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जीबी पंत के बुलावे पर काशीपुर आए थे महात्मा गांधी, छोटे नीम के नीचे की थी सभा
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- फोटो : फाइल फोटो
काशीपुर। पंडित गोविंद बल्लभ पंत के बुलावे पर महात्मा गांधी चार जुलाई 1929 को काशीपुर पहुंचे थे। महात्मा गांधी ने पुरानी सब्जी मंडी स्थित छोटे नीम के नीचे एक सभा को संबोधित किया था।
अपने भाषण में उन्होंने गरीबी, खादी के प्रचार, आत्म स्वावलंबन, ग्रामीण विकास के मुद्दों पर बेबाक राय रखी थी। इसी दिन गोविंद बल्लभ पंत ने कुली बेगार आंदोलन को लेकर गठित कुमाऊं परिषद का कांग्रेस में विलय करने की घोषणा की थी। काशीपुर में रात्रि विश्राम के बाद महात्मा गांधी दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
पोरबंदर, गुजरात से महात्मा गांधी 13 जून 1929 को बरेली पहुंचे थे। उन्होंने भवाली, ताड़ीखेत, अल्मोड़ा, बागेश्वर आदि 26 जगहों पर सभाएं कीं। इस दौरान 21 जून से दो जुलाई तक उनका प्रवास कोसानी के अनाशक्ति आश्रम में रहा। उन दिनों काशीपुर पं. गोविंद बल्लभ पंत की जन्मभूमि थी।
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कुली बेगार के विरोध में 1920 में गठित कुमाऊं परिषद के बैनर तले पं. पंत स्वतंत्रता के आंदोलन में बढ़ चढ़कर शिरकत कर रहे थे। आजादी के आंदोलन को धार देने के लिए वर्ष 1914 में हिंदी प्रेम सभा का गठन किया था। इसकी मीटिंगों के बहाने आंदोलनकारी स्वतंत्रता संग्राम की रणनीति तय करते थे।
आंदोलन को लेकर पंत की ख्याति देशभर में थी। उन दिनों काशीपुर में आजादी के आंदोलन का गढ़ था, जिसके चलते सरकार ने काशीपुर को ब्लैक लिस्ट कर रखा था। स्वतंत्रता सेनानी किशोरी लाल गुड़िया के पुत्र विमल गुड़िया ने अपने पिता और दादा की ओर से बताए गए संस्मरणों का जिक्र करते हुए बताया कि अपने कोसानी प्रवास के दौरान महात्मा गांधी ने पंडित पंत को मिलने के लिए वहां बुलाया था। पंत के अनुरोध पर गांधी तीन जुलाई को रामनगर होते हुए काशीपुर पहुंचे।
श्री अग्रवाल सभा भवन में उनके लिए भोजन का प्रबंध किया था। उसके बाद गांधी पुरानी सब्जी मंडी स्थित छोटे नीम के नीचे पहुंचे। अपने संबोधन में गांधी ने स्वदेशी अपनाने के साथ ही नशाबंदी, ग्रामीण विकास और आंचलिक संकीर्णता से दूर रहने पर जोर दिया।
इस सभा में पं. पंत के अलावा कल्याण गुड़िया, पं. रामशरण सारस्वत, उमाशंकर वैद्य, बालमुकुंद माहेश्वरी, लाला मिठ्ठन लाल, किशोरी लाल गुड़िया, कुंवर आनंद सिंह, गुरु रामदत्त पंत, डॉ. हरदत्त पंत, रघुनंदन प्रसाद लोहिया आदि शामिल हुए।
गांधी ने रात्रि विश्राम स्टेशन रोड पर मालगोदाम के सामने लाला नानक चंद्र खत्री के आवास पर किया। यहीं पर पं. पंत ने कुमाऊं परिषद के कांग्रेस में विलय करने की घोषणा की। बाद में लाला खत्री के वारिसान से यह मकान जसपुर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख हरगोविंद सिंघल ने खरीदा लिया।
बैलगाड़ी से अग्रवाल सभा पहुंचे थे महात्मा गांधी
काशीपुर। महात्मा गांधी के काशीपुर आने की सूचना पर उदयराज हिन्दू इंटर कॉलेज में चतुर्थश्रेणी के पद पर कार्यरत गोला सिंह अपनी बैलगाड़ी लेकर रेलवे स्टेशन पहुंचे थे।
उनकी बैलगाड़ी से ही महात्मा गांधी और पं. गोविंद बल्लभ पंत मोहल्ला सिंघान स्थित अग्रवाल सभा भवन पहुंचे थे। अन्य स्वतंत्रता सेनानी बैलगाड़ी के साथ पैदल चल रहे थे। अग्रवाल सभा से महात्मा गांधी व अन्य पैदल ही सभास्थल पहुंचे।
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अपने भाषण में उन्होंने गरीबी, खादी के प्रचार, आत्म स्वावलंबन, ग्रामीण विकास के मुद्दों पर बेबाक राय रखी थी। इसी दिन गोविंद बल्लभ पंत ने कुली बेगार आंदोलन को लेकर गठित कुमाऊं परिषद का कांग्रेस में विलय करने की घोषणा की थी। काशीपुर में रात्रि विश्राम के बाद महात्मा गांधी दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
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पोरबंदर, गुजरात से महात्मा गांधी 13 जून 1929 को बरेली पहुंचे थे। उन्होंने भवाली, ताड़ीखेत, अल्मोड़ा, बागेश्वर आदि 26 जगहों पर सभाएं कीं। इस दौरान 21 जून से दो जुलाई तक उनका प्रवास कोसानी के अनाशक्ति आश्रम में रहा। उन दिनों काशीपुर पं. गोविंद बल्लभ पंत की जन्मभूमि थी।
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कुली बेगार के विरोध में 1920 में गठित कुमाऊं परिषद के बैनर तले पं. पंत स्वतंत्रता के आंदोलन में बढ़ चढ़कर शिरकत कर रहे थे। आजादी के आंदोलन को धार देने के लिए वर्ष 1914 में हिंदी प्रेम सभा का गठन किया था। इसकी मीटिंगों के बहाने आंदोलनकारी स्वतंत्रता संग्राम की रणनीति तय करते थे।
आंदोलन को लेकर पंत की ख्याति देशभर में थी। उन दिनों काशीपुर में आजादी के आंदोलन का गढ़ था, जिसके चलते सरकार ने काशीपुर को ब्लैक लिस्ट कर रखा था। स्वतंत्रता सेनानी किशोरी लाल गुड़िया के पुत्र विमल गुड़िया ने अपने पिता और दादा की ओर से बताए गए संस्मरणों का जिक्र करते हुए बताया कि अपने कोसानी प्रवास के दौरान महात्मा गांधी ने पंडित पंत को मिलने के लिए वहां बुलाया था। पंत के अनुरोध पर गांधी तीन जुलाई को रामनगर होते हुए काशीपुर पहुंचे।
श्री अग्रवाल सभा भवन में उनके लिए भोजन का प्रबंध किया था। उसके बाद गांधी पुरानी सब्जी मंडी स्थित छोटे नीम के नीचे पहुंचे। अपने संबोधन में गांधी ने स्वदेशी अपनाने के साथ ही नशाबंदी, ग्रामीण विकास और आंचलिक संकीर्णता से दूर रहने पर जोर दिया।
इस सभा में पं. पंत के अलावा कल्याण गुड़िया, पं. रामशरण सारस्वत, उमाशंकर वैद्य, बालमुकुंद माहेश्वरी, लाला मिठ्ठन लाल, किशोरी लाल गुड़िया, कुंवर आनंद सिंह, गुरु रामदत्त पंत, डॉ. हरदत्त पंत, रघुनंदन प्रसाद लोहिया आदि शामिल हुए।
गांधी ने रात्रि विश्राम स्टेशन रोड पर मालगोदाम के सामने लाला नानक चंद्र खत्री के आवास पर किया। यहीं पर पं. पंत ने कुमाऊं परिषद के कांग्रेस में विलय करने की घोषणा की। बाद में लाला खत्री के वारिसान से यह मकान जसपुर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख हरगोविंद सिंघल ने खरीदा लिया।
बैलगाड़ी से अग्रवाल सभा पहुंचे थे महात्मा गांधी
काशीपुर। महात्मा गांधी के काशीपुर आने की सूचना पर उदयराज हिन्दू इंटर कॉलेज में चतुर्थश्रेणी के पद पर कार्यरत गोला सिंह अपनी बैलगाड़ी लेकर रेलवे स्टेशन पहुंचे थे।
उनकी बैलगाड़ी से ही महात्मा गांधी और पं. गोविंद बल्लभ पंत मोहल्ला सिंघान स्थित अग्रवाल सभा भवन पहुंचे थे। अन्य स्वतंत्रता सेनानी बैलगाड़ी के साथ पैदल चल रहे थे। अग्रवाल सभा से महात्मा गांधी व अन्य पैदल ही सभास्थल पहुंचे।