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अब सितंबर में मिलेगा पंतनगर का आम
अमर उजाला ब्यूरो पंतनगर।
Updated Fri, 07 Sep 2018 12:28 AM IST
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alphonso mango
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पंतनगर विश्वविद्यालय के उद्यान वैज्ञानिकों ने देर से पकने वाले बारहमासी और अन्य प्रकार के आमों के जननद्रव्यों पर शोध किया, जिनमें 19 जननद्रव्य विकसित करने में सफलता मिली है। अब आमों का लुत्फ सितंबर में लिया जा सकेगा।
भारत में आम की लगभग 1200 किस्में पाई जाती हैं। इनमें से उत्तरी भारत में प्राय: आठ-नौ किस्मों का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन किया जाता है। विवि के उद्यान अनुसंधान केंद्र के संयुक्त निदेशक एवं आम वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि शोध कार्य के प्रारंभिक चरण में 19 जननद्रव्यों (जर्मप्लाज्मा) को चिन्हित किया गया है। इनमें से पांच जननद्रव्य जैसे पीएमएसएस 1, 17, 20, 24 और पीएमसीएस 3 देर से पकने वाले, सात जननद्रव्य जैसे पीएमएसएस 19, 21, 25, 26, 27, 28 और 29 बारहमासीए दो जननद्रव्य जैसे पीएमएसएस 9 व 14 आदि उपयुक्त पाए गए हैं। इनमें से पीएमएस 1 पंत आम-1 अगस्त के अंतिम सप्ताह से सितंबर के प्रथम सप्ताह तक पककर तैयार हो जाता है। इसके उत्पादन से बागवान एवं किसान अधिक आय भी प्राप्त कर सकते हैं।
भारत में आम की लगभग 1200 किस्में पाई जाती हैं। इनमें से उत्तरी भारत में प्राय: आठ-नौ किस्मों का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन किया जाता है। विवि के उद्यान अनुसंधान केंद्र के संयुक्त निदेशक एवं आम वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि शोध कार्य के प्रारंभिक चरण में 19 जननद्रव्यों (जर्मप्लाज्मा) को चिन्हित किया गया है। इनमें से पांच जननद्रव्य जैसे पीएमएसएस 1, 17, 20, 24 और पीएमसीएस 3 देर से पकने वाले, सात जननद्रव्य जैसे पीएमएसएस 19, 21, 25, 26, 27, 28 और 29 बारहमासीए दो जननद्रव्य जैसे पीएमएसएस 9 व 14 आदि उपयुक्त पाए गए हैं। इनमें से पीएमएस 1 पंत आम-1 अगस्त के अंतिम सप्ताह से सितंबर के प्रथम सप्ताह तक पककर तैयार हो जाता है। इसके उत्पादन से बागवान एवं किसान अधिक आय भी प्राप्त कर सकते हैं।
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