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यहां सब कुछ खाक होने के बाद पहुंचता है दमकल वाहन

Tue, 11 Apr 2017 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो बाजपुर
अमर उजाला ब्यूरो बाजपुर Updated Tue, 11 Apr 2017 12:12 AM IST
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Here everything goes after the blaze
बाजपुर बेरिया दौलत रोड पर बना अस्थाई फायर बिग्रेड स्टेशन - फोटो : अमर उजाला

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बाजपुर में फायर स्टेशन खोले का प्रस्ताव दस साल से शासन स्तर पर लटका हुआ है। फायर स्टेशन की स्थाई तौर पर स्थापना न होने से हर साल आग से लाखों रुपये की संपत्ति जलकर राख हो जाती है। क्षेत्र में आग की घटना होने पर काशीपुर से फायर ब्रिगेड गाड़ी मंगाई जाती है। फायर ब्रिगेड के वाहन के वहां से यहां पहुंचने में सवा घंटा लगता है। जब तक दमकल का वाहन काशीपुर से यहां पहुंचता तक तक सब कुछ जलकर राख हो जाता है।

बताते चलें कि वर्ष 2007 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी केके निराला ने बेरिया दौलत स्थित सरकारी बंजर भूमि पर फायर स्टेशन का प्रस्ताव शासन को भेजा था। उस दौरान तत्कालीन विधायक व वर्तमान कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे विधायक निधि से दो कक्षों का निर्माण कराकर 23 मई 2007 को अस्थाई फायर बिग्रेड स्टेशन का लोकार्पण भी किया था। लेकिन शासन स्तर से फायर स्टेशन मंजूरी नहीं मिली। जो अभी तक मामला शासन स्तर पर लंबित है।
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हर साल काशीपुर फायर स्टेशन से एक दमकल गाड़ी अप्रैल से जून माह तक बाजपुर में रहती है। इस साल अभी तक दमकल नहीं पहुंची है। फायर स्टेशन को लेकर राजनीतिक दल और नेता भी गंभीर नहीं है। जबकि क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनी पेप्सी, शुगर मिल, पॉलीप्लेक्स, तीन सरिया फैक्ट्री, रेडिको खेतान सहित कई बड़े उद्योग स्थापित हैं। कोसी नदी खनन क्षेत्र में 500 से अधिक झोपड़ी डालकर मजदूर रहते हैं। हर साल आग लगने से करीब 100 अधिक झोपड़ी जलकर राख हो जाती है। अग्रिकांड होने पर क्षेत्र में फायर बिग्रेड की कमी हमेशा खलती है।
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नायब नाजिर मोहम्मद ऊमर ने बताया कि 2007 में सरकारी बंजर भूमि पर अस्थाई रुप से फायर स्टेशन के तौर स्थापित किया गया था। उक्त भूमि फायर विभाग के नाम हस्तांतरण भी हो चुकी हैं।



बाजपुर। तहसील क्षेत्र के अंतर्गत बाजपुर शहर के अलावा, नपं केलाखेड़ा, नपं सुल्तानपुर पट्टी और 57 ग्राम पंचायत हैं। लेकिन शासन स्तर से आग से निपटने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। लोग बाल्टियों से पानी डालकर ही आग बुझाते हैं। अप्रैल महीने में आग से 42 झोपड़ियां और करीब 10 एकड़ गेंहूं की फसल नष्ट हो चुकी है। 4 अप्रैल को कोसी खनन घाट में हुए अग्निकांड में आठ माह के मासूम की जलकर दर्दनाक मौत हो चुकी है। एसएसआई कमलेश भट्ट ने बताया कि आग बुझाने के  फायर हाईड्रेन उपकरण थाने स्तर पर नहीं है।  




बाजपुर फायर ब्रिगेड स्टेशन को शासन से मंजूरी नहीं मिली है। अस्थाई तौर पर हर साल अप्रैल से जून तक एक दमकल बाजपुर में भेजी जाती है। इस साल चैती मेला समाप्त होने पर फायर ब्रिगेड गाड़ी भेजी जायेगी।
 रमेश चंद शर्मा  अग्निशमन अधिकारी काशीपुर
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