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अकीदत से अदा की गई रमजान के पहले जुमे की नमाज
Sat, 11 May 2019 12:15 AM IST
अरुण कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अरुण कुमार
Updated Sat, 11 May 2019 12:15 AM IST
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गदरपुर में बाजार वाली मस्जिद में नमाज अता करते रोजेदार।
- फोटो : अमर उजाला
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रमजान के पहले जुमे की नमाज शहर की सभी मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई। रोजेदारों ने नमाज के बाद रब की बारगाह में हाथ उठाकर दुआएं मांगीं। नमाज के बाद मस्जिदों में कुरआन पाक की तिलावत का एहतमाम किया गया।
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हाजी मोहम्मद सगीर ने बताया कि इस्लाम के मुताबिक माहे रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला, दूसरा और तीसरा अशरा कहलाता है। हाजी सगीर ने बताया कि अशरा का मतलब अरबी का दस नंबर होता है. इस तरह रमजान के तीस रोजे तीन अशरों में बांटे गए हैं।
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उन्होंने बताया कि पहले दस रोजों का अशरा रहमत का होता है। दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का होता है और तीसरा अशरा दोजख की आग से खुद को बचाने के लिए होता है। उन्होंने बताया कि रमजान के महीने को लेकर पैगंबर मोहम्मद साहब ने फरमाया कि रमजान की शुरुआत में रहमत है, बीच में मगफिरत यानी माफी है और इसके अंत में जहन्नम की आग से बचाव है.
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मौलाना अशरफुल कादरी ने बताया कि रमजान के शुरुआती दस दिनों में रोजा-नमाज करने वालों पर अल्लाह की रहमत होती है। रमजान के बीच यानी दूसरे अशरे में मुसलमान अपने गुनाहों से पाक हो सकते हैं। मौलाना अशरफुल ने बताया कि रमजान के आखिरी यानी तीसरे अशरे में जहन्नम की आग से खुद को बचा सकते हैं।
इधर, गदरपुर में रमजान के पहले जुम्मे को बाजार वाली मस्जिद में हाजी उस्मान रजा, नूरी मस्जिद एवं तकिये वाली मस्जिद के अलावा जामा मस्जिद में शाही इमाम जाने आलम ने रोजेदारों को नमाज अदा कराते हुए रसूले पाक के बताये रास्ते पर चलने को कहा।