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सलाखों के पीछे पहुंचा हमदम अस्पताल का मालिक
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/ रुद्रपुर
Updated Tue, 29 Dec 2015 12:32 AM IST
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जसपुर में नवाब हत्याकांड में शामिल आरोपी खालिद के हमदम अस्पताल से जुड़े कनेक्शन खंगालने में जुटी पुलिस ने बड़ा फर्जीवाड़े को उजागर किया है। फर्जी डिग्रियों के सहारे कथित डाक्टर ने दो अस्पताल खड़े कर डाले और गरीब मरीजों की जान से खिलवाड़ करता रहा। पुलिस ने अस्पताल मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।
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जसपुर में नवाब हत्याकांड का खुलासा करते हुए पुलिस ने मृतक की पत्नी सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार एक आरोपी खालिद ने काशीपुर के हमदम अस्पताल में सर्जरी टेक्नीशियन होने की बात कही थी, लेकिन उसके पास शैक्षिक योग्यता नहीं थी। संदेह होने पर एसएसपी ने हमदम अस्पताल के मालिक के खिलाफ गहनता से छानबीन करने के निर्देश टीम को दिए थे।
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सोमवार को अपने कार्यालय में पत्रकार वार्ता में एसएसपी केवल खुराना ने बताया कि हमदम अस्पताल के मालिक डॉ. दिवाकर कुमार सिंह (डीके सिंह) आरोपी खालिद की तैनाती के बारे में कोई कागजात नहीं दिखा सका। जब डीके सिंह की शैक्षिक योग्यता के बारे में छानबीन की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। डीके सिंह का असली नाम दशरथ कुमार मौर्या और वह ग्राम अछार थाना दक्षिण टोला मऊ यूपी का रहने वाला निकला।
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वह नाम के साथ ही पता भी गाजीपुर का दर्शाता रहा है। उसने 1992-93 में छह महीने तक मिर्जाहादीपुर के एक मेडिकल स्टोर में काम किया। उसके बाद कानपुर में क्लीनिक खोलकर लोगों का इलाज किया। वर्ष 2010 में उसने बाजपुर में अल्सीफा अस्पताल और कोचिंग सेंटर भी खोला। जांच होने पर फंसने के डर से उसने अस्पताल का नाम बदलकर ताज रख दिया। वर्ष 2013 में डीके ने काशीपुर में हमदम अस्पताल खोल दिया।
बिना अनुभव वाले स्टाफ को रखकर लोगों का ऑपरेशन किया। उन्होंने बताया कि डीके सिंह ने बीएचयू बनारस से एमबीबीएस और श्री शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से आयुर्विज्ञान वाचस्पति का फर्जी सर्टिफिकेट बनाया। पूछताछ में पता चला कि डीके ने किसी डॉ. तरुण मल्होत्रा के सर्टिफिकेट के प्रारुप में धोखाधड़ी कर अपने नाम का कागज तैयार किए थे। एसएसपी खुराना ने बताया कि आरोपी डीके सिंह के खिलाफ धारा 420, 467, 471 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है।