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दबदबा: बैडमिंटन और स्वीमिंग छोड़कर आए...साइकिलिंग में छाए, हरियाणा में नहीं है वेलोड्रम; फिर भी जीता गोल्ड

Thu, 06 Feb 2025 12:51 PM IST
हीरा मेहरा चंदन बंगारी, अमर उजाला
चंदन बंगारी, अमर उजाला Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 06 Feb 2025 12:51 PM IST
सार

राष्ट्रीय खेल में ट्रैक साइकिलिंग में हरियाणा को पहली बार गोल्ड दिलाने वालीं चारों महिला खिलाड़ी अपनी उपलब्धि पर गदगद हैं। वेलोड्रम में हुए मुकाबले में हिमांशी सिंह, पारूल, अंशू देवी और मीनाक्षी की टीम ने हरियाणा के लिए गोल्ड जीता। 

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Haryana won gold in track cycling in 38th national games
ट्रैक साइकिलिंग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय खेल में ट्रैक साइकिलिंग में टीम परस्यूट स्पर्धा में हरियाणा को पहली बार गोल्ड दिलाने वालीं चारों महिला खिलाड़ी अपनी उपलब्धि पर गदगद हैं। वेलोड्रम में हुए मुकाबले में हिमांशी सिंह, पारूल, अंशू देवी और मीनाक्षी की टीम ने हरियाणा के लिए गोल्ड जीता। खास बात यह है कि टीम में शामिल दो खिलाड़ियों को पांच-छह साल पहले तक साइकिलिंग नहीं बल्कि बैडमिंटन और स्वीमिंग में दिलचस्पी थी।

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सोनीपत निवासी पारूल ने बतौर शटलर स्टेट लेवल तक का सफर तय किया है। अंशू देवी ने भी तैराकी में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया। बचपन से खेले खेल को छोड़कर आईं इन खिलाड़ियों ने सुविधाओं के अभाव के बावजूद मेहनत के बल पर अपने प्रदेश का मान बढ़ाया है।

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अवसर नहीं मिला तो शटलर पारूल बन गईं साइकिलिस्ट
साइकिलिस्ट पारूल वर्ष 2016 से 2021 तक बैडमिंटन खिलाड़ी रही हैं। वह इसमें राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं। कोच ओंकार सिंह ने बताया कि उचित अवसर नहीं मिल पाने के कारण पारूल पिता प्रीत कुमार के कहने पर साइकिलिंग में आ गईं। हरियाणा में वेलोड्रम नहीं है। बच्चे हरियाणा से पंजाब के पटियाला में जाकर ट्रेनिंग करते हैं। उन्होंने भी टीम के साथ पटियाला जाकर खूब पसीना बहाया। पारूल ने बताया कि उनकी टीम बीते कई महीनों से दिन-रात मेहनत कर रही थी। राष्ट्रीय खेलों में बेहतर प्रदर्शन के लिए वह प्रतियोगिता के शुरू होने से पांच दिन पहले ही रुद्रपुर आ गईं थीं ताकि यहां की परिस्थितियों में खुद को ढाल सकें। कहा कि उनका लक्ष्य अब ओलंपिक में भारत को साइकिलिंग के शिखर पर देखना है।

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कोविडकाल में जिंदगी की रफ्तार थमी तो अंशु ने दौड़ाई साइकिल
महिला वर्ग के टीम परस्यूट में ओडिशा को मात देने वाली हरियाणा की टीम का हिस्सा रहीं अंशू देवी की साइकिलिस्ट बनने की कहानी दिलचस्प है। कोविडकाल से पहले अंशु की पहचान एक तैराक की थी। वह स्वीमिंग में प्रदेश स्तर की खिलाड़ी रहीं। कोविडकाल के दौरान स्वीमिंग के बंद हो जाने पर उन्हें बड़ी निराशा हुई। यही समय उनकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट बनकर उभरा। उस वक्त सड़कों पर लोग साइकिलिंग करते नजर आए तो अंशु ने भी स्वीमिंग छोड़ साइकिल का हैंडल थाम लिया। यहीं से उनकी साइकिलिंग यात्रा शुरू हुई। अंशु कहती हैं कि पहले वह रोड राइडर थी। फिर उसे छोड़कर ट्रैक साइकिलिंग पर आईं। 15 दिन ट्रैक पर मेहनत की और उसी के फलस्वरूप आज अपने प्रदेश के लिए पदक जीतने में कामयाब हुईं।

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