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अतिक्रमणकारियों से भारत और नेपाल की सीमा के जंगल भी असुरक्षित
ब्यूरो/अमर उजाला खटीमा (ऊधमसिंहनगर)।
Updated Wed, 20 May 2015 11:30 PM IST
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जंगल के अतिक्रमणकारियाें से भारत नेपाल सीमा के जंगल भी सुरक्षित नहीं हैं। अतिक्रमणकारियों ने मेलाघाट एसएसबी चौकी से 17 नंबर पिलर यूपी बार्डर तक का 900 मीटर लंबे और 500 मीटर चौड़े क्षेत्र में खड़े जंगल को उजाड़ कर उसमें खेती शुरू कर दी है। अतिक्रमणकारी बाकायदा आधुनिक तरीके से खेती कर रहे हैं। एक जगह तो वन भूमि पर बोरिंग से सिंचाई हो रही है। आए दिन सुखाए गए पेड़ों को काटा जा रहा है। यहां तक की अतिक्रमणकारियों ने नोमेंस लेंड की जमीन भी जोत ली है। नो मेंस लैंड को जोतने में भारत और नेपाल दोनों देशों के नागरिक शामिल हैं।
नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी की 57वीं कंपनी की चौकी सुंदर नगर और पिलर संख्या 17 के पास स्थित है। मेलाघाट से 17 नंबर पिलर तक एक किमी के क्षेत्र में घना जंगल था। जिसमें अब मात्र 100 मीटर में ही पेड़ रह गए हैं। जबकि 900 मीटर क्षेत्र में खड़ा जंगल काट दिया गया है। अतिक्रमणकारी पिलर संख्या 17 से 11 तक खेती कर रहे हैं। इसमें पिलर संख्या 796/15 796/16,797/17 में भारत और नेपाल दोनों देशों के नागरिक खेती कर रहे हैं। जबकि पिलर संख्या 13,14 में केवल नेपाल के नागरिक खेती कर रहे हैं। पिलर संख्या 12 जगबुड़ा नदी द्वारा किए गए कटाव की वजह से नदी में समा गया है।
मेलाघाट वन क्षेत्र में अतिक्रमण करने वाले अधिकांश लोग पूर्वांचल और बिहार के हैं। वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका यहां संदिग्ध रही है। एक ओर जहां जंगल काटे जा रहे हैं वहीं वनभूमि पर बोरिंग कर खेती की जा रही है। आए दिन नये झाले बनाए जा रहे हैं। एसएसबी की चौकियों के पास भी अतिक्रमणकारी जंगल काटकर खेती करने में जुटे हुए हैं।
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नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी की 57वीं कंपनी की चौकी सुंदर नगर और पिलर संख्या 17 के पास स्थित है। मेलाघाट से 17 नंबर पिलर तक एक किमी के क्षेत्र में घना जंगल था। जिसमें अब मात्र 100 मीटर में ही पेड़ रह गए हैं। जबकि 900 मीटर क्षेत्र में खड़ा जंगल काट दिया गया है। अतिक्रमणकारी पिलर संख्या 17 से 11 तक खेती कर रहे हैं। इसमें पिलर संख्या 796/15 796/16,797/17 में भारत और नेपाल दोनों देशों के नागरिक खेती कर रहे हैं। जबकि पिलर संख्या 13,14 में केवल नेपाल के नागरिक खेती कर रहे हैं। पिलर संख्या 12 जगबुड़ा नदी द्वारा किए गए कटाव की वजह से नदी में समा गया है।
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मेलाघाट वन क्षेत्र में अतिक्रमण करने वाले अधिकांश लोग पूर्वांचल और बिहार के हैं। वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका यहां संदिग्ध रही है। एक ओर जहां जंगल काटे जा रहे हैं वहीं वनभूमि पर बोरिंग कर खेती की जा रही है। आए दिन नये झाले बनाए जा रहे हैं। एसएसबी की चौकियों के पास भी अतिक्रमणकारी जंगल काटकर खेती करने में जुटे हुए हैं।
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