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Udham Singh Nagar News: गर्मी की तपिश में वेतन और ओवरटाइम के लिए सिडकुल में उबाल
Tue, 28 Apr 2026 12:38 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 28 Apr 2026 12:38 AM IST
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रुद्रपुर। सिडकुल औद्योगिक क्षेत्रों में इन दिनों कर्मचारियों का असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। कंपनियों के कर्मचारी वेतन बढ़ाने और ओवरटाइम भुगतान के लिए आंदोलनरत हैं। धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन का दौर जारी है। एक हफ्ते में सिडकुल की रेहरोक, बेलराइज, टाटा असाल, महाबल, डीबीएस और वी-गार्ड आदि कंपनियों के श्रमिकों को वेतन बढ़ोतरी के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि पिछले चार-पांच वर्षों से वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। हर साल काम का दबाव बढ़ता जा रहा है लेकिन वेतन वही पुराना है। ओवरटाइम भी पूरा नहीं मिलता जिससे आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। औद्योगिक इकाइयों के श्रमिकों का आरोप है कि कई कंपनियां ओवरटाइम के नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। तय दर से कम भुगतान या फिर ओवरटाइम के घंटे दर्ज ही नहीं किए जाते।
जल्द मिल सकती है श्रमिकों को राहत प्रशासनिक
सूत्रों के अनुसार शासन स्तर पर मजदूर समिति का गठन हो चुका है। समिति की बैठक में श्रमिकों के वेतन वृद्धि को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है। समिति में कंपनी प्रबंधन और शासन के अधिकारियों के बीच वार्ता होगी।
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श्रमिकों का कम से कम 18 हजार प्रतिमाह तय हो वेतनमान
श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी का कहना है कि कंपनी में वर्षों तक काम करने के बाद श्रमिकों का वेतन के लिए प्रदर्शन करना विवशता है क्योंकि प्रबंधन श्रमिकों से लगातार काम ले रहे हैं। श्रमिकों का कम से कम 18 हजार रुपये वेतन होना चाहिए। यदि समय रहते इस मुद्दे का हल नहीं हुआ तो औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित होने और विवाद बढ़ने की आशंका है।
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कर्मचारियों का कहना है कि पिछले चार-पांच वर्षों से वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। हर साल काम का दबाव बढ़ता जा रहा है लेकिन वेतन वही पुराना है। ओवरटाइम भी पूरा नहीं मिलता जिससे आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। औद्योगिक इकाइयों के श्रमिकों का आरोप है कि कई कंपनियां ओवरटाइम के नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। तय दर से कम भुगतान या फिर ओवरटाइम के घंटे दर्ज ही नहीं किए जाते।
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जल्द मिल सकती है श्रमिकों को राहत प्रशासनिक
सूत्रों के अनुसार शासन स्तर पर मजदूर समिति का गठन हो चुका है। समिति की बैठक में श्रमिकों के वेतन वृद्धि को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है। समिति में कंपनी प्रबंधन और शासन के अधिकारियों के बीच वार्ता होगी।
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श्रमिकों का कम से कम 18 हजार प्रतिमाह तय हो वेतनमान
श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी का कहना है कि कंपनी में वर्षों तक काम करने के बाद श्रमिकों का वेतन के लिए प्रदर्शन करना विवशता है क्योंकि प्रबंधन श्रमिकों से लगातार काम ले रहे हैं। श्रमिकों का कम से कम 18 हजार रुपये वेतन होना चाहिए। यदि समय रहते इस मुद्दे का हल नहीं हुआ तो औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित होने और विवाद बढ़ने की आशंका है।