फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Udham Singh Nagar News ›   Industrialist will go to Supreme court against NGT orders

एनजीटी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे उद्योगपति 

Sat, 02 Jun 2018 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो  सितारगंज।
अमर उजाला ब्यूरो  सितारगंज। Updated Sat, 02 Jun 2018 12:42 AM IST
विज्ञापन
Industrialist will go to Supreme court against NGT orders
सितारगंज में फैक्ट्रियों के गंदे पानी को ट्रीट करता सीईटीपी प्लांट। - फोटो : amar ujala

एनजीटी के सिडकुल की आठ कंपनियों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश से उद्योगपतियों में खलबली मच गई है। उद्योगपतियों का शिष्टमंडल रुद्रपुर में डीएम से मिला और फिर दिल्ली के लिए रवाना हो गया। कंपनी अधिकारियों ने एनजीटी की कार्रवाई को एकतरफा बताया। कहा कि फैक्ट्रियां एनजीटी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी। 

विज्ञापन


बता दें कि सिद्ध गर्ब्यांग कल्याण सेवा समिति की शिकायत पर एनजीटी ने सुनवाई करते हुए सीपीसीबी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे और फैक्ट्रियों से निकलने वाले जल, वायु और मिट्टी प्रदूषण की जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। 31 मई को सीपीसीबी की टीम ने कोर्ट में पहले चरण की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें आठ कंपनियों के नमूने फेल मिलने पर कोर्ट के जस्टिस रघुवेंद्र एस. राठौर और विशेषज्ञ सदस्य सत्यवान सिंह ने पर्यावरण सचिव, डीएम और एसएसपी को तत्काल ही उक्त कंपनियों को बंद करने के आदेश जारी किए थे।
विज्ञापन


शुक्रवार को सितारगंज सिडकुल इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन के नेतृत्व में उद्योगपतियों का शिष्टमंडल रुद्रपुर में डीएम डॉ. नीरज खैरवाल से मिला। उद्योगपतियों का कहना था कि एनजीटी ने ग्रामीणों की शिकायत पर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई तो कर दी, लेकिन कंपनियों का भी पक्ष लेना चाहिए था। कंपनियां सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) को पानी देती हैं। उसी के नियम के तहत पानी ट्रीट करके दिया भी जा रहा है। एनजीटी को पहले सीईटीपी से जवाब लेना चाहिए था। कहा कि एनजीटी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके बाद कई उद्योगपति दिल्ली रवाना हो गए। 
विज्ञापन
विज्ञापन



आठ हजार हाथों से छिन जाएगा रोजगार 
सितारगंज। सिडकुल में आठ कंपनियों के बंद होने से जहां कंपनियों को करोड़ों का नुकसान होगा, वही, इन उद्योगों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े करीब आठ हजार हाथों से भी रोजगार छिन जाएगा। एल्डिको सिडकुल इंडस्ट्रियल पार्क में स्थापित गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट लिमिटेड, रैकिट बेनकीजर और बालाजी एक्शन विल्डबेल कंपनियां बड़े उद्योग हैं। इसके अलावा चार अन्य फ्लीट गार्ड फिल्टर्स, स्पेशलिटी इंडस्ट्रियल पॉलीमर्स एंड कोटिंग प्राइवेट लिमिटेड, हेंकन चेम्बॉंड सरफेस टेक लिमिडेट और वेस्टर्न कंसोलीडेटेड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी भी मध्यम वर्ग के बड़े उद्योग हैं। इन उद्योगों में भी प्रत्येक उद्योग में कम से कम 100-150 तक श्रमिक काम करते हैं। उद्योगपतियों की मानें तो उद्योगों के बंद होने से उनमें काम करने वाले करीब तीन हजार और अप्रत्यक्ष रूप से उद्योगों पर निर्भर पांच हजार लोगों के रोजगार पर इसका सीधा प्रतिकूल असर पड़ेगा। 

85 में से 32 उद्योगों ने ही लगाए हैं वाटर मीटर 
सितारगंज। सीईटीपी के अधिकारियों ने बताया कि 85 उद्योगों में से सिर्फ 32 उद्योगों ने ही अभी तक वाटर मीटर लगाए हैं। कई कंपनियां पानी सीईटीपी को कम देकर अन्य स्रोतों से बाईपास कर खुद को लाभ पहुंचा रही थीं। इसकी वजह से सीईटीपी को क्षमता से एक एमएलडी कम पानी मिल रहा है और वाटर मीटर न होने के कारण पानी का बिल भी पूरा नहीं मिलता। शुक्रवार को सीईटीपी के प्लांट हेड सोनपाल शर्मा और वरिष्ठ अभियंता हिमांशु ने बताया कि उनके सीईटीपी की क्षमता चार एमएलडी है। 85 कंपनियों सीईटीपी से जुड़ी हैं, लेकिन पानी सिर्फ ढाई एमएलडी ही मिल रहा है। इसमें भी डेढ़ एमएलडी के शुल्क की वसूली हो पाती है। करीब 15 फैक्ट्रियां पानी बाईपास कर रही हैं, जिसकी 13 मार्च 2018 को पीसीबी की बैठक में क्षेत्रीय प्रबंधक से शिकायत की थी और बीती 17 मई को संयुक्त बैठक में सीपीसीबी के समक्ष भी इस मामले को उठाया गया था। बताया कि जिन कंपनियों के नमूने फेल हुए हैं, उनके मानक कंपनी के भीतर के ही थे। इसका सीईटीपी से कोई लेनादेना नहीं होता। उन्होंने बताया कि बेलमैक्स और यूआई फैब्रिकेटर्स कंपनी ने भी सीईटीपी से जुड़ने के लिए आवेदन किया है। 

एनजीटी की कार्रवाई अन्य कंपनियों के लिए सबक 
सितारगंज। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कोर्ट ने सिडकुल में प्रदूषण को बढ़ावा देने वाली आठ फैक्ट्रियों के खिलाफ बंदी का आदेश देकर अन्य उद्योगों को सबक दिया है। ग्रामीणों ने कहा कि प्रदूषण से अब पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा। कहा कि पीसीबी में कई बार शिकायत की गई, लेकिन कभी इस पर कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने एनजीटी और अमर उजाला का आभार जताया। 

सिद्ध गर्ब्यांग गांव में शुक्रवार को सिद्ध गर्ब्यांग कल्याण सेवा समिति बैठक में ग्रामीणों ने एनजीटी की कार्रवाई पर हर्ष जताया। कहा कि यह कार्रवाई सिडकुल की अन्य कंपनियों के लिए भी सबक होगी। उन्होंने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर कई बार शिकायत करने के बाद भी प्रदूषण के मामले को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया। कहा कि पीसीबी की लापरवाही के कारण ही ग्रामीण एनजीटी की शरण में गए।

वहीं, ग्रामीणों की इस समस्या को हर बार प्रमुखता से उठाने के लिए अमर उजाला के साथ ही मामले में अग्रणी रहे महिमन सिंह गर्ब्याल और अशोक गर्ब्याल का भी आभार प्रकट किया। बैठक में समिति के अध्यक्ष भीम सिंह गर्ब्याल, सचिव दान सिंह गर्ब्याल, पुष्कर सिंह गर्ब्याल, धीरेंद्र गर्ब्याल, विनोद गर्ब्यांग, सुनील कुमार, सुरेंद्र सिंह गर्ब्याल, जीत सिंह गर्ब्याल, गौतम सिंह गर्ब्याल, मंदोदरी, राधिका, दशरथी, शर्मिला, सुमन, रूपा आदि थे। ब्यूरो 
 
सिडकुल की आठ फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश की बिना हस्ताक्षरयुक्त कॉपी मिली है। एनजीटी से समन्वय बनाया जा रहा है। हस्ताक्षरयुक्त कॉपी मिलने के बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 
- डॉ. नीरज खैरवाल जिलाधिकारी, ऊधमसिंह नगर। 


दर्जन भर कंपनियों पर और हो सकती है बंदी की कार्रवाई
सितारगंज। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की टीम ने एनजीटी को 18 कंपनियों की रिपोर्ट ही सौंपी है। शेष 67 कंपनियों की रिपोर्ट 18 जून को कोर्ट में पेश की जानी है। पहली रिपोर्ट में 18 में से आठ कंपनियां प्रदूषण के मामले में दोषी मिलने पर एनजीटी ने उन्हें बंद करने के आदेश दिए हैं। एनजीटी की सख्ती को देखते हुए दर्जन भर से अधिक अन्य कंपनियों पर भी बंदी तलवार लटक रही है। 

बता दें कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने 29 मई को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कोर्ट में सिडकुल की 85 फैक्ट्रियों में से 18 फैक्ट्रियों की रिपोर्ट सौंपी थी। जिस पर उस दिन सुनवाई के बाद 31 मई को एनजीटी कोर्ट में पुन: सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने आठ फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश दिए। कोर्ट ने शेष फैक्ट्रियों की रिपोर्ट पेश न करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पूछा भी था कि सभी फैक्ट्रियों की जांच रिपोर्ट अभी तक क्यों नहीं लाई गई।


इसके बाद कोर्ट ने सख्त लहजे में 18 जून को शेष सभी 67 फैक्ट्रियों की संपूर्ण जांच आख्या संस्तुति सहित पेश करने के आदेश दिए। सीपीसीबी सूत्रों की मानें तो अभी सिर्फ 18 कंपनियों की जांच रिपोर्ट पर एनजीटी ने आठ कंपनियों को दोषी मानते हुए बंद करने के आदेश दे दिए हैं। 18 जून को अन्य कंपनियों की रिपोर्ट पर सुनवाई होने से करीब दर्जन भर से अधिक और कंपनियों पर बंदी की तलवार लटक गई है। इससे अन्य उद्योगपतियों की चिंता बढ़ गई है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed