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Udham Singh Nagar News: अंग्रेजों की कुली-बेगार प्रथा के अंत के लिए जानी जाती है मकर संक्रांति
Wed, 14 Jan 2026 01:23 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Wed, 14 Jan 2026 01:23 AM IST
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रुद्रपुर। मकर संक्रांति पर नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने (उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश) का प्रतीक है। कुमाऊं क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक उत्तरायणी पर्व अंग्रेजों की कुली बेगार प्रथा के अंत के लिए भी जाना जाता है।
यह पर्व सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (मकर संक्रांति) के साथ शुरू होता है। इस पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। यह पर्व कुमाऊं की लोक संस्कृति से भी जुड़ा है।
उत्तरायणी का पर्व झोड़ा-चांचरी, न्योली, भगनौला आदि लोकगीतों का जीवंत मंच है। उत्तरायणी का ऐतिहासिक आंदोलन से भी जुड़ाव है। वर्ष 1921 में मकर संक्रांति के दिन सरयू और गोमती के संगम बागेश्वर में कुली-बेगार प्रथा (बंधुआ मजदूरी) को समाप्त करने के लिए एक बड़ा आंदोलन हुआ था, जो स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। मकर संक्रांति से अगले तीन दिन तक नदियों में स्नान किया जाता है।
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आज रहेगी घुघुतिया त्योहार की धूम
रुद्रपुर। मकर संक्रांति के दिन उत्तराखंड का लोक पर्व घुघुतिया त्योहार कुमाऊं मंडल में धूमधाम से मनाया जाता है। मकर संक्रांति से एक दिन पहले यानि मंगलवार को आटा, तेल, सूजी, दूध, घी और गुड़ के मिश्रण से घुघुती पकवान बनाए गए। मीठे आटे से बने घुघुते को एक माला में पिरोया जाता है और छोटे बच्चे इसकी माला बनाकर मकर संक्रांति के दिन अपने गले में डालकर कौवों को आवाज देकर बुलाते हैं और कौवों को घुघुते खाने का न्योता दिया जाता है। व्यंजन देवी, देवताओं को अर्पित किए जाते हैं।
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यह पर्व सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (मकर संक्रांति) के साथ शुरू होता है। इस पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। यह पर्व कुमाऊं की लोक संस्कृति से भी जुड़ा है।
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उत्तरायणी का पर्व झोड़ा-चांचरी, न्योली, भगनौला आदि लोकगीतों का जीवंत मंच है। उत्तरायणी का ऐतिहासिक आंदोलन से भी जुड़ाव है। वर्ष 1921 में मकर संक्रांति के दिन सरयू और गोमती के संगम बागेश्वर में कुली-बेगार प्रथा (बंधुआ मजदूरी) को समाप्त करने के लिए एक बड़ा आंदोलन हुआ था, जो स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। मकर संक्रांति से अगले तीन दिन तक नदियों में स्नान किया जाता है।
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आज रहेगी घुघुतिया त्योहार की धूम
रुद्रपुर। मकर संक्रांति के दिन उत्तराखंड का लोक पर्व घुघुतिया त्योहार कुमाऊं मंडल में धूमधाम से मनाया जाता है। मकर संक्रांति से एक दिन पहले यानि मंगलवार को आटा, तेल, सूजी, दूध, घी और गुड़ के मिश्रण से घुघुती पकवान बनाए गए। मीठे आटे से बने घुघुते को एक माला में पिरोया जाता है और छोटे बच्चे इसकी माला बनाकर मकर संक्रांति के दिन अपने गले में डालकर कौवों को आवाज देकर बुलाते हैं और कौवों को घुघुते खाने का न्योता दिया जाता है। व्यंजन देवी, देवताओं को अर्पित किए जाते हैं।