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डेढ़ साल जसविंदर तो साढ़े तीन साल के लिए सेवा सिंह रहेंगे प्रधान

Thu, 22 Dec 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर Updated Thu, 22 Dec 2016 12:30 AM IST
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Jaswinder for a year and a half where as Seva singh will become pradhan for three and a half year
चुनाव - फोटो : अमर उजाला

ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की 27 सदस्यीय प्रबंध कमेटी के हुए चुनाव के बाद सर्वसहमति से जसविंदर सिंह गिल प्रधान, सेवा सिंह उप प्रधान, प्रीतम सिंह संधू जनरल सेक्रेटरी और केहर सिंह सेक्रेट्री बने। किसी भी दावेदार प्रधान को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने पर आम सहमति से पहले डेढ़ साल जसविंदर सिंह गिल और साढ़े तीन साल के लिए सेवा सिंह को प्रधान बनाया जाएगा। चुनाव अधिकारी की 

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घोषणा के बाद नई कमेटी के सदस्यों ने श्री दरबार साहिब में मत्था टेक अरदास की। गुरुद्वारे के मीत ग्रंथी ने सभी को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया। प्रबंध कमेटी बृहस्पतिवार को पदभार ग्रहण करेगी।
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ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की प्रबंध कमेटी के लिए हुए चुनाव एवं मतगणना के बाद प्रधान पद के किसी भी दावेदार को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। 27 सदस्यीय कार्यकारिणी में 11 सदस्य लेकर तराई महासभा सबसे आगे थी। वहीं डेरा समर्थकों की संख्या नौ थी। प्रधान पद के दावेदार जसविंदर सिंह गिल के चार सदस्य थे। 
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वहीं तीन सदस्य आम सहमति पर ही समर्थन देने की बात कर रहे थे। सुबह से लेकर शाम तक हुई कई वार्ता के बाद चुनाव अधिकारी कंवर अमनिंदर सिंह द्वारा सदस्यों की बैठक बुलाई गई। बैठक में पहले डेढ़ साल जसविंदर सिंह गिल को और शेष साढ़े तीन वर्ष के लिए सेवा सिंह को प्रधान बनाने पर आम सहमति बन गई। सर्वसहमति के बाद सेवा सिंह को वर्तमान में उपप्रधान, प्रीतम सिंह संधू को जनरल सेक्रेट्री और केहर सिंह को सेक्रेट्री बनाया गया। 

घोषणा होने के बाद कमेटी के पदाधिकारियों, सदस्यों और चुनाव अधिकारी ने श्री दरबार साहिब में मत्था टेक अरदास की। गुरुद्वारे के मीत ग्रंथी ने पदाधिकारियों और सदस्यों को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया। संगत की ओर से चुनाव अधिकारी कंवर अमनिंदर सिंह को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए सरोपा भेंट कर धन्यवाद दिया गया।


18 वर्षों बाद गुरुद्वारे में प्रधान बना 
उत्तर भारत के सिखों के प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की प्रबंध कमेटी के 18 वर्षों से चला आ रहे विवाद का आज निर्वाचित प्रधान मिलने के बाद पटाक्षेप हो गया। वर्ष 1993 में गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के हुए अंतिम चुनाव में भाऊ दर्शन सिंह प्रधान निर्वाचित हुए थे। 1997 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद वर्ष 1997 में हुए चुनाव में हरबंश सिंह ढिल्लो प्रधान निर्वाचित हुए, लेकिन दो संविधान के चलते विवाद न्यायालय में पहुंच गया। 


इसके चलते वर्ष 1998 में दोबारा हुए चुनाव में दलजीत सिंह मान प्रधान चुने गए, लेकिन विवाद न्यायालय में विचाराधीन होने के चलते उन्हें चार्ज नहीं मिला। वर्ष 1999 में तत्कालीन उत्तरप्रदेश सरकार ने विधायक राजराय सिंह को गुरुद्वारे का रिसीवर नियुक्त कर दिया था। अलग राज्य बनने के बाद वर्ष 2006 में उत्तराखंड सरकार ने ज्ञानी स्वर्ण सिंह को रिसीवर बनाया। लेकिन एक माह बाद ही माननीय उच्च न्यायालय ने स्वर्ण सिंह को हटाकर जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर को गुरुद्वारे का रिसीवर नियुक्त कर दिया था। वर्तमान तक जिलाधिकारी ही गुरुद्वारे के रिसीवर चले आ रहे थे। 

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