकृति को थ्री-जी में दर्ज कर मुआवजे का निर्धारण करेगा। अगर काश्तकार को थ्री जी में दर्ज जमीन की प्रकृति पर कोई आपत्ति है तो वह उसे आर्बिट्रेटर के समक्ष रखेगा। आर्बिट्रेटर ही सुनवाई के बाद जमीन की प्रकृति को बदलेगा, लेकिन बांसखेड़ाकला के खसरा नंबर 165 पर संबंधित काश्तकार आर्बिट्रेटर तक नहीं पहुंचा।
यह काम एसएलओ ने अपने स्तर पर ही निपटाकर थ्री-जी में भूमि की प्रकृति को ही बदल डाला। जिस जमीन के लिए सरकार को मुआवजे का भुगतान लाखों में करना था, वो भुगतान इस खेल की खातिर दस करोड़ तक पहुंच गया। तत्कालीन एसएलओ का यही खेल अब उनके लिए गले की फांस बनेगा। काश्तकारों से साठगांठ कर सरकार को करोड़ों की चपत लगाने के अफसरों के कारनामे जांच में उजागर हो रहे हैं।
बाजपुर के ताली गांव के 11 काश्तकारों को नोटिस
एसआईटी ने बाजपुर तहसील पर जांच केंद्रित कर दी है। ताली गांव के 11 काश्तकारों को नोटिस जारी कर सोमवार को पूछताछ के लिए तलब किया है। काश्तकारों ने चकबंदी की जमीन को अकृषि में दर्शाकर करोड़ों का मुआवजा हासिल किया था। बता दें कि मुआवजा घोटाला उजागर होने के बाद ताली गांव भी चर्चा में आया था।
तत्कालीन अफसरों ने चकबंदी की जमीन की नियमविरुद्ध 143 कर दी थी। इसकी एवज में काश्तकारों को तीन बार में करीब 20 करोड़ का भुगतान भी कर दिया गया था। अब काशीपुर और जसपुर तहसील की अधिकांश मामलों की जांच पूरी करने के बाद एसआईटी ने ताली गांव के काश्तकारों को जांच के दायरे में लिया है। इनमें कुछ मामले वे भी हैं जिनमें थ्री-डी में जमीन किसी और काश्तकार के नाम दर्ज है और थ्री-जी में यह जमीन किसी और के नाम दर्ज होकर उसे मुआवजा बांट दिया गया। एसआईटी ने काश्तकारों को पूछताछ और बयान दर्ज कराने को तलब किया है।
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