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घर में कोहराम, गांव में मातम और दिलों में गुस्सा 

Sat, 16 Feb 2019 12:17 AM IST
अरुण कुमार अमर उजाला ब्यूरो 
अमर उजाला ब्यूरो  Published by: अरुण कुमार Updated Sat, 16 Feb 2019 12:17 AM IST
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Khatima village Mohammedpur Bhoodia Lal Virendra was also martyred
शहीद विरेंद्र सिंह राणा - फोटो : amar ujala

पुलवामा में हुए फिदायीन हमले में खटीमा के मोहम्मदपुर भुड़िया निवासी विरेंद्र सिंह राणा (36) भी शहीद हो गए। उनकी शहादत की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। घर में परिजनों को ढाढ़स बधाने वालों का तांता लगा हुआ है। शहीद के गांव में मातम पसरा है और इस कायराना हमले के खिलाफ हर किसी के दिल में गुस्सा भरा हुआ है। 

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बताया जा रहा है कि शहीद का शव कश्मीर से दिल्ली लाया जा चुका है और शनिवार सुबह शव के यहां लाए जाने की उम्मीद है। क्षेत्र के मोहम्मदपुर भुड़िया निवासी दीवान सिंह (80) के पांच बेटों और बेटियों में विरेंद्र सबसे छोटे थे। उनकी माता सावित्री देवी का सात वर्ष पूर्व निधन हो चुका है।
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बड़े भाई जयराम सिंह वर्ष 2017 में बीएसएफ से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि मझले भाई राजेंद्र सिंह खेती करते हैं। तीनों भाई अलग-अलग रहते थे और उनके पिता विरेंद्र के परिवार के साथ ही रहते थे। विरेंद्र सिंह ने राजकीय इंटर कॉलेज प्रतापपुर के बाद राइंका बंडिया से इंटर उत्तीर्ण किया। इसके बाद वर्ष 2004 में रामपुर से सीआरपीएफ बटालियन 45 में भर्ती हुए।
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एक वर्ष पहले ही उनकी पोस्टिंग कश्मीर में हुई थी। वह बीती 23 जनवरी को छुट्टी पर घर आए थे और दो दिन पहले (12 फरवरी) ही ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे। तब किसी को क्या पता था कि विरेंद्र की परिवार से उनकी आखिरी मुलाकात हो रही है। विरेंद्र की शहादत की सूचना मिलते ही उनकी पत्नी रेनू (26), उनकी भाभियां और दोनों बहनें रित्छा और पुष्पा बेसुध हो गईं। विरेंद्र के दो मासूम बच्चे बड़ी बेटी रोही (4) और ढाई वर्षीय पुत्र बयान सिंह हैं। बेटी रोही ब्राइट एकेडमी प्रतापपुर में कक्षा एक में पढ़ती है। 
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हर आंख में नमी और लबों पर गुस्सा 
खटीमा। सीआरपीएफ के जवान विरेंद्र की शहादत की खबर जिसे भी मिली, वह उनके घर की ओर चल पड़ा। विरेंद्र की बेसुध पत्नी रेनू और अन्य परिजनों को ढाढ़स बधाते हुए हर एक आंख नम हो गईं। सभी की जुबां पर सिर्फ यही बात थी कि आखिर कब तक हमारे बच्चों का खून इसी तरह बहता रहेगा। आखिर कब आतंकियों और उनके आकाओं को माकूल जवाब मिलेगा। थरूवाटी भाषा में महिलाएं यही कहती दिखीं कि ‘नाश जाय, पाक को नाश कैसे होवेगो।’ 
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‘मेरा देश इन हमलों का बदला जरूर लेएगो’ 
खटीमा। पुलवामा में आत्मघाती हमले में शहीद विरेंद्र सिंह के पिता दीवान सिंह को बेटे की शहादत पर गर्व है। बेटे को याद करते-करते उनकी आंखें कभी डबडबा कर छलक पड़तीं तो कभी सूखी आंखों ही उनका दर्द बयां कर दे रही थीं। आतंकियों की कायराना हरकत पर दीवान सिंह ने कहा कि ‘आतंकी देशन से त बदलो लेना चाहिए। मेरा देश इन हमलों का बदला जरूर लेएगो।’ कमोवेश यही स्थिति शहीद के बड़े भाई और बीएसएफ से सेवानिवृत्त जयराम सिंह एवं राजेंद्र की भी थी। 
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रोही और बयान को तो पता ही नहीं घर में मजमा क्यों लगा है
खटीमा। शहीद विरेंद्र के मासूम बच्चों रोही और बयान नहीं जानते कि उनके घर पर लोग क्यों एकत्र हुए हैं। और यह भीड़ लगातार आखिर क्यों बढ़ती जा रही है। उन्हें यह भी नहीं पता मम्मी क्यों रो रही हैं और घर के सभी सदस्य क्यों गुमसुम और रुआंसे हैं। दोनों बच्चे जब नहीं रह पाते तो अपनी मम्मी के साथ ही रोने लगते। घर आईं महिलाएं कई बार रोते हुए बच्चों को उठाकर बाहर ले गए और शांत कराया। 
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परिजनों को अब तक नहीं मिली आधिकारिक सूचना 
खटीमा। शहीद विरेंद्र सिंह के परिजन फिदायीन हमले के दूसरे दिन भी सरकारी जानकारी से वंचित रहे। उन्हें विरेंद्र के फिदायीन हमले में शहीद होने की जानकारी विरेंद्र के खटीमा निवासी साथी ने दी थी। इसके बाद टीवी एवं व्हाट्सएप से पता चला। इधर, सीओ कमला बिष्ट ने बताया कि सीआरपीएफ के अधिकारियों से उनकी बात हुई है। उनके अनुसार शहीद का शव कश्मीर से दिल्ली लाया जा चुका है और उम्मीद है कि देर रात या शनिवार सुबह शव यहां पहुंच जाएगा। वहीं, एसडीएम विजयनाथ शुक्ल देर शाम तक आधिकारिक पुष्टि नहीं कर सके। 
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धामी, कापड़ी और पाल ने जताई शोक संवेदना 
खटीमा। मोहम्मदपुर भुड़िया गांव निवासी विरेंद्र सिंह राणा की शहादत पर जनप्रतिनिधियों ने भी शोक संवेदना जताई है। विरेंद्र की शहादत की सूचना मिलते ही विधायक पुष्कर सिंह, डॉ. प्रेम सिंह राणा, युवक कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष भुवन कापड़ी, किसान कांग्रेस के महासचिव नारायण पाल, कुंवर सिंह खनका, दलजीत सिंह गोराया, दान सिंह राणा, साधू सिंह नामधारी, ग्राम प्रधान सुनील कुमार, महेंद्र ठाकुर, भजन सिंह राणा, गंभीर सिंह धामी, रवींद्र वर्मा, अमित पांडे, राजकिशोर सक्सेना, अजय मौर्य आदि उनके घर पहुंच गए और परिजनों को ढाढ़स बधाया। उन्होंने पाकिस्तान की कायराना हरकत की निंदा की। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी मोबाइल पर परिजनों से बात कर संवेदना व्यक्त कीं। इधर, पूर्व सैनिक संगठन अध्यक्ष कुंवर सिंह खनका ने पुलवामा में फिदायीन हमले की निंदा करते हुए भारत सरकार से पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने की मांग की। वहीं, गौरव सेनानी संगठन के अध्यक्ष गंभीर सिंह धामी ने भी आतंकी हमले की निंदा करते हुए पाकिस्तान से आरपार की लड़ाई की मांग की। 

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जीआईसी बंडिया में व्यक्त किया गया शोक
खटीमा। पुलवामा में फिदायीन हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान विरेंद्र सिंह राणा ने प्रारंभिक शिक्षा प्रतापपुर और फिर बंडिया इंटर कॉलेज में कक्षा नौ से इंटर तक की शिक्षा ग्रहण की थी। विरेंद्र की शहादत पर जीआईसी बंडिया में शोकसभा कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। वहां प्रधानाचार्य ओपी राम समेत पूरा स्कूल स्टाफ मौजूद रहा। 

 

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